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अफगान सेंट्रल बैंक के गवर्नर ने बताई आपबीती, किस तरह जान बचाकर भागे

अफगानिस्तान में हालात बेकाबू हैं. काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सामने आए वीडियो दिल दहला देने वाले थे. अब भी बहुत सारे लोग ऐसे हैं, जो अफगानिस्तान से निकलना चाहते हैं. अफगानिस्तान के सेंट्रल बैंक DAB के गवर्नर अजमल अहमदी भी उन लोगों में हैं, जो अफगानिस्तान छोड़ चुके हैं. अफगान राष्ट्रपति के आर्थिक सलाहकार रहे अहमदी ने 18 ट्वीट्स के जरिए पूरे हालात बताए हैं. उन्होंने जो आंखों-देखी बताई है, वह काफी भयावह है.

तालिबान ने पहले गांवों को निशाना बनाया

उद्योग और वाणिज्य विभाग के मंत्री रह चुके अजमल अहमदी ने ट्वीट्स के जरिए बताया कि तालिबान ने पहले ग्रामीण इलाकों पर कब्जा जमाया. उसके बाद उसने प्रांतीय राजधानियों को निशाना बनाया. उन्होंने लिखा कि

पिछले हफ्ते अफगानिस्तान में सरकार का पतन तेजी से और पूरी तरीके से हो गया. ये काफी विचलित करने वाला और समझने में मुश्किल था. सेंट्रल बैंक के गवर्नर के रूप में मेरे दृष्टिकोण से इस तरह की घटनाएं बढ़ती जा रही थीं. हालांकि पिछले कुछ महीनों में अधिकांश ग्रामीण इलाकों में तालिबान का कब्जा हो गया था. पहली प्रांतीय राजधानी केवल हफ्ते भर पहले ही कब्जाई थी. 6 अगस्त को जीरंज कब्जे में गया. अगले 6 दिनों में कई और राज्यों पर कब्जा हुआ, खासकर उत्तर में.

हार्वर्ड विश्वविद्यालय से MBA करने वाले अहमदी ने आगे लिखा कि इस तरह की अफवाहें थीं कि (सेना को) लड़ाई नहीं करने के निर्देश ऊपर कहीं से आ रहे थे. अट्टा नूर और इस्माइल खान में यही हुआ. भरोसा करना कठिन है लेकिन इस बात पर शक तो होता है कि ANSF (अफगान नेशनल सिक्योरिटी फोर्स) ने इतनी जल्दी अपनी पोस्ट क्यों छोड़ीं. कुछ तो है, जो अस्पष्ट रह गया है.

लगातार आगे बढ़ रहा था तालिबान

अजमल अहमदी ने लिखा कि

मुद्रा अस्थिरता (Currency volatility) और अन्य संकेतक (indicators) बुरी स्थिति में थे, इसके बाद भी बिगड़ते सुरक्षा हालात को देखते हुए DAB पिछले हफ्ते तक आर्थिक हालात (macroeconomic environment) को संभालने की स्थिति में था. लेकिन इसके बाद गुरुवार का दिन आया. मैंने औपचारिक मीटिंग्स में हिस्सा लिया. सुबह गजनी पर कब्जे की खबर मिली. इसके बाद मैंने काम रोका और घर पहुंचा. हेरात, कंधार और बगदीस पर भी कब्जा कर लिया गया था. हेलमंद राज्य पर भी गंभीर हमला हुआ था.

अहमदी लिखते हैं कि शुक्रवार को हमें एक कॉल आया कि बिगड़ते हालात के मद्देनजर हमें और डॉलर शिपमेंट नहीं मिलेगा. लोगों ने अफवाहें फैलानी शुरू कर दीं कि मैं शुक्रवार को भाग चुका हूं. शनिवार को DAB ने मार्केट में कम करेंसी की सप्लाई की, जिसके कारण लोगों में घबराहट और भी बढ़ गई. करेंसी का रेट पहले 81 से बढ़कर 100 हुआ और फिर 86 पर आ गया. मैंने शनिवार को मीटिंग्स में हिस्सा लिया. बैंकों और मनी एक्सचेंजर्स को शांत रहने का आश्वासन दिलाया. मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि ये सब काबुल पर कब्जा होने से महज एक दिन पहले की बात है.

जिम्मेदार लोग देश छोड़कर भाग गए

शनिवार की रात मेरे परिवार ने मुझे फोन पर बताया कि अधिकतर सरकारें गिर चुकी हैं. मैं हैरान रह गया. ऐसा अनुमान था कि तालिबान अगले 36 घंटों में काबुल पहुंचेगा, और 56 घंटों के भीतर उसका कब्जा हो जाएगा. मैं परेशान हो गया था. मैंने एहतियात के तौर पर सोमवार के लिए टिकट खरीद लिए थे. रविवार को मैंने काम शुरू किया. जो खबरें सामने आ रही थीं, वह डरा रही थीं. मैंने जूनियरों को जिम्मेदारी दी और बैंक छोड़ दिया. हालांकि मुझे वहां बचे कर्मचारियों की चिंता हो रही थी.

जब मैं एयरपोर्ट पहुंचा तो वहां अफगानिस्तान के नेताओं- सांसद मोहम्मद मोहक्क, रहमानी और मोहम्मद मसूद वगैरह को देखा. मैंने उपराष्ट्रपति (सरवर) दानिश को जाते देखा. कथित तौर पर कतर के लिए. लेकिन ऐसी भी अफवाहें थीं कि उपराष्ट्रपति (अमरुल्लाह) सालेह भी जा चुके हैं. मंत्री और बाकी लोग फ्लाइट्स का इंतजार कर रहे थे. लेकिन वो कैंसिल हो गईं. मैंने रविवार शाम 7 बजे की Kam Air की टिकट ली. 

एयरपोर्ट पर चली गोलियां

अहमदी ने लिखा कि मैं जानता था कि मेरी फ्लाइट कैंसिल हो सकती है और एयरपोर्ट पर भगदड़ मच सकती है. जैसी उम्मीद थी, कर्मचारियों और सेना ने अपनी पोस्ट छोड़ दी थीं. सब Kam Air फ्लाइट के दरवाजों की ओर दौड़ पड़े थे. 100 सीटों वाले प्लेन में 300 से अधिक पैसेंजर भर चुके थे. विमान में ना तो ईंधन था और ना ही पायलट, फिर भी हमें उम्मीद थी कि ये उड़ान भरेगा. उन्होंने आगे लिखा कि

मैंने इस विमान से उतरने का फैसला किया. मैंने एक दूसरा मिलिट्री प्लेन देखा. ये प्लेन लोगों से घिरा हुआ था. वो उस पर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे. गार्ड लोगों को हटा रहे थे, और अपने दूतावास के लोगों को चढ़ने में मदद कर रहे थे. यहां भगदड़ जैसी स्थिति थी. तभी कुछ गोलियां चलीं. किसी तरह मेरे सहयोगियों ने मुझे बोर्ड की ओर धकेला.

राष्ट्रपति के इर्दगिर्द अनुभवहीन लोग

अफगान सेंट्रल बैंक के गवर्नर ने ट्वीट्स में आगे लिखा कि मैं अफगान लीडरशिप की प्लानिंग की कमियों पर नाराज था. मैंने देखा कि वो लोग दूसरों को बताए बिना निकल जा रहे थे. मुझे केवल तालिबान का ही रिस्क नहीं था बल्कि इस बात का भी डर था कि सत्ता में बदलाव के दौरान कोई चेन ऑफ कमांड भी नहीं रहेगी. एक बार राष्ट्रपति के जाने की खबर सामने आई तो मैं समझ गया कि अब मिनटों में भगदड़ की स्थिति होने वाली है. बिना हस्तांतरण प्लान के देश छोड़कर चले जाने की वजह से मैं उन्हें कभी माफ नहीं करूंगा.

DAB के चीफ ने लिखा कि मैंने अब तक उनकी आलोचना नहीं की, लेकिन प्रमुख हस्ती फ़ज़ली और मोहिब अपनी भूमिकाओं में बहुत अनुभवहीन थे, और ये राष्ट्रपति की विफलता थी कि उन्होंने ऐसी कमजोरियों को कभी नहीं पहचाना. उनके पास अच्छे आइडिया थे लेकिन काम नहीं होता था. अगर मैंने भी उसमें योगदान दिया है तो मैं अपने हिस्से का दोष लेता हूं.


वीडियो- अफ़ग़ानिस्तान में हावी तालिबान महिलाओं के साथ कैसा बर्ताव करता है?

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