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26/11 नहीं होता तो श्रीलंका की जगह धोनी, सचिन, द्रविड़ पर होता हमला!

26/11 हमला ना होता तो भारतीय क्रिकेट टीम के साथ बड़ी अनहोनी हो सकती थी. 2008 में जब 26/11 हमला हुआ उससे पहले टीम इंडिया की पाकिस्तान दौरे पर जाने की तैयारी पूरी थी. लेकिन इस हमले की वजह से उस दौरे को रद्द करना बड़ा.

बहुत से क्रिकेट फैंस इस बात को जानते हैं कि आखिर क्यों पाकिस्तान से क्रिकेट लगभग एक दशक के लिए दूर हो गया. 3 मार्च, 2010 को लाहौर में श्रीलंकाई टीम पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया था. जिसके बाद पाकिस्तान में इंटरनेशनल मैच होने बंद हो गए. लेकिन वो घटना कैसे घटी, ये आपको बताते हैं.

धोनी की कप्तानी वाली टीम जाने वाली थी पाकिस्तान

फरवरी-मार्च, 2009 में भारतीय टीम को पाकिस्तान दौरे पर जाना था. महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी वाली इस टीम में सचिन तेंडुलकर, राहुल द्रविड़ जैसे खिलाड़ी शामिल थे. लेकिन नवंबर, 2008 में मुंबई में ताज होटल पर हमला हो गया. हमले के तार पाकिस्तान से जुड़े. और BCCI ने अपने खिलाड़ियों को पाकिस्तान भेजने से इनकार कर दिया. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की तैयारी पूरी थी, अपना नुकसान बचाने के लिए उसने आनन-फानन में श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड से बात की. श्रीलंकाई टीम टूर के लिए तैयार हो गई. श्रीलंका बोर्ड के तब के प्रसिडेंट और पूर्व कप्तान अर्जुना राणातुंगा ने कहा कि वो पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था से संतुष्ट हैं.

Dhoni Dravid
एमएस धोनी और राहुल द्रविड़ की टेस्ट सीरीज़ की तस्वीर. फोटो: Getty

श्रीलंकाई टीम उड़कर पहुंची पाकिस्तान: 

सीरीज़ 20 जनवरी से शुरू हुई. कराची और लाहौर में खेली गई वनडे सीरीज़ को श्रीलंकाई टीम 2-1 से जीत गई. इसके बाद फरवरी में टेस्ट सीरीज़ का पहला टेस्ट कराची में खेला दआ. इस मैच में पहली बार ऐसा हुआ था कि एक ही टेस्ट में दोनों टीमों के कप्तानों ने दोहरे शतक लगाए हों. इस सीरीज़ में श्रीलंका टीम की कप्तानी कर रहे थे महेला जयावर्धने, जबकि पाकिस्तान टीम के कप्तान थे यूनुस खान. पहला टेस्ट खत्म होते ही दोनों टीमें लाहौर पहुंच गईं.

मार्च का महीना शुरू होते ही दूसरा टेस्ट शुरू हो गया. गद्दाफी स्टेडियम में. बल्लेबाजों के लिए एकदम स्वर्ग जैसी पिच. 1 और 2 मार्च को यानी पहले दो दिन के खेल में श्रीलंका की टीम पाकिस्तान पर भारी पड़ती दिखी. श्रीलंका ने पहली पारी में 606 रन बना दिए. समरवीरा ने दोहरा शतक लगाया था. संगाकारा और दिलशान ने शतक जमाए. दूसरे दिन पाकिस्तान की टीम भी बल्लेबाज़ी करने उतर गई थी. दूसरे दिन का खेल जब खत्म हुआ तो पाकिस्तान ने एक विकेट खोकर 110 रन बना लिए थे.

लेकिन लाहौर टेस्ट का तीसरा दिन खेल के रोमांच के लिए नहीं बल्कि आतंकी हमले के लिए याद किया जाता है.

08 बजकर 40 मिनट, लिबर्टी चौक, 3 मार्च 2009:

श्रीलंकाई टीम सुबह एक बस में बैठकर होटल से गद्दाफी स्टेडियम के लिए निकली. बस के साथ पुलिस की दो गाड़ियां थीं. बस के पीछे एक गाड़ी में अंपायर साइमन टॉफेल, एहसान रज़ा, पीटर मैनुअल्स के साथ मैच के कुछ और ऑफिशियल्स भी बैठे थे. 10 बजे मैच शुरू होने का समय था. लेकिन जब पाकिस्तान की घड़ी में 8 बजकर 40 मिनट हो रहे थे, और हिन्दुस्तान में वक्त हुआ था 9 बजकर 10 मिनट का. तो होटल से स्टेडियम के रास्ते में वो होता है, जिसके बारे में किसी ने कल्पना भी नहीं की थी.

Sri Lakan Bus
हमले के वक्त इस बस के अंदर श्रीलंकाई टीम के खिलाड़ी मौजूद थे. फोटो: Getty Images

लाहौर के लिबर्टी चौक पर बस के ड्राइवर खलील को गोली जैसी आवाज़ आई. उसे लगा कि टीम जा रही है तो कुछ लोग पटाखे छोड़ रहे होंगे. लेकिन अगले ही पल कुर्ता-पाजामा पहना दाड़ी वाला शख्स ‘एके 47’ लेकर बस के सामने खड़ा था. उसने एकदम से फायरिंग शुरू कर दी. ड्राइवर समझ गया कि बस पर हमला हो गया है. आनन-फानन में एक श्रीलंकाई खिलाड़ी ने ड्राइवर से बस को भगाने के लिए कहा.

तब तक आतंकी ने एक हैंड ग्रेनेड बस की तरफ फेंक दिया. लेकिन उसके फटने से पहले ही बस उसके ऊपर से निकल गई. रॉकेट लॉन्चर से भी बस पर हमला हुआ. लेकिन टीम बच गई. सूझबूझ दिखाते हुए ड्राइवर ने बस को बिना रोके भगा लिया और गद्दाफी स्टेडियम पहुंचने के बाद ही बस रोकी. स्टेडियम पहुंचते ही कई श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने खलील को गले से लगा लिया था.

Mendis
लाहौर हमले में चोटिल होने के बाद अजंता मेंडिस. फोटो: Twitter

इस भिड़ंत में छह पुलिसकर्मी और दो आम नागरिक मारे गए. जबकि बस में मौजूद श्रीलंकाई खिलाड़ियों में से पांच खिलाड़ी घायल हो गए. इन खिलाड़ियों में कुमार संगाकारा, अजंता मेंडिस, चामिंडा वास, थिलम समरवीरा और थरंगा परमवितर्ना शामिल थे. लेकिन सबसे ज्यादा चोट आती है समरवीरा और परमविताना को. उनके अलावा दूसरी बस में मौजूद फोर्थ अम्पायर एहसान रज़ा को पेट में गोली लगी. इनके अलावा पॉल फारब्रस भी घायल हो गए.

साइमन टॉफेल ने बताया बस के अंदर क्या हुआ था:

वर्ल्ड क्रिकेट के बड़े अंपायर साइमन टॉफेल भी उस वक्त बस में मौजूद थे. उन्होंने साल 2019 के आखिर में अपनी किताब ‘फाइंडिंग द गैप्स’ के लॉन्च पर 3 मार्च, 2009 को लाहौर में श्रीलंकाई टीम पर हुए आतंकवादी हमले का दर्दनाक किस्सा शेयर किया था. उन्होंने बताया कि कैसे उस दौरे पर अपनी बस की सीट छोड़ने की वजह से उनकी जान बच पाई थी.

उन्होंने ने बताया कि वो जब भी कभी ड्यूटी पर होते थे तो अंधविश्वास की वजह से अपनी बस की सीट नहीं बदलते थे. लेकिन इस अंधविश्वास को छोड़ने से ही उनकी जान बची.

टॉफेल ने खुलासा किया,

”जिस बस पर आतंकवादियों ने हमला किया, उसमें वो और मैच के चौथे अंपायर अहसान रज़ा भी मौजूद थे. मैं बस में एक ही सीट पर बैठता था, उस मैच में मैंने अपनी सीट बदलने का फैसला किया. अपनी जगह पर अहसान रज़ा को बैठाया और खुद उनकी सीट पर जा बैठा. उस दौरान बहुत सारी चीज़ें हो रही थी. जिस बस में हम सफर कर रहे थे, उस पर हमला हुआ. आतंकियों ने हमारे ड्राइवर को मार दिया. इसके बाद एक गोली आकर रज़ा के कंधे पर लगी और दूसरी रज़ा के पेट में लग गई. इसके बाद बस में डर का माहौल था और मैं पीटर मैनुअल्स का हाथ पकड़कर नीचे बैठ गया. मुझे अहसास हुआ कि अगर मैंने अपना अंधविश्वास नहीं छोड़ा होता तो वो गोली मुझे लगती.”

खिलाड़ियों की जिस बस पर हमला हुआ उसमें पूर्व कप्तान महेला जयावर्धने और संगाकारा की जान भी बची थी. जयावर्धने ने बताया था कि बाहर देखने के लिए उन्होंने जैसे ही गर्दन घुमाई, एक चीज़ उनके कान के पास से गुज़री जिससे उनका कान लाल हो गया. वो गोली थी. गर्दन की दिशा बदलने की वजह से वो गोली उनके बराबर की सीट में जाकर घुसी.

पहली बार स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए उतरा चॉपर:

इसके बाद सभी खिलाड़ियों को गद्दाफी स्टेडियम में ही रखा गया. पाकिस्तान एअरफोर्स का चॉपर स्टेडियम में उतारा गया. जिसमें दोनों टीमों के खिलाड़ियों को बिठाकर वहां से होटल ले जाया गया. इसके बाद उसी दिन सभी श्रीलंकाई खिलाड़ियों को वापस कोलंबो पहुंचाया गया.

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गद्दाफी स्टेडियम में चॉपर से श्रीलंका और पाकिस्तानी खिलाड़ियों को निकाला गया. फोटो: Getty Images

बाद में पता चला कि इस हमले में लश्कर-ए-जहांगी नाम के आतंकी संगठन का हाथ था. उनका मकसद टीम को नुकसान पहुंचाने का था. साथ ही वो किसी खिलाड़ी को किडनैप करके, अपनी मांगें मनवाना चाहते थे.

इस हमले की तहकीकात के लिए बाद में पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने एक कमीशन बनाया. जांच में सुरक्षा में कई लूपहोल सामने आए. रूट की एक बार भी रेकी नहीं की गई थी. रूट की किसी भी छत पर स्नाइपर या सुरक्षाकर्मियों की तैनाती नहीं की गई थी. साथ चल रही गाड़ियों की सुरक्षा काफी नहीं थी.


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