Submit your post

Follow Us

हारे हुए किले को वापस पाने के लिए योगी को रवि किशन का सहारा

1.27 K
शेयर्स

भाजपा ने भोजपुरी फिल्म स्टार रवि किशन को गोरखपुर से टिकट दिया है. रवि किशन शुक्ला को टिकट देकर बीजेपी ने गोरखपुर में एक बार फिर ब्राह्मण पर दांव चला है. डेढ़ साल पहले हुए उपचुनाव में पार्टी ने उपेंद्र नाथ शुक्ला को टिकट दिया था. तब उनको समाजवादी पार्टी के प्रवीण निषाद के हाथों तगड़ी शिकस्त खानी पड़ी थी. अब भाजपा ब्राह्ण के साथ स्टार पावर भी लगा रही है. रविकिशन का सीधा मुकाबला समाजवादी पार्टी के रामभुआल निषाद से होगा. भाजपा ने गोरखपुर के मौजूदा सांसद प्रवीण निषाद को संत कबीर नगर से उम्मीदवार बनाया है. प्रवीण ने हाल ही में समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा ज्वाइन की थी. साल 2014 का लोकसभा चुनाव रविकिशन कांग्रेस के टिकट पर जौनपुर से लड़े थे. उस वक्त उनको भाजपा के केपी सिंह के हाथों हार का सामना करना पड़ा था.

जातीय समीकरण में कितना फिट बैठेंगे रविकिशन?
रवि किशन को गोरखपुर में राजपूत बनाम ब्राह्मण की लड़ाई से सबसे पहले निपटना होगा. लोकसभा क्षेत्र में ये लड़ाई काफी पुरानी मानी जाती है. इलाके में ब्राह्मण मतदाताओं की तादाद करीब डेढ़ लाख है. करीब इतने ही वोट राजपूत समाज के माने जाते हैं. सबसे ज्यादा साढ़े तीन लाख निषाद मतदाता हैं. इसके अलावा दो-दो लाख दलित और यादव समुदाय के वोटर हैं.

योगी आदित्यनाथ के उभार के बाद से गोरखपुर में ब्राह्मण समाज नेतृत्व विहीन महसूस करता रहा है. मोदी-अमित शाह से पहले तक गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ का डंका बजता था. एक वक्त तो ऐसा आया कि योगी के आगे बीजेपी को घुटने टेकने पड़ते थे. उनकी हर बात भाजपा नेतृत्व को माननी पड़ती थी.

गोरखपुर में रविकिशन को कई चुनौतियों से निपटना होगा. फाइल फोटो.
गोरखपुर में रवि किशन को कई चुनौतियों से निपटना होगा. फाइल फोटो.

योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी गोरखपुर समेत पूरे यूपी के ब्राह्मणों को अगुवाई न करने की टीस दिखाई देती है. रविकिशन को टिकट भी शायद इसी को ध्यान में रखते हुए दिया गया है. पार्टी ने वैसे तो एक उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय को बनाकर पहले ही ब्राह्मणों को संदेश देने की कोशिश की है. लेकिन योगी की सीट पर एक बार फिर ब्राह्मण उतारकर पूरे प्रदेश के ब्राह्मण समाज को संदेश देने की कोशिश की है.

योगी की हिंदू युवा वाहिनी क्या करेगी?
वैसे तो योगी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद हिंदू युवा वाहिनी से दूरी बना ली थी. मगर आज भी ये माना जाता है कि गोरखपुर में चुनाव जीतने के लिए इस संगठन का सहयोग लेना ही होगा. योगी आदित्यनाथ जब गोरखपुर से सासंद चुने जाते थे, उस वक्त ये संगठन बड़े पैमाने पर सक्रिय रहता था. ऐसे में रवि किशन को योगी आदित्यनाथ या उनके बनाए संगठन हिंदू युवा वाहिनी का सहयोग हर हाल में चाहिए होगा.

कौन हैं रविकिशन शुक्ला?
रवि किशन पूर्वांचल के जौनपुर जिले के केराकत ब्लाक के बराही बिसूही गांव के रहने वाले हैं. रविकिशन के पिता पं० श्यामा नारायण शुक्ला मंदिर में पुजारी हैं. रवि किशन को उनके करीबी लोग बब्बू के नाम से बुलाते हैं. रवि किशन का जन्म साल 1969 में बंबई (मुंबई) में सांताक्रूज चॉल में हुआ था. उस वक्त उनका परिवार बंबई में ही रहता था. पिता डेयरी का कारोबार करते थे. रवि किशन 10 साल के थे, तभी एक विवाद के बाद परिवार को वापस जौनपुर अपने गांव लौटना पड़ा. बाद में 17 साल की उम्र में रवि किशन फिर से मुंबई लौटे. रवि किशन को बचपन से ही अभिनय का शौक था. गांव में रामलीला में वे ‘सीता’ का रोल करते थे. रवि किशन ने अपनी अभिनय यात्रा एक बी ग्रेड फिल्म पीतांबर से की. इसमें उन्हें 5000 रुपए मिले थे. बाद में 2003 में आई तेरे नाम में वे सलमान खान के साथ दिखाई दिए. फिल्म में वे एक पुजारी के रोल में थे. संयोग से उनके पिता भी पुजारी हैं. बाद में उन्होंने भोजपुरी फिल्मों की ओर रुख किया. और एक से बढ़कर एक फिल्में दीं. उनका नाम भोजपुरी के तीन बड़े स्टार्स मनोज तिवारी और दिनेश लाल यादव निरहुआ के साथ गिना जाता है.

नगमा को लेकर विवाद में क्यों आ गए थे?
रवि किशन वैसे तो विवादों से दूर रहते हैं. मगर एक वक्त उनका नाम एक्टर और कांग्रेस नेता नगम के साथ जोड़ा जाता था. कहा जाता है कि वे नगमा के साथ लिव इन में रहते थे. रवि किशन की पत्नी का नाम प्रीति है. उनका तीन बेटियां अनिष्क, इशिता और साक्षी हैं. एक बेटा रेवा है. रवि किशन अपने फेमस डायलॉ़ग जिंदगी झंड बा…फिर भी घमंड बा के लिए जाने जाते हैं. साल 2006 में, बिग बॉस एक में वे फाइनल में पहुंच गए थे. साल 2012 में उन्होंने ‘झलक दिखला जा-5’ में भाग लिया था. साल 2017 में रवि किशन कांग्रेस पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे.


मुरादाबाद के कुंदनपुर में इतना पानी भरता है कि सांप निकल आते हैं और बच्चे घर में बंद हो जाते हैं

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें
Lok Sabha Elections 2019: BJP gives ticket to bhojpuri star Ravi kishan from Gorakhpur

गुजरात चुनाव 2017

गुजरात और हिमाचल में सबसे बड़ी और जान अटका देने वाली जीतों के बारे में सुना?

एक-एक वोट कितना कीमती होता है, कोई इन प्रत्याशियों से पूछे.

गुजरात विधानसभा चुनाव के चार निष्कर्ष

बहुमत हासिल करने के बावजूद चुनाव के नतीजों से बीजेपी अंदर ही अंदर सकते में है.

गुजरात में AAP का क्या हुआ, जो 33 सीटों पर लड़ी थी!

अरविंद केजरीवाल का गुजरात में जादू चला या नहीं?

गुजरात चुनाव के बाद सुशील मोदी को खुला खत

चुनाव के नतीजे आने के बाद भी लिचड़ई नहीं छोड़ रहे.

इस चुनाव में राहुल और हार्दिक से ज्यादा अफसोस इन सात लोगों को हुआ है

इन लोगों ने थोड़ी मेहनत और की होती, तो ये गुजरात की विधानसभा में बैठने की तैयारी कर रहे होते.

राहुल गांधी ने चुनाव में हार के बाद ये 8 बातें बोली हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की क्रेडिबिलिटी पर ही सवाल खड़े कर दिए.

गुजरात में हारे कांग्रेस के वो बड़े नेता जिन पर राहुल गांधी को बहुत भरोसा था

इनके बारे में कांग्रेस पार्टी ने बड़े-बड़े प्लान बनाए होंगे.

बीजेपी के वो 8 बड़े नेता जो गुजरात चुनाव में हार गए

इनको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभाएं और तमाम टोटके नहीं जिता सके.

पीएम नरेंद्र मोदी ने गुजरात और हिमाचल प्रदेश में जीत के बाद ये 5 बातें कहीं

दोनों प्रदेशों में भगवा लहराया मगर गुजरात की जीत पर भावुक दिखे पीएम.

ये सीट जीतकर कांग्रेस ने शंकरसिंह वाघेला से बदला ले लिया है

वाघेला ने इस सीट पर एक निर्दलीय प्रतायशी को वॉकओवर दिया था.