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पहले से फंसी 69000 शिक्षक भर्ती में अब पता चला, रुमाल से हो रही थी नकल!

राहुल सिंह. प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं. यूपीएससी की तैयारी करते हैं. यूपी पीसीएस का मेंस दे रखा है. पिछले साल आई 69000 सहायक शिक्षक भर्ती तो राहुल ने इसका एग्जाम भी दे डाला. वो टीईटी क्वॉलिफाइड जो थे. तो लगा क्यों मौका गंवाया जाए. रिजल्ट आया तो भैया के सुपर टीईटी में नंबर कुछ कम आए. परेशान राहुल एक दिन प्रतापगढ़ से प्रयागराज आ रहे थे. जहां वो पढ़ाई-लिखाई करते हैं.

रास्ते में एक चाय की टपरी पर 4-5 लोग बातें कर रहे थे. 69000 भर्ती के बारे में ही. राहुल को देख रुद्र प्रताप दुबे नाम के बंदे ने उनसे पूछा, ‘का भैया आप भी दिए हैं क्या परीक्षा?’
राहुल ने जवाब दिया- हां.
फिर रुद्र ने पूछा क्या स्कोर रहा. जवाब सुन रुद्र बोले- ये तो थोड़ा कम है. राहुल बोले – हां कुछ कम तो है.
रुद्र तुरंत बोले- हम नंबर बढ़वा देंगे. नौकरी भी लगवा देंगे.

69000 शिक्षकों की भर्ती का मामला पिछले डेढ़ साल से अटका हुआ था. (फोटो- सोशल मीडिया)
69000 शिक्षकों की भर्ती का मामला पिछले डेढ़ साल से अटका हुआ था. (फोटो- सोशल मीडिया)

रुद्र और राहुल के नंबर एक्सचेंज हो गए. रुद्र और राहुल की बातचीत होती रही. राहुल को रुद्र ने ऑफर दिया. 7.5 लाख रुपए दो और नौकरी तुम्हारी. राहुल मान गए और पैसे रुद्र को सौंप दिए. राहुल नहीं जानते थे ये चाय की टपरी. ये चर्चा. सब एक खेल की शुरुआत थी. खेल बाद में समझाएंगे.

69000 शिक्षक भर्ती पर लौटते हैं. दिसंबर, 2018 में यूपी की योगी सरकार ने भर्ती निकाली. 6 जनवरी को करीब चार लाख कैंडिडेट्स ने एग्जाम दिया. राहुल भी इन एग्जाम देने वालों में एक थे. फिर इसका कटऑफ जारी हुआ जिस पर बवाल शुरू हो गया. जनवरी 2019 को मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच पहुंच गया. सरकार हार गई. सरकार गई डिवीजन बेंच में. 6 मई 2020 को फैसला आया. जिसमें 3 महीने के भीतर इस भर्ती को पूरी करने का आदेश दिया गया. सरकार ने तेजी दिखाई. 6 जून तक नियुक्ति पत्र जारी करने की भी बात हो गई. मगर फिर मामला पहुंच गया सुप्रीम कोर्ट. इधर सवालों पर आपत्ति को लेकर हाई कोर्ट ने अब 6 जुलाई तक सरकार से जवाब मांगा है. 14 जुलाई को अगली सुनवाई होगी. माने भर्ती फिर गई है फंस. पिछले दिनों इस भर्ती को लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब ट्रेंड-सेंड चले.

अब शुरू हुआ नया बवाल

पर अब ये भर्ती दूसरी वजह से चर्चा में है. चर्चा पैसे देके नौकरी दिलवाने की. सुप्रीम कोर्ट गए शिक्षामित्र इस तरह के आरोप पहले भी लगाते रहे हैं. केस इन्हीं राहुल का है. जिनका जिक्र हमने किया. मई में भर्ती का जब फाइनल रिजल्ट आया तो उसमें राहुल का नाम नहीं था. रुद्र अब फोन भी नहीं उठा रहा था. राहुल ठगे जा चुके थे. राहुल पहुंचे प्रयागराज एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध के पास. सत्यार्थ ने एफआईआर दर्ज करवाई.

एसएसपी ने बिना देरी मामले में कार्रवाई भी शुरू करवा दी. सेम डे. 4 जून को मामला दर्ज हुआ. उसी दिन रुद्र दुबे समेत 9 लोगों को गिरफ्तार किया. 22 लाख रुपये, फॉर्च्यूनर और बोलेरो गाड़ी बरामद हुईं. बाकायदा एक पूरे रैकेट का भंडाफोड़ हुआ जो राहुल जैसे तमाम लोगों से पैसे लेकर बैठा था.

मामले में हमने एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध से बात की. उन्होंने पहले दो नाम बताए. केएल पटेल और ललित त्रिपाठी. दोनों माफिया हैं. केएल पटेल झांसी में सीएचसी में मेडिकल ऑफिसर है. ट्रस्ट के नाम पर प्रयागराज में चार स्कूल, कॉलेज चलवाता है. यही पटेल ललित त्रिपाठी से ये भर्तियों का खेल चलवाता है. दोनों माफिया हैं.
खेल वही जो राहुल के साथ हुआ. जगह-जगह इनके लड़के तैनात हैं जो राहुल जैसे लोगों को ढूंढते हैं जो नौकरी के लिए लगे हैं. उनको लालच देते हैं. झांसे में लेते हैं और फिर पैसे ऐंठ लेते हैं. पटेल का नाम एमपी में हुए भर्ती वाले व्यापमं घोटाले में भी आया था.

रुमाल से होती है नकल
एसएसपी ने इनके काम के तरीके के बारे में बताया कि ये लोग आंसर शीट का जुगाड़ कर लेते हैं. और उसे एक रुमाल में छाप देते हैं. जिससे पैसे मिले होते हैं उसे ये रुमाल मिल जाता है और वो एग्जाम में इसे आसानी से ले जाकर आंसर शीट भर देता है. बाकि ये लोग ब्लूटूथ डिवाइसेज और तमाम अन्य तकनीकों से भी नकल करवाते हैं. एसएसपी ने बताया कि इस गैंग के तार पूरे प्रदेश में हैं. इन लोगों से पूछताछ जारी है. तमाम और लोगों को गिरफ्तार करने की तैयारी है.

हो रही प्रयागराज पुलिस की तारीफ

माने जिस 69000 भर्ती पर पहले ही कम आरोप नहीं थे, उस पर अब एक और विवाद हो गया है. मामले में प्रयागराज पुलिस और एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध की भी तारीफ हो रही है. एक दिन के अंदर इस कार्रवाई के लिए.
सत्यार्थ अनिरुद्ध की बात करें तो वो बिहार के रहने वाले हैं. 2010 बैच के आईपीएस हैं. इससे पहले जेएनयू से हिंदी साहित्य की पढ़ाई की है. उनकी गिनती यूपी के साफ छवि वाले अफसरों में होती है. यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद उनकी पोस्टिंग भी बड़े पॉलिटिकल सेंटर वाले शहरों में रही. सीएम सिटी गोरखपुर में रहना हो या फिर मथुरा या फिर अब प्रयागराज. सत्यार्थ को एक और शौक है. कविताएं लिखने का. और पुलिसिंग तो प्रयागराज का ये केस बता ही रहा है.


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69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती: सभी दावे, सभी आपत्तियों समेत पूरी कहानी

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