Submit your post

Follow Us

'अतिथि देवो भव:' वाले भारत देश में विदेशियों को शरण देने का सिस्टम क्या है?

म्यामांर में सेना अपने ही नागरिकों पर जुल्म ढा रही है. वहां के नागरिक पलायन करके भारत की सीमा में आ रहे हैं. ऐसे में भारत फिर एक शरणार्थी समस्या से रूबरू हो रहा है. इसी बीच मणिपुर की सरकार ने शरणार्थियों को टिकने न देने की चिट्ठी लिख डाली. जब बवाल कटा तो चिट्ठी वापल ले ली गई. आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत के संविधान में शरणार्थियों को लेकर कोई व्यवस्था नहीं है. हालांकि भारत पहले भी विदेशियों को शरण देता रहा है. बिना किसी मुकम्मल प्रावधान के ऐसा कैसे हो रहा है? आखिर कैसे किसी देश के नागरिक को भारत में शरण दी जाती है? आइए समझते हैं पूरा सिस्टमः

जब दुनियाभर के हिंदू-सिखों को शरण देने का प्रस्ताव आया

भारत की आजादी के बाद धर्म के आधार पर पाकिस्तान बना. भारत ने अपने संविधान को धर्मनिरपेक्ष रखने का फैसला लिया. संविधान निर्माण की प्रक्रिया में संविधान सभा में नागरिकता को लेकर बहस चल रही थी. संविधान सभा के एक सदस्य और जवाहर लाल नेहरू के करीबी पंजाबराव देशमुख ने एक प्रस्ताव रखा.

जो भी हिंदू या सिख किसी भी दूसरे देश का नागरिक न हो, उसे भारत की नागरिकता दे दी जाए.

नेहरू ने पंजाबराव देशमुख के प्रस्ताव का विरोध किया. उन्होंने कहा-

आप इस आधार पर कोई नियम नहीं बना सकते कि आपको कौन पसंद है और कौन नापसंद. आपको कुछ सिद्धांत बनाने होंगे. आप सिर्फ हिंदू, मुस्लिम या सिखों के लिए अलग से नियम नहीं बना सकते.

संविधान सभा के सदस्यों ने बहुमत से देशमुख के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. इस तरह से भारत के संविधान में धर्म के आधार पर भेदभाव किए बिना नागरिकता के सवाल का समाधान निकाला गया. संविधान लागू होने के कुछ दिन बाद ही प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1951 के संयुक्त राष्ट्र संघ के उस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया, जिसमें शरणार्थियों को लेकर नियम-कायदे बनाने की बात कही गई थी. नेहरू ने इसे अंदरूनी मामले में दखल माना. इस तरह भारत उन चंद लोकतांत्रिक देशों में से एक बना, जो शरणार्थियों को लेकर कोई संवैधानिक या कानूनी व्यवस्था में नहीं बंधा है.

भारत में शरण लेने का मामला शरणार्थी घोषित करने से ज्यादा नागरिक बनाने का सवाल है. मशहूर लीगल एक्सपर्ट बीएस चिमनी इसे strategic ambiguity या रणनीतिक अस्पष्टता कहते हैं. इसके बारे में यहां पढ़ सकते हैं.

Jawaharlal Nehru Signing Indian Constitution Wiki 700
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने शरणार्थियों के लिए बनाए नियम-कायदों के प्रस्ताव पर इसलिए दस्तखत नहीं किए क्योंकि वो इसे अंदरूनी मामलों में यूएन के दखल की तरह देखते थे. (तस्वीर: विकिमीडिया कॉमन्स)

पहले नागरिकता का सिस्टम समझिए

जैसा कि हम बता चुके हैं भारत में शरणार्थियों को लेकर कोई साफ, मजबूत व्यवस्था नहीं है. हम इसे दूसरे देश के नागरिकों को अपने देश में नागरिकता देने की तरह ही देखते हैं. भारत के संविधान में नागरिकता की व्यवस्था अनुच्छेद 5 से लेकर अनुच्छेद 11 तक बताई गई है. भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार, देश की  नागरिकता कुछ प्रावधानों के अंतर्गत मिलती है-

# भारत में पैदा होने पर.
# किसी के माता-पिता पैदाइशी भारतीय होने पर.
# अवैध प्रवासी को छोड़कर किसी व्यक्ति का नागरिकता का आवेदन भारत सरकार स्वीकार कर ले.

ये कुछ पैमाने हैं, जिनके आधार पर किसी को भारत की नागरिकता दी जा सकती है.

1. भारतीय मूल का वो शख़्स, जो देश में नागरिकता के लिए आवेदन देने से पहले कम से कम 7 साल भारत में रहा हो.
2. भारतीय मूल का वो व्यक्ति, जो अविभाजित भारत के बाहर किसी देश का नागरिक हो. मतलब ये कि व्यक्ति पाकिस्तान और बांग्लादेश से बाहर किसी अन्य देश का नागरिक हो, और उस नागरिकता को छोड़कर भारत की नागरिकता चाहता हो.
3. वो शख़्स जिसकी शादी किसी भारतीय नागरिक से हुई हो और वो नागरिकता के आवेदन करने से पहले कम से कम सात साल तक भारत में रह चुका हो.
4. वो नाबालिग़ बच्चे जिनके माता या पिता भारतीय हों.
5. नेचरलाइजेशन के जरिए तय वक्त तक भारत में रहकर नागरिकता के लिए प्रार्थना करना. (नेचरलाइजेशन क्या है, ये हम आगे बताएंगे)

आपको नागरिकता के ये नियम-कायदे छोटे फॉर्मेट में बताए गए हैं. इसमें बहुत से किंतु-परंतु भी हैं, देश का नागरिक घोषित करने से पहले उन पर भी अनिवार्य रूप से विचार किया जाता है.

NRC यानी नागरिकता का रजिस्टर

जब बात नागरिकता की है तो इसका हिसाब-किताब रखने की भी जरूरत होगी. ऐसे में सिटिजनशिप एक्ट 1955 में 2003 में एक संशोधन करके नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC) की व्यवस्था लाई गई. इसका उद्देश्य था देश के हर वैध नागरिक का नाम एक रजिस्टर में दर्ज करना, अवैध को बाहर का रास्ता दिखाना या फिर शरण देना. खैर सरकारें तो इसे लागू नहीं कर पाईं लेकिन 2013-14 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से इसे असम में जरूर लागू किया गया.

असम में विदेशी घुसपैठियों का मुद्दा हमेशा से राजनीतिक रूप से गरम रहा है. असम में NRC लागू करने का मकसद यहां घुसपैठियों की पहचान करना था. खुद को असम का नागरिक साबित करने के लिए व्यक्ति को 24 मार्च 1971 से पहले जारी किया दस्तावेज बतौर सबूत पेश करना था. इसके लिए 1951 के NRC या 24 मार्च 1971 तक जारी की गई मतदाता सूची को पैमाना बनाया गया. इसके जरिए यह साबित करना था कि वह व्यक्ति या उसके पूर्वज इस तारीख से पहले राज्य के नागरिक थे. 2019 में जब असम में यह रजिस्टर तैयार हुआ तो इस लिस्ट में 19,06,657 के नाम शामिल नहीं थे. आख़िरी लिस्ट में कुल 3,11,21,004 लोगों को शामिल किया गया है. फिलहाल असम सरकार उहापोह की स्थिति में है कि जिन लोगों का नाम इस लिस्ट में नहीं आ पाया है, उनका क्या किया जाए.

Protest Against Citizenship (amendment) Bill In North East India
भारत में शरणार्थियों की समस्या को नागरिकता देने के चश्मे से ही देखा जाता है, इसलिए जब सिटिजनशिप अमेंडमेंड बिल आया तो देश में काफी विरोध हुआ.

शरण पाने का क्या तरीका है?

जहां तक बात दूसरे देश के नागरिक को भारत में शरण देने की है तो यह मामला काफी जटिल है. सबसे बड़ी चुनौती राज्य और केंद्र सरकारों के अधिकारों को लेकर है. कानून व्यवस्था राज्य का विषय होता है, जबकि नागरिकता केंद्र सरकार का. इसकी वजह से ये मामला लंबा खिंचता है. मिसाल के तौर पर म्यांमार का मामला ही लें. म्यांमार से आने वाले शरणार्थी मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में आ रहे हैं. ऐसे में किसी भी तरह की गड़बड़ न हो, इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार पर है. लेकिन चूंकि मामला विदेशी नागरिकों से जुड़ा है, ऐसे में केंद्र सरकार की भी जिम्मेदारी बनती है.

भारत ने भले ही शरणार्थियों के लिए यूनाइटेड नेशंस के बनाए नियम-कायदों पर दस्तखत न किए हों लेकिन वह इसके अलावा भी कई तरह के समझौतों से बंधा है. इनमें से एक है यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स कमीशन (UNHRC). अपने देशों में परेशानी झेल रहे नागरिकों को दूसरे देशों में शरणार्थी के तौर पर बसाने के काम में यह संस्था मदद करती है. मानवाधिकारों के मुद्दों पर काम करती है. यह संस्था भारत में भी काम करती है. इसके ऑफिस दिल्ली और चेन्नै में हैं, जहां शरणार्थी अप्लाई करते हैं.

शरण मांगने के लिए ये आधार जरूरी हैं

# शरण मांगने वाले को यह दिखाना पड़ता है कि उसे अपने देश में बहुत खतरा है, और वह हर हाल में अपना देश छोड़ने को मजबूर है
# शरण मांगने वाले को यह सिद्ध करना होता है कि उसे उसकी जाति, धर्म, पहचान, राजनीतिक विचारधारा या किसी सामाजिक समूह का हिस्सा होने की वजह से उसके देश में परेशान किया जा रहा है.
# ये शर्तें पूरी करने का बाद शरण लेने वाले को UNHRC के दिल्ली या चेन्नै ऑफिस जाकर रजिस्ट्रेशन कराना होता है. यह साधारण फॉर्म भरने की नहीं बल्कि एक जटिल व्यक्तिगत प्रक्रिया है. इसमें शरणार्थी और उसके परिवार के सदस्यों (अगर कोई है) को सेंटर पर मौजूद होना होता है.
# सेंटर पर मौजूद अधिकारी शरणार्थी से बात करके उसका केस समझते हैं. पता लगाते हैं कि केस रजिस्टर करने लायक है भी कि नहीं.
# इसके बाद जरूरी कागजात मांगे जाते हैं. इनमें शामिल हैं-
– अगर पहले से UNHRC  में रजिस्ट्रेशन करा चुका है तो उसका केस नंबर
– पासपोर्ट, राष्ट्रीयता को साबित करने वाला कोई डॉक्युमेंट
– जन्म प्रमाणपत्र, बच्चों का वैक्सिनेशन सर्टिफिकेट
– मैरिज या डिवोर्स सर्टिफिकेट
– इनके अलावा अन्य डॉक्युमेंट्स, जो केस मजबूत कर सकें, जैसे एजुकेशनल क्वॉलिफिकेशन या कोई खास स्किल से जुड़ा डॉक्युमेंट

तमिल रिफ्यूज़ी. तस्वीर- पीटीआई
श्रीलंका में तमिल रिफ्यूज़ी की समस्या बढ़ने पर भारत ने बहुत से तमिल शरणार्थियों के लिए देश के दरवाजे खोल दिए थे. (तस्वीर- पीटीआई)

# इस सबके बाद फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू होगी. अगर एक भी डॉक्युमेंट नहीं हैं तो यह भी फॉर्म में दर्ज किया जाएगा. तस्वीर खींची जाएगी. बायोमैट्रिक स्कैनिंग जैसे फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतलियों को स्कैन किया जाता है.
# एक बार फॉर्म जमा होने के बाद “Under Consideration Certificate” (UCC) दे दिया जाता है. इसका मतलब शरण लेने का मामला सरकार को भेज दिया गया है.
# अमूमन 20 महीने के भीतर आवेदक का इंटरव्यू लिया जाता है. इसमें उसके दावे को परखा जाता है. अगर उसके दावे में दम लगता है तो शरणार्थी का स्टेटस दे दिया जाता है.
# अगर इंटरव्यू के बाद शरण देने का केस रिजेक्ट हो जाता है तो 30 दिन के भीतर उसके खिलाफ अपील की जा सकती है.

किसे शरण मिली, किसे नहीं?

आवेदन की इस पूरी कवायद में एक बात ध्यान रखने वाली है. किसी भी नागरिक को शरण देने या न देने का फैसला पूरी तरह से देश की सरकार करती है. वह मामले को समझ कर, अंतर्राष्ट्रीय गुणा-गणित लगाने के बाद ही किसी नागरिक को शरण देने का फैसला लेती है.

इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि भारत ने श्रीलंका में LTTE संकट के वक्त, 1989 में म्यांमार में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों के चलते और बांग्लादेश संकट के वक्त बिना जरूरी कागजात के ही बहुत से लोगों को शरणार्थी का दर्जा प्रदान किया था. लेकिन 2017 में नरेंद्र मोदी की सरकार ने म्यांमार से आए 40 हजार रोहिंग्या शरणार्थियों को शरण देने से मना करके उन्हें वापस भेज दिया था.

शरण से नागरिकता का लंबा है सफर

नागरिकता अधिनियम 1955 की तीसरी अनुसूची के क्लॉज ‘डी’ में नेचुरलाइजेशन के जरिए भारत की नागरिकता के प्रावधान हैं. इसके लिए यह जरूरी है कि संबंधित व्यक्ति पिछले 11 बरसों से भारत में रह रहा हो. नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के माध्यम से अफगानिस्तान, बांग्लादेश व पकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय के शरणार्थियों के लिए इस अवधि को 11 साल से घटाकर कम से कम 5 साल कर दिया गया है.


वीडियो – म्यांमार में शरण लेने वालों का खाना-पानी रोकने का आदेश देकर वापस ले लिया, पर क्यों?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

जिन मीम्स को सोशल मीडिया पर शेयर कर चौड़े होते हैं, उनका इतिहास तो जान लीजिए

जिन मीम्स को सोशल मीडिया पर शेयर कर चौड़े होते हैं, उनका इतिहास तो जान लीजिए

कौन सा था वो पहला मीम जो इत्तेफाक से दुनिया में आया?

पार्टियों को चुनाव निशान के आधार पर पहचानते हैं आप?

पार्टियों को चुनाव निशान के आधार पर पहचानते हैं आप?

चुनावी माहौल में क्विज़ खेलिए और बताइए कितना स्कोर हुआ.

लगातार दो फिफ्टी मारने वाले कोहली ने अब कहां झंडे गाड़ दिए?

लगातार दो फिफ्टी मारने वाले कोहली ने अब कहां झंडे गाड़ दिए?

राहुल के साथ यहां भी गड़बड़ हो गई.

रोहित शेट्टी के ऊपर ऐसी कड़क Quiz और कहां पाओगे?

रोहित शेट्टी के ऊपर ऐसी कड़क Quiz और कहां पाओगे?

14 मार्च को बड्डे होता है. ये तो सब जानते हैं, और क्या जानते हो आके बताओ. अरे आओ तो.

आमिर पर अगर ये क्विज़ नहीं खेला तो दोगुना लगान देना पड़ेगा

आमिर पर अगर ये क्विज़ नहीं खेला तो दोगुना लगान देना पड़ेगा

म्हारा आमिर, सारुक-सलमान से कम है के?

परफेक्शनिस्ट आमिर पर क्विज़ खेलो और साबित करो कितने जाबड़ फैन हो

परफेक्शनिस्ट आमिर पर क्विज़ खेलो और साबित करो कितने जाबड़ फैन हो

आज आमिर खान का हैप्पी बड्डे है. कित्ता मालूम है उनके बारे में?

अनुपम खेर को ट्विटर और वॉट्सऐप वीडियो के अलावा भी ध्यान से देखा है तो ये क्विज खेलो

अनुपम खेर को ट्विटर और वॉट्सऐप वीडियो के अलावा भी ध्यान से देखा है तो ये क्विज खेलो

चेक करो अनुपम खेर पर अपना ज्ञान.

कहानी राहुल वैद्य की, जो हमेशा जीत से एक बिलांग पीछे रह जाते हैं

कहानी राहुल वैद्य की, जो हमेशा जीत से एक बिलांग पीछे रह जाते हैं

'इंडियन आइडल' से लेकर 'बिग बॉस' तक सोलह साल हो गए लेकिन किस्मत नहीं बदली.

गायों के बारे में कितना जानते हैं आप? ज़रा देखें तो...

गायों के बारे में कितना जानते हैं आप? ज़रा देखें तो...

कितने नंबर आए बताते जाइएगा.

संविधान के कितने बड़े जानकार हैं आप?

संविधान के कितने बड़े जानकार हैं आप?

ये क्विज़ जीत लिया तो आप जीनियस हुए.