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क्या है टेस्ट क्रिकेट में अनोखा रिकॉर्ड बनाने वाले क्रिकेटर का शरद पवार कनेक्शन?

क्रिकेट में एवरेज का बड़ा भौकाल होता है. अक्सर कहा जाता है कि जिसका एवरेज ज्यादा, वो बड़ा प्लेयर. प्लेयर्स की रिटायरमेंट के बाद तो एवरेज का महत्व और बढ़ जाता है. विराट कोहली की महानता का ज़िक्र करने वाले अक्सर उनके एवरेज की दुहाई देते हैं. लेकिन क्रिकेट में ऐसे प्लेयर्स भी हुए हैं, जिनका एवरेज मज़ेदार वजह से याद किया जाता है. दरअसल इन क्रिकेटर्स का टेस्ट एवरेज उनके हाईएस्ट स्कोर से भी ज्यादा है.

भारतीय क्रिकेट में अभी तक सिर्फ एक ऐसा प्लेयर हुआ है. सदाशिव गणपतराव शिंदे. भारत के लिए कुल सात टेस्ट खेलने वाले शिंदे ने अपने करियर में 79 फर्स्ट क्लास मैच खेले थे. शिंदे पहली बार चर्चा में आए 1943-44 सीजन में. उन्होंने बॉम्बे के खिलाफ खेलते हुए महाराष्ट्र के लिए 186 रन देकर पांच विकेट लिए. हालांकि उनका यह प्रदर्शन बॉम्बे के विजय मर्चेंट के तिहरे शतक (359 नॉटआउट) के आगे दब गया.

# बैटिंग में नाम

बाद में 1946 के इंग्लैंड टूर के लिए उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली. इस टूर पर उन्होंने कुल 39 विकेट लिए. हालांकि यह विकेट टेस्ट मैचों में नहीं आए थे. इस टूर पर शिंदे ने सिर्फ एक टेस्ट खेला. लॉर्ड्स में हुए इस टेस्ट में उनकी बॉलिंग से ज्यादा बैटिंग चर्चा में रही. शिंदे ने रूसी मोदी के साथ आखिरी विकेट के लिए 43 रन की पार्टनरशिप की. हालांकि बॉल से वह कुछ खास नहीं कर पाए और अगले पांच साल में वो सिर्फ एक ही टेस्ट और खेल पाए.

शिंदे ने 1951-52 सीजन के दौरान दिल्ली में हुए एक टेस्ट मै में अपना बेस्ट प्रदर्शन किया. इंग्लैंड के खिलाफ हुए इस टेस्ट में शिंदे को तीसरे चेंज के रूप में बॉल मिली थी. मैच के पहले दिन लंच के बाद बोलिंग करने आए शिंदे ने डॉन केन्यॉन को बोल्ड कर अपना खाता खोला. इसके बाद उन्होंने जैक रॉबर्टसन और डॉनल्ड कर को आउट कराया. शिंदे ने अपने पहले आठ ओवर में सिर्फ 16 रन देकर तीन विकेट ले लिए. बाद में इंग्लैंड की टीम 203 पर सिमट गई. इसमें से छह विकेट शिंदे ने लिए.

# फील्डिंग ने डुबोया

भारत ने पहली पारी में लीड ले ली और मैच आसानी से मेजबानों के पक्ष में आता दिख रहा था. लेकिन इंग्लैंड की दूसरी पारी के दौरान भारतीय टीम ने बेहद खराब फील्डिंग की. बताते हैं कि सिर्फ शिंदे की गेंदबाजी पर उस दिन भारत ने विकेट लेने के सात मौके गंवाए थे. खासतौर से विकेटकीपर नाना जोशी और सब्स्टीट्यूट दत्ताजीराव गायकवाड़ ने उस दिन बेहद खराब फील्डिंग की. इंग्लैंड ने किसी तरह मैच बचा लिया. हालांकि शिंदे को पहली पारी के प्रदर्शन का फायदा मिला. उन्होंने 1952 के इंग्लैंड टूर की टीम में जगह मिल गई.

कहा जाता था कि शिंदे को इस टूर पर सुभाष गुप्ते की जगह चुना गया था. शिंदे ने इस टूर पर एक बार फिर से 39 विकेट लिए. लीड्स टेस्ट के दौरान उन्होंने पीटर मे को आउट किया. यह उनका आखिरी टेस्ट विकेट भी साबित हुआ. अपने करियर के सात टेस्ट मैचों में शिंदे ने कुल 12 विकेट लिए थे. इन मैचों में उन्होंने 85 रन भी बनाए थे. इस दौरान उनका हाईएस्ट स्कोर 14 रन था, जबकि एवरेज 14.16.

डोमेस्टिक क्रिकेट में शिंदे ने महाराष्ट्र, बॉम्बे और बड़ौदा के लिए खेला. फर्स्ट क्लास मैचों में उनके नाम 230 विकेट हैं. 22 जून, 1955 को टायफाइड से उनकी मौत हो गई. बाद में साल 1967 में उनकी बेटी प्रतिभा की शादी शरद पवार से हुई.

शरद पवार आगे चलकर महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति के शीर्ष लोगों में शामिल हुए. वह क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेशन में भी लंबे वक्त से हैं. शरद मुंबई क्रिकेट असोसिएशन, BCCI और ICC जैसी बड़ी संस्थाओं का काम संभाल चुके हैं.

# ट्रिविया

शिंदे के अलावा सिर्फ एक क्रिकेटर ऐसा है, जिसका टेस्ट एवरेज उसके हाईएस्ट स्कोर से ज्यादा है. पाकिस्तान के लिए खेले एंटाओ डिसूजा ने छह टेस्ट मैचों में कुल 76 रन बनाए हैं. इस दौरान उनका हाईएस्ट स्कोर 23, जबकि एवरेज 38 का रहा था.


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