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मेट्रो के हर लेडीज कोच में मिलेंगी ये 11 लड़कियां

1. कोलोनाइजर आंटी

ये औरतें 200 साल पुराने अंग्रेजों की तरह होती हैं. इनकी जिंदगी का एक्कै मकसद है- कब्जा करना. ‘एक्सक्यूज मी’ और ‘प्लीज थोड़ा सा शिफ्ट हो जाइए’ से शुरू होती हैं. फिर धीरे धीरे पूरी सीट और बगल वाली सीट पर भी कब्ज़ा कर लेती हैं.

2. जानूवादी लड़की

ये लड़कियां रखती हैं कभी न डिस्चार्ज होने वाला फोन. जितनी देर मेट्रो में रहेंगी, उतनी देर सिर्फ जानू से फोन पर गुटरगूं करेंगी. इनके उतरने तक आपको पता चल चुका होता है कि जानू ने क्या खाया, कब सोया, उसकी मम्मी किस फैब्रिक की साड़ी पहनती हैं और उसके दादा की बहन की पोती कितने साल की है.

3. फॉरएवर अलोन

ये सिंगल, थकी, आउटस्टेशन लड़की है. ढीली स्वेट-शर्ट पहनी हुई. आंखों पर चश्मा लगाकर  हाफ-गर्लफ्रेंड पढ़ती हुई.

4. न्यूली मैरिड

इनके एक-एक हाथ में 175-175 लाल चूड़ियां होती हैं. हथेली से लेकर कान तक मेहंदी होती है. फोन की स्क्रीन पर बार बार ‘मम्मीजी’ या ‘पतिदेव’ या ‘माय हबी’ का कॉल चमक रहा होता है.

5. मम्मियां

ये हमेशा एक नन्हे राक्षस को लेकर चढ़ती हैं. राक्षस की उम्र के हिसाब से वो बूबू से लेकर साइकिल तक और आईपैड से लेकर जेट प्लेन तक, किसी भी चीज के लिए रो सकता/सकती है. पर उसका फेवरेट काम मम्मी को शर्मिंदा करना होता है.

6. पुलिस आंटी

इनका काम केवल मर्दों को लेडीज कंपार्टमेंट से खदेड़ना होता है. ये बाकायदे पीट भी देती हैं. इनके शिकार ज्यादातर होते हैं, रेलवे स्टेशन से उतरकर जिंदगी में पहली बार मेट्रो ले रहे अंकल टाइप लोग.

7. पीड़ित

ये अकसर सिर झुकाए कोने की सीट पर बैठी हुई मिलेंगी. हर 5 मिनट पर इनके मम्मी, पापा और बॉयफ्रेंड का फोन बारी बारी आएगा. ये सबको अपने लेट होने का कारण बताएंगी और झल्लाकर फोन काट देंगी. आपकी भलाई इसी में है कि इनसे दूर ही खड़े हों, वरना ‘कैन यू प्लीज मूव बैक’ बोलकर अपनी चिढ़न भरी नजरों से आपके मूड की माचिस लगा सकती हैं.

8. डूडेट

ये कपड़ों के बजाय सब हर सुबह बालों को प्रेस करती हैं. कानों में रंगीन ईयरफोन्स, फटी जींस और उधड़ी चप्पलें इनका स्टाइल है. अपने कॉन्फिडेंस के लिए इनको अकसर कोलोनाइज़र आंटियों की घूरती हुई नज़रों का शिकार बनना पड़ता है.

9. कैंडी क्रशर्स

इन्हें कोई अंदाजा और कोई मतलब नहीं है कि दुनिया में क्या चल रहा है. सास हो या बॉस, ये सबके फोन काटकर ईमानदारी से कैंडी क्रश खेलती हैं. वो भी फुल वॉल्यूम में. ये सिर्फ अपने पड़ोसियों को यह बताने के लिए मुंह खोलती हैं कि वो नए लेवल पर पहुंच गई हैं.

10. टिफिन ईटर

ये घुसती ही टिफिन खाने के लिए हैं. बंद मेट्रो में पकी गोभी की महक फैलाकर ये थकी-भूखी लड़कियों के हाव-भाव देख उनके मज़े लेती हैं. ऐसे ही लड़कियों की वजह से शायद मेट्रो में खाना एक दंडनीय अपराध है.

11. ग्रुप ऑफ गर्ल्स

ये होती तो तीन या ज्यादा महिलाएं हैं, पर कहलाती एक ही यूनिट हैं. ये एक खम्बा या कोना पकड़ कर खड़ी हो जाती हैं और थोड़ी थोड़ी देर में ऐसी आवाज़ें निकालती हैं कि आप आपातकालीन द्वार की तरफ देखने को मजबूर हो जाते हैं.

अकेली रातों में घूमते हुए पंखे को देख आप सोचते हैं कि ऐसा क्या है जो इन लड़कियों को स्टार्ट होती हुई स्कूटी की आवाज़ में हंसने पर मजबूर करता है. वैसे तो ये नीली, पीली, बैंगनी, गुलाबी, हर मेट्रो लाइन पर पाई जाती हैं, पर इनकी बड़ी ‘मात्रा’ मिलती है विश्वविद्यालय, ग्रीन पार्क, और कैलाश कॉलोनी के स्टेशंस पर.

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