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वो 6 सरकारी कंपनियां जो कोरोना संकट में अस्पतालों को ऑक्सीजन दे रही हैं

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश जैसे राज्य ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं. समय पर ऑक्सीजन न मिलने से कोरोना पीड़ितों का इलाज नहीं हो पा रहा है. उनकी जान जा रही है. केरल भी कोरोना से प्रभावित राज्यों में से एक है. लेकिन यहां ऑक्सीजन सरप्लस है. यानी राज्य के पास जरूरत से ज्यादा ऑक्सीजन है. यही कारण है कि केरल तमिलनाडु, गोवा और कर्नाटक जैसे राज्यों को ऑक्सीजन की सप्लाई कर रहा है.

सब राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जो मेडिकल ऑक्सीजन सप्लाई की जाती है, उसकी मॉनिटरिंग करता है भारत सरकार द्वारा बनाया 123 साल पुराना Petroleum and Explosives Safety Organisation. लक्षद्वीप और केरल के लिए PESO के मेडिकल ऑक्सीजन मॉनिटरिंग के नोडल ऑफिसर हैं आर वेणुगोपाल. उनका कहना है कि केरल कई राज्य और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के जरिए ऑक्सीजन का प्रोडक्शन कर रहा है. एक दिन में केरल के ऑक्सीजन प्लांट 199 मीट्रिक टन तक मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन कर सकते हैं. केरल रोज़ 89.75 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन का इस्तेमाल करता है. इसमें से ज्यादातर INOX Air Products Private Limited से आता है. इसके अलावा Kerala Minerals and Metals और BPCL जैसी सरकारी कंपनियां भी ऑक्सीजन की सप्लाई कर रही हैं.

आज हम बात करेंगे उन सरकारी कंपनियों यानी PSUs की, जो कोरोना संकट में अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई करने का बढ़िया काम रही हैं.

पहले ब्रीफली जानते हैं कि ये PSU क्या होते हैं? भारत सरकार द्वारा नियंत्रित और संचालित उद्यमों और उपक्रमों को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या PSU कहा जाता है. केंद्र या किसी राज्य सरकार के अंडर आने वाले ऐसे सार्वजनिक उपक्रमों में सरकारी पूंजी की हिस्सेदारी 51 परसेंट या उससे ज्यादा होती है. एक वक्त ऐसा भी था जब पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को आधुनिक भारत के मंदिर तक कहा था. इन PSUs का ऐसा महत्व है.

आइए अब जानते हैं कि कौन सा PSU कितनी ऑक्सीजन सप्लाई कर रहा है.

1. केरेला मिनरल्स एंड मेटल्स लिमिटेड (KMML)

Kmml
KMML रोज़ाना 6 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन बना रही है. (फोटोः Arun VR Paravur)

सरकारी कंपनी KMML हर दिन 6 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन प्रोड्यूस कर रही है. जब कोरोना महामारी की शुरुआत हुई तो केरल ने KMML से निकलने वाले इंडस्ट्रियल वेस्ट को लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन में बदलने का फैसला लिया. KMML कोल्लम बेस्ड सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है जो टाइटेनियम डाइऑक्साइड का निर्माण करता है. अक्टूबर 2020 में 70 टन प्रति दिन की क्षमता वाले ऑक्सीजन प्लांट का उद्घाटन यहां हुआ था. तब से ये औसतन रोज़ाना 7 टन वेस्ट ऑक्सीजन का उत्पादन करता रहा है. इस ऑक्सीजन का इस्तेमाल अब मेडिकल के लिए हो रहा है.

2. भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL)

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BPCL भी केरल में ऑक्सीजन के सिलेंडर की सप्लाई कर रही है.

भारत पेट्रोलियम कॉरपेरेशन लिमिटेड, केरल में ऑक्सीजन के सिलेंडर की सप्लाई कर रही है. BPCL घर में इस्तेमाल होने वाली LPG गैस से लेकर प्लेन के फ्यूल तक, सब बनाती है. ये कंपनी अब रोज़ाना करीब 1.5 टन ऑक्सीजन केरल के सरकारी अस्पतालों में मुहैया करवा रही है. पिछले साल भी जब कोरोना से पीड़ित लोगों को ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ी थी तो BPCL आगे आई थी. इलाज के लिए कंपनी ने करीब 25 टन मेडिकल ऑक्सीजन भेजी था. कंपनी के पास 20 टन ऑक्सीजन स्टोर करके रखी हुई है. जिसे केरल के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दिया जा रहा है.

3. भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको)

इफको ने ऑक्सीजन प्लांट लगाने का फैसला किया है.
इफको ने ऑक्सीजन प्लांट लगाने का फैसला किया है.

इफको ने कोरोना संकट के बीच ऑक्सीजन की किल्लत को देखते हुए ऑक्सीजन प्लांट लगाने का फैसला लिया है. कंपनी गुजरात के कलोल स्थित अपने कारखाने में 200 क्यूबिक मीटर प्रति घंटे की उत्पादन क्षमता वाला एक ऑक्सीजन प्लांट लगाएगी. रोज़ाना 700 डी टाइप और 300 बी टाइप सिलेंडर को मांग मुताबिक भरा जाएगा. जिसे अस्पतालों को मुफ्त में दिया जाएगा. अगर कोई अपना सिलेंडर खुद लाता है, तो उसे किसी तरह के पैसे नहीं देने होंगे. लेकिन अगर इफको की ओर से सिलेंडर दिए जाएंगे तो कुछ सिक्योरिटी मनी जमा करनी पड़ेगी. ताकि ऑक्सीजन की जमाखोरी को रोका जा सके. देशभर में टोटल तीन ऐसे प्लांट लगाए जाएंगे.

4. स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL)

Sail
सेल अब तक करीब 35 हज़ार टन ऑक्सीजन की सप्लाई कर चुकी है.

देश की सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) भी ऑक्सीजन की सप्लाई कर रही है. सेल अब तक करीब 35 हज़ार टन ऑक्सीजन की सप्लाई कर चुकी है. कंपनी ने कहा है कि इस ऑक्सीजन का इस्तेमाल कोरोना से जूझ रहे लोगों के इलाज के लिए हुआ है. ये सप्लाई झारखंड के बोकारो, छत्तीसगढ़ के भिलाई, ओडिशा के राउरकेला, पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर और बुर्नपुर के स्टील प्लांट से की गई है. कंपनी ने इस बात की जानकारी दी है कि वो देशभर के अलग-अलग राज्यों में अपने प्लांट से ऑक्सीजन भिजवा रहे हैं.

5. राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL)

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100 से 150 टन ऑक्सीजन हर दिन सप्लाई करने की क्षमता इस कंपनी के पास है.

सरकारी क्षेत्र के उपक्रम राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) ने बताया है कि विशाखापत्तपनम कारखाने से मेडिकल उपयोग लायक 100 टन ऑक्सीजन महाराष्ट्र भेजी जा चुकी है. RINL अब तक हर रोज 100 टन तरल ऑक्सीजन आंध्र प्रदेश और अन्य पड़ोसी राज्यों को भेज रही थी. एक सप्ताह में कंपनी ने इलाज के काम के लिए करीब 800 टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की है. कंपनी के एक प्रवक्ता का कहना है कि हम मांग आने पर प्रतिदिन 100 से 150 टन ऑक्सीजन की आपूर्ति कर सकते हैं.

6. भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL)

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भेल की जहां-जहां यूनिट है वहां वो ऑक्सीजन की सप्लाई कर रही है.

भेल भोपाल में 20 अप्रैल तक 5000 क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन की सप्लाई कर चुकी है. भेल प्रशासन ने ऑक्सीजन के संकट को देखते हुए खुद ही ऑक्सीजन अस्पतालों को उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है. भेल ने कहा है कि एक अस्पताल को 10 से ज्यादा सिलेंडर नहीं दे सकते. ऑक्सीजन की कमी के बीच भोपाल में इसके प्लांट के बाहर लंबी लाइन देखने को मिली थी. भेल भोपाल में एक दिन में 600 सिलेंडर की आपूर्ति कर रहा है. भेल की हरिद्वार इकाई ने भी मांग को पूरा करने के लिए ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू कर दिया है. शुरुआती दौर में यहां रोजाना 30 हजार लीटर गैस का उत्पादन किया जा रहा है.


Video: कोरोना के इलाज के लिए ऑक्सीजन की किल्लत को दूर करने सामने आईं ये बड़ी कंपनियां

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