इस पूरी पोस्ट में केवल एक टेक्निकल शब्द यूज़ हुआ है और वो भी लेख की पहली ही लाइनमें - कंडीशनल एक्सेस सिस्टम. अब ये क्या होता है वो जानने के लिए थोड़ा समय कोरिवाईंड करके दूरदर्शन के दिन याद किए जाएं.--------------------------------------------------------------------------------# दूरदर्शनवो एंटीना हिला कर चित्रहार देखने वाला नास्टैल्जिक मोमेंट तो न जाने कितनी हीफिल्मों, नॉवेलों और सीरियलों में भुनाया जा चुका है. तो उसे रिपीट करके कोई फायदानहीं. लेकिन जो बात इंपोर्टेंट है वो ये कि उस वक्त टीवी देखने के लिए एक्को पैसानहीं देना पड़ता था. मतलब टीवी खरीद लिया, एंटीना खरीद लिया, हो गया काम! (ओह हां,स्टेबलाईज़र भी तो.)--------------------------------------------------------------------------------# केबल टीवीबहरहाल, फिर आया केबल टीवी का दौर. जिनके पास पैसे थे और जिनके पापा को अपने बच्चोंकी पढ़ाई की चिंता नहीं थी वो सब पैसा देकर अपने घर में 'केबल' लगवा लेते थे और हमजैसे निम्न मध्यमवर्गीय बच्चे उन केबल्स में कंटिया. (ये कंटिया वाला नास्टैल्जियाशायद अभी तक किसी भी मूवी में नहीं कैश हुआ है.) एक बात हमेशा याद रखिए जो चीज़ फ्रीमें मिलती है उसमें कोई सिक्यूरिटी नहीं होती लेकिन जो चीज़ पैसे देकर मिले उसमेंसिक्यूरिटी होना बहुत ज़रुरी है. क्यूं? वो इसलिए कि जिसने पैसे न दिए हों वो लोग भीलंगर न छक लें. तो केबल के ज़माने में तो सिक्यूरिटी इस बात से ही मेंटेन कर ली जातीथी कि तार जितने ऊपर से ले जाए जाएं उतना अच्छा.--------------------------------------------------------------------------------# डिश टीवीलेकिन फिर मध्यमवर्गीय पर कहर बन के आई डिश. बहरहाल, हमने भी हिम्मत नहीं हारी,पापा की छतरी से लेकर मम्मी के कूकर तक सब यूज़ किया. मगर सिग्नल नहीं आया तो नहींआया. हमने फिर भी हिम्मत नहीं हारी. अन्ताक्षरी और बेवाच के कितने ही एपिसोड मिस होगए थे. हम खरीद लाए एक डिश. उस वक्त यू ट्यूब तो होता नहीं था तो खुद ही जुगाड़ करकेजैसे तैसे उसे टीवी से जोड़ा. और तब हुआ चमत्कार! चमत्कार ये कि अच्छा खासा दूरदर्शनऔर डीडी मेट्रो आना भी बंद हो गया. हमाये पल्ले ही न पड़ा कि गलती किसकी, कहां हुईभूल. तब जाकर मुझे मेरे दोस्त के पापा ने कंडीशनल एक्सेस सिस्टम के बारे में बताया.दोस्त के पापा इंजीनियर नहीं, केबल ऑपरेटर थे. उन्होंने कहा कि जितने भी जुगाड़ लगालो जब तक मैं नहीं चाहूंगा डिश नहीं चलेगा. अब चूंकि वो इंजीनियर नहीं केबल ऑपरेटरथे तो उनकी ही बात को जस का तक आपको बता रहा हूं, यदि आप मेरा स्मृति दोष वाला'भू.चू.ले.दे.' माफ़ करें तो - 'देखो ये जो टीवी वाले हैं न ये जब सिग्नल भेजते हैंतो उसमें ताला भी लगा देते हैं. यानी अब तुम सिग्नल रिसीव कर भी लो तो भी बिना चाबीके वो खुलेगा नहीं. और टी.वी. में आएगा - झिलमिल सितारों का आंगन. और इस ताले कीचाबी वो किसी-किसी को देते हैं. किसी-किसी को का मतलब -उनको, जो चाबी के लिए पैसेदेते हैं. और इस ताले-चाबी वाले पूरे झाम को कहते हैं - कंडीशनल एक्सेस सिस्टम.शुद्ध हिंदी में कहें तो सशर्त प्रवेश प्रणाली. और हमारी वाली हिंदी में कहें तो -पैसा फेंक तमाशा... आई मीन बेवाच देख.' खैर, इन सब के बीच एक चीज़ जो समझ में आई वोये कि चोरी करना पाप है और नदी किनारे सांप है और खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे और नाचन आवे आंगन टेढ़ा.--------------------------------------------------------------------------------# लॉटरी वाले नंबरबहरहाल ग्रेजुएशन के दिन चल रहे थे और कौन बनेगा करोड़पति सुपर हिट हो चुका था. घरमें पापा ने अंततः डिश लगवा दिया था. एक दिन देखा कि टीवी में अजीब से नंबर आ रहेहैं. गौर किया तो पता चला कि रोज़ ही आते हैं, थोड़ी थोड़ी देर में. लगा कोई लॉटरी कानंबर है. सारे नंबर नोट करके केबल वाले अंकल के पास ले गए. उनसे कहा इनको कहां परजमा करना है? अंकल ने बताया देखो, तुम्हें कंडीशनल एक्सेस सिस्टम के बारे में तोबताया ही था मैंने - यानी केवल वो ही इस प्रोग्राम को देख सकते हैं जो पैसे देतेहैं. लेकिन लोगों ने इसका भी तोड़ ढूंढ लिया. वो प्रोग्राम की रिकॉर्डिंग करते हैंऔर लोगों को औने पौने दामों में बेच देते हैं. क्रिकेट और नई मूवीज़ के दाम तो औनेपौने से कुछ ज़्यादा ही होते हैं. अब हमें ये कैसे पता चले कि रिकॉर्डिंग कहां सेहुई है? इसलिए ही टीवी स्क्रीन में एक नंबर फ्लैश होता है. यही जो तुम नोट करके लाएहो.अब ये नंबर हर शहर, हर घर के लिए अलग-अलग होता है. तो इस तरह रिकॉर्डिंग मेंहमें वो नंबर भी दिख जाता है. और 'नंबर' पता चला, तो 'पता' पता चला. सिंपल! उस दिनके बाद से जिस काली धारी वाले नंबर से मैं चिढ़ता था उसके प्रति मेरे मन में इज्ज़तपैदा हो गई. बहरहाल अब केबल और डिश का भी दौर जा रहा है और डिजिटल टीवी का दौर आरहा है. देखना ये है कि इस दौर में चोरी कैसे होती है और सिक्यूरिटी कैसे. पिछलेसभी राउंड्स में कांटे की टक्कर रही थी देखें अब टॉम और जैरी में से इस'नेटफ्लिक्स' और 'हॉटस्टार' वाले राउंड फोर में कौन जीतता है?--------------------------------------------------------------------------------# अंततःतो 'रिविज़न' भी कर लेते हैं ताकि 'कन्फ्यूज़न' न रहे - टीवी में दिखने वाला यह कोडज़्यादातर एक काली पट्टी पर सफेद फॉन्ट से लिखा होता है. लेकिन कभी कभी यह पीलीपट्टी पर काले से और ऐसे ही कई अलग अलग रंगों से भी दिख सकता है. हर टीवी के लिए एकयूनिक कोड किसी एल्गोरिथम के चलते स्वतः जनरेट होता है. वो, जैसे किसी किसी वेबसाइटमें लॉग इन करते वक्त कैप्चा या ओ टी पी खुद जनरेट होते हैं वैसे ही. यह पायरेसीरोकने के लिए कारगर साबित होता है. क्यूंकि यदि किसी ने चोरी करने के उद्देश्य सेटीवी शो रिकॉर्ड किए होंगे तो ये कोड भी रिकॉर्ड हो जाएंगे. फिर चोर को इन कोड्स इननंबर्स की मदद से आसानी से ट्रैक किया जा सकता है.--------------------------------------------------------------------------------लल्लनटॉप में पढ़िए एक कविता रोज़: ‘मेरी मां मुझे अपने गर्भ में पालते हुए मज़दूरीकरती थी, मैं तब से ही एक मज़दूर हूं’ बड़े लोग इसी काम के लिए बेदांता नाम केहस्पताल में जाते हैं किन पहाड़ों से आ रहा है ये किस समन्दर को जा रहा है, येवक़्त क्या है? ‘पंच बना बैठा है घर में फूट डालने वाला’ पाब्लो नेरुदा की कविता काअनुवाद: अगर तू मुझे भूल जाए एक कविता रोज़: इसीलिए खड़ा रहा कि तुम मुझे पुकार लोसुनो परम ! पैदल चलना, हाथ से लिखना और सादा पानी पीना…--------------------------------------------------------------------------------VIDEO देखें:कुंवर नारायण की कविता ‘बात सीधी थी, पर…’