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NEET, JEE आगे बढ़ाने की मांग कर रहे छात्र ये पांच कारण बता रहे हैं

NEET और JEE की परीक्षा आगे बढ़ाने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं. कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार पर इसे टालने के लिए दबाव बना रहे हैं. गैर-बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने छात्रों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से परीक्षा की तारीख आगे बढ़ाने की अपील की है. हालांकि केंद्र सरकार और NTA अभी भी अपने पुराने रुख पर कायम है कि परीक्षा नियत समय पर ही होगी. आइए जानते हैं छात्रों के उन तर्कों के बारे में, जिन के आधार पर छात्र परीक्षा आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. 

 छात्र क्यों चाहते हैं कि आगे बढ़े परीक्षा की डेट 

1. बाढ़

ओडिशा, असम और बिहार की एक बड़ी आबादी बाढ़ से जूझ रही है. लोगों के सामने खाने-पीने और रहने की समस्या है. ऐसे में इन इलाकों के छात्र कैसे परीक्षा दे पाएंगे, ये समझ से परे हैं. ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और बिहार के राजद नेता तेजस्वी यादव ने बाढ़ का हवाला देते हुए परीक्षा को टालने की अपील की है. 

2. कोरोना 

पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट के. श्रीनाथ रेड्डी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा कि 15 सितंबर के आसपास भारत में कोरोना का पीक आ जाएगा. इसके अलावा और भी कई रिपोर्ट्स में ये कहा गया कि भारत कोरोना सितंबर में पीक पर होगा. ऐसे में छात्रों का तर्क है कि जिस समय कोरोना पीक पर होगा, उसी समय एग्जाम कराने का क्या तुक है? क्या इसे कुछ समय के लिए टाला नहीं जा सकता है?   

3. ट्रांसपोर्ट

देश अभी भी पूरी तरह से अनलॉक नहीं हुआ है, बल्कि कई राज्यों में तो कड़ाई से लॉकडाउन का पालन कराया जा रहा है. ऐसे में छात्रों के सामने अपने घर से सेंटर तक पहुंच पाना एक बड़ी चुनौती है. बड़ी संख्या में छात्रों का सेंटर 150 से 200 किलोमीटर तक गया है. कई छात्रों को परीक्षा देने के लिए 500 किलोमीटर तक जाना पड़ेगा. जिन छात्रों के पास खुद के साधन हैं, वे तो किसी तरह जा भी सकते हैं. लेकिन जिन छात्रों के पास ये सुविधा नहीं है, वो परीक्षआ को आत्महत्या जैसा बता रहे हैं. 

4. रुकने और रहने की समस्या 

जिन छात्रों का सेंटर दूसरे शहरों में गया है, उनके सामने ट्रांसपोर्ट की समस्या के साथ-साथ एक बड़ी समस्या उन शहरों में रहने और खाने-पीने की भी है. लॉकडाउन की वजह से होटल बंद हैं और ट्रैवेल करके रिश्तेदारों या दोस्तों के यहां जाने भी सही नहीं है. ऐसे में ये छात्र कहां, रहेंगे और क्या खाएंगे, ये बड़ी समस्या है. 

5. मास्क और ग्लव्ज 

पूरी परीक्षा के दौरान मास्क लगाकर रखना अनिवार्य है. ये उन छात्रों के लिए बड़ी समस्या है, जिन्हें अस्थमा है. इसके अलावा मास्क और चश्मा एकसाथ पहनने से चश्मे में भाप जमा होने लगती है. ‘दी लल्लनटॉप’ से बातचीत में एक छात्र ने दावा किया कि उन्हें परीक्षा के दौरान ग्लव्ज लगाने के लिए भी कहा गया है, जिनकी वजह से लिखित परीक्षा देने में काफी दिक्कत आ सकती है. 

सरकार परीक्षा कराने पर अडिग

उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने ‘दी इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए कहा, 

ये परीक्षाएं पहले अप्रैल में आयोजित की जाती थीं, लेकिन इस बार ये सितंबर तक आगे बढ़ा दी गईं. अब छात्रों का एक वर्ग मांग कर रहा है कि ये दीपावली तक के लिए आगे बढ़ा दी जाएं. अगर अब हम परीक्षा आयोजित करने के लिए एक सप्ताह का समय भी और आगे बढ़ाते हैं, तो फिर हम दिसंबर के पहले सप्ताह में ही एग्जाम करा पाएंगे और फिर परिणाम की घोषणा 2021 में ही हो पाएगी. इसका साफ मतलब है कि छात्रों का पूरा साल खराब हो जाएगा. 

150 शिक्षाविदों ने लिखी चिट्ठी

देश-विदेश के 150 से अधिक शिक्षाविदों ने पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर तय समय पर ही NEET और JEE की परीक्षा आयोजित कराने की मांग की है. इन शिक्षाविदों का कहना है कि कुछ लोग अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश कर रहे हैं. इस पत्र में लिखा गया है, 

कोविड-19 महामारी की वजह से छात्रों के करियर पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं. एडमिशन और क्लासेज को लेकर ढेर सारी आशंकाएं हैं, जिन्हें जल्द से जल्द हल करने की आवश्यकता है. हर साल की तरह इस साल भी लाखों छात्रों ने 12वीं की परीक्षा दी है. वे अब प्रवेश परीक्षाओं का इंतजार कर रहे हैं. परीक्षा आयोजित करने में किसी तरह की देरी से छात्रों का कीमती साल बर्बाद हो जाएगा.  

चिट्ठी लिखने वाले शिक्षाविदों में दिल्ली यूनिवर्सिटी, JNU, BHU, आईआईटी दिल्ली और विदेशी संस्थानों में पढ़ा रहे भारतीय प्रोफेसर शामिल हैं. इधर केंद्र सरकार ने दावा किया है कि कि 99 फीसदी छात्रों को उनकी पसंद का केंद्र दिया गया है. 26 अगस्त तक जेईई मेन के लिए 332 छात्रों ने परीक्षा केंद्र वाला शहर बदलने का आग्रह किया है, जिस पर विचार किया जा रहा है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का ये भी कहना है कि वो परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ सीटिंग प्लान बदल रही है. एक कमरे में अब पहले से कम छात्रों को बैठाया जाएगा. छात्रों को छोटे छोटे समूह में प्रवेश मिलेगा और इसी तरह वो वापस जाएंगे. 


NEET-JEE की डेट आगे बढ़ाने की मांग कर रहे छात्रों की क्या समस्या है?

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