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शिवराज सिंह चौहान को चुनौती देने आए अरुण यादव का क्या हुआ?

बुधनी का पूरा खेला इधर समझिए.

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11 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 11 दिसंबर 2018, 06:03 PM IST)
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शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ सरकार पर निशाना साधा.
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1. सीट – बुधनी (सीहोर)
2. चुनने की वजह – शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं. वो यहीं से चुनाव लड़ रहे हैं.
3. चैलेंजर कौन – सुभाष यादव का लड़का. बुधनी से शिवराज के सामने खड़े अरुण यादव प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष थे. जब तक कमलनाथ नहीं आ गए तब तक. लेकिन पुराने लोग उन्हें उनके पिता के नाम से जानते हैं - मध्यप्रदेश में कांग्रेस नेता सुभाष यादव. अरुण की खरगोन से लगे निमाड़ बेल्ट में चलती है. लेकिन उन्हें बुधनी लाया गया ताकि कांग्रेस कह सके कि भाजपा की सीएम सीट पर वॉकओवर नहीं दे रहे. खुसुर-पुसुर ये भी रही कि अरुण अगर शिवराज को पटखनी दे दें तो कांग्रेस के जीनते की सूरत में वो सीएम पद के दावेदार हो जाएंगे.
4. ट्रिविया
> शिवराज सिंह चौहान जब 2015 में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उन्हें यहीं से उप-चुनाव लड़ाया गया था. भाजपा विधायक राजेंद्र सिंह से सीट खाली करवाकर. लेकिन शिवराज ने ये सीट फिर खाली नहीं की. अब तक के चुनावों में शिवराज को बुधनी जीतने में ज़ोर लगाने की खास ज़रूरत नहीं पड़ी है. एकाध सभा कर लें तो बहुत हुआ. लेकिन इस बार इतनी आसानी से काम नहीं बनने वाला था. क्योंकि 13 साल की एंटी इंन्कमबेंसी के अलावा शिवराज के सामने था एक चैलेंजर. और इसीलिए इस बार शिवराज का प्रचार किया बेटे कार्तिकेय और पत्नी साधना सहित मध्यप्रदेश सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त आधा दर्जन नेताओं ने.
शिवराज के पुत्र कार्तिकेय, सेल्फी लेते हुए. शिवराज के पुत्र कार्तिकेय, सेल्फी लेते हुए.

> लेकिन शिवराज बाकी वक्त उपलब्ध रहते हैं. बुदनी वाले कहते हैं कि रसोई का न्योता भेजते हैं तो सीएम साहब खड़े-खड़े ही सही, एक बार आमद दर्ज करा जाते हैं. तो लोग खुद को सीएम के करीब समझते हैं. आस-पास के इलाकों के लोग दबी ज़बान में शिकायत करते हैं. कि यहां शासन के लोग काम करते वक्त सतर्क रहते हैं. जैसे बकाया बिजली बिल की वसूली. क्या पता कब कौन शिवराज का दूर का रिश्तेदार निकल आए.
वीडियो: हमें शिवराज की खुलवाई कंपनी के गेट से भगा देते हैं -
5. मुद्दे/फैक्टर 
> बुधनी में शिवराज के आने के बाद दो बड़ी फैक्ट्रियां खुलीं. वर्धमान फैब्रिक और ट्राइडेंट. रोज़गार का नारा. लेकिन यहां के युवाओं की शिकायत है कि ये दो कंपनियां स्थानीय युवाओं को नौकरी नहीं देतीं. या देती हैं तो सिर्फ छोटी-मोटी मजदूरी का. बेरोज़गारी बुधनी का सबसे बड़ा मुद्दा है.
> फिर एक शिकायत ये भी ज़िला मुख्यालय बहुत दूर सीहोर में है.
> फैक्टर्स की बात करें तो अब तक के फैक्टर तो शिवराज ही थे. वो किरार समाज से आते हैं जो बुधनी विधानसभा में खासी संख्या में हैं. फिर बुधनी ने शिवराज को हमेशा विधायक के साथ-साथ सीएम चुना है. लेकिन चूंकि अरुण यादव को लड़ाकर कांग्रेस 'संदेश' देने के प्रयास में है, हो सकता है कि कांग्रेस का वोटर कुछ लामबंद होकर वोट करे.
कांग्रेस के टिकट पर शिवराज के विपक्ष में अरुण यादव बुधनी से चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस के टिकट पर शिवराज के विपक्ष में अरुण यादव बुधनी से चुनाव लड़ रहे हैं.

6. पिछली बार का नतीजा -
बुधनी से शिवराज ने पहला चुनाव 1990 में लड़ लिया था. खैर, 2013 में  उन्होंने महेंद्र सिंह चौहान को 84 हजार मतों से हराया था.
7. इस बार का नतीजा क्या रहा ?
शिवराज सिंह चौहान 58, 999 वोट से जीत गए हैं.

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