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इंफोसिस के को-फाउंडर क्रिस गोपालकृष्णन को राहत, SC/ST एक्ट केस की जांच पर लगी रोक

कर्नाटक हाईकोर्ट ने INFOSYS के को-फाउंडर Kris Gopalakrishnan के खिलाफ SC/ST Act के तहत दर्ज मामले की जांच पर अंतरिम रोक लगा दी है. क्या है ये मामला? क्रिस गोपालकृष्णन पर क्या आरोप लगे हैं? और इन पर उनका क्या कहना है?

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30 जनवरी 2025 (अपडेटेड: 30 जनवरी 2025, 12:05 AM IST)
Kris Gopalakrishnan Karnataka HC stays
क्रिस गोपालकृष्णन इंफोसिस के एमडी भी रह चुके हैं | फाइल फोटो: इंडिया टुडे
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इंफोसिस (INFOSYS) के को-फाउंडर क्रिस गोपालकृष्णन को कर्नाटक हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने उनके खिलाफ SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामले की जांच पर अंतरिम रोक लगा दी है. बेंगलुरु पुलिस ने सोमवार, 27 जनवरी को क्रिस गोपालकृष्णन, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISC) से जुड़े पूर्व डायरेक्टर बलराम और 16 अन्य लोगों के खिलाफ ये मामला दर्ज किया था. मामला बेंगलुरु के एक कोर्ट के आदेश पर दर्ज किया गया था. 

बुधवार, 29 जनवरी को इस मामले पर कर्नाटक हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के बाद जस्टिस एसआर कृष्ण कुमार ने कहा कि याचिका में तथ्यों के साथ जो कारण बताए गए हैं, कोर्ट उन्हें स्वीकार करता है. आगे कहा कि इस मामले में बेंगलुरु के सदाशिवनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई FIR में आगे की कार्यवाही और जांच पर रोक लगाई जाती है. ये रोक अगली सुनवाई तक लगी रहेगी.

Kris Gopalakrishnan पर क्या आरोप लगे हैं?

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि बेंगलुरु के 71वें सिविल और सेशन कोर्ट (CCH) के निर्देश पर सदाशिव नगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया. इस मामले के शिकायतकर्ता दुर्गाप्पा आदिवासी बोवी समुदाय से हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें हनी ट्रैप के झूठे मामले में फंसाया गया. और बाद में IISC की सेवा से बर्खास्त कर दिया गया, जहां क्रिस गोपालकृष्णन बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के सदस्य के तौर पर काम करते हैं.

IISC के सेंटर फॉर सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी में फैकल्टी मेंबर रहे दुर्गाप्पा ने आगे आरोप लगाया कि उन्हें जातिवादी गाली और धमकियां दी गईं. इस मामले में दूसरे आरोपियों में गोविंदन रंगराजन, श्रीधर वारियर, संध्या विश्वेश्वरैया, हरि केवीएस, दासप्पा, बलराम पी, हेमलता मिशी, चट्टोपाध्याय के, प्रदीप डी सावरकर और मनोहरन शामिल हैं.

Kris Gopalakrishnan का भी जवाब आया

हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले पर गुरुवार, 30 जनवरी को सेनापति क्रिस गोपालकृष्णन की ओर से भी एक बयान जारी किया गया. इसमें उन्होंने कहा,

‘मैं हमेशा निष्पक्षता, न्याय और सभी के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करने में विश्वास करता हूं, चाहे उनकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो. मुझे गहरा दुख है कि जिस कानून को हाशिये पर पड़े समुदायों की रक्षा के लिए बनाया गया है, उसका दुरुपयोग मेरे खिलाफ झूठे आरोप लगाने के लिए किया गया है.’

गोपालकृष्णन ने आगे ये भी बताया कि वह साल 2022 में IISC की काउंसिल के अध्यक्ष के रूप में संस्थान से जुड़े थे, जबकि FIR में जिन कथित घटनाओं की बात की गई है, वो साल 2014 की हैं.

आपको बता दें कि क्रिस गोपालकृष्णन 2007 से 2011 तक इंफोसिस के चीफ एक्जिक्यूटिव ऑफिसर और मैनेजिंग डायरेक्टर रहे थे. वो 2011 से 2014 तक कंपनी के उपाध्यक्ष भी रहे थे.

वीडियो: खर्चा-पानी: इंफोसिस को इतना बड़ा बनाने में नंदन नीलेकणि का क्या योगदान है?

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