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UFO Day: क्यों कुछ लोगों के लिए एलियंस सिर्फ कल्पना नहीं हैं?

तथ्य बनाम कल्पना. सत्य बनाम अफ़वाह.

इन्हीं दो वर्सेज़ की चुनौती है. हमें जानकारी को चालकर फ़ैक्ट और फ़िक्शन अलग करना है. ईमानदार चिंताओं और मास हीस्टीरिया में फ़र्क करना है. हम ये डिस्क्लेमर क्यों दे रहे हैं? क्योंकि आज UFO डे है और आज हम इन्हीं पर बात करने जा रहे हैं.

UFO यानी अनआईडेंटिफ़ाइड फ़्लाइंग ऑब्ज़ेक्ट. हममें से कई लोग इसे उड़नतश्तरी भी कहते हैं. क्या UFO सचमुच होते हैं? क्या ये ख़तरनाक हैं? क्या राष्ट्रीय सुरक्षा को इनसे ख़तरा है? या UFO से जुड़ी बातें महज गप्पबाज़ी और भ्रांति हैं? क्या कल्पना के इस ढेर में कुछ भी वास्तविक और गंभीर नहीं?

इन सवालों की खोज हमेशा अमेरिका की ओर ले जाती है, जहां UFO दशकों से दिखाई दे रहे हैं और वहां इन पर यक़ीन करने वालों की संख्या अच्छी ख़ासी है. बीते महीने ही ख़बर आई थी कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय UFO पर अपनी एक रिपोर्ट जारी करने वाला है. इससे दो रोज़ पहले यानी 16 जून को अमेरिकी रक्षा और खुफ़िया विभाग के कुछ अधिकारियों ने कुछ सांसदों को इस रिपोर्ट पर ब्रीफ़िंग भी दी थी. इस ब्रीफ़िंग के बाद कुछ सांसदों का बयान भी आया. उनका कहना है कि उन्हें पेंटागन की इस रिपोर्ट के बारे में जो पता चला है, वो बेहद परेशान करने वाला है. एक सांसद ने कहा कि UFO के फ़्रंट पर कुछ ऐसा हो रहा है, जिसे हैंडल करना फ़िलहाल मुमकिन नहीं दिखता. क्या है ये पूरा मामला, विस्तार से बताते हैं.

आज से 74 बरस पहले की बात है. साल था, 1947. तारीख़, 24 जून. वॉशिंगटन स्टेट में ज्वालामुखी का एक पहाड़ है. नाम है, माउंट रेनियर. इससे कुछ दूर आकाश में एक कॉलएयर ए-2 विमान उड़ रहा था. इसके पायलट थे, केनेथ अर्नोल्ड. दोपहर के करीब 3 बजे का वक़्त था. विमान उड़ाते हुए बीच आकाश में अर्नोल्ड भाई साहब ने एक तेज़ चमकदार सी रोशनी देखी. मानो प्रकाश का एक बेहद चमकीला टुकड़ा किसी आईने से टकराकर आंख को चकाचौंध कर गया हो.

अर्नोल्ड को समझ नहीं आया कि रोशनी आई कहां से. कुछ ही सेकेंड बीते थे कि अर्नोल्ड को अपनी बाईं दिशा से उसी तरह के और फ़्लैशेज़ दिखे. ग़ौर किया, तो पाया कि माउंट रेनियर के नज़दीक आसमान में कुछ चीजें उड़ रही हैं. गिनती गिनी, नौ. एक श्रृंखलाबद्ध फ़ॉर्मेशन में नौ ऑब्जेक्ट्स आसमान में उड़ रहे थे. वो तेज़ रोशनी उन्हीं उड़ती हुई चीजों से आ रही थी. बकौल अर्नोल्ड, वो ध्वनि की गति से तीन गुना तेज़ी से उड़ रही थीं.

पायलट केनेथ अर्नोल्ड. (तस्वीर: एएफपी)
पायलट केनेथ अर्नोल्ड. (तस्वीर: एएफपी)

क्या वो कोई विमान थे?

अर्नोल्ड को वो विमान नहीं लगे. क्योंकि उन उड़ने वाली वस्तुओं की बॉडी विमानों जैसी नहीं थी. उनका आकार बूमरैंग जैसा था. बूमरैंग जानते हैं न. कुछ-कुछ धनुष के आकार में लकड़ी का एक टेढ़ा सा टुकड़ा होता है. उसे सही से फेंको, तो लौटकर वापस आपके ही पास आ जाता है. उन उड़ने वाली चीजों की मूवमेंट देखने से अर्नोल्ड को लगा, मानो आसमान में तश्तरियां उड़ रही हों. अर्नोल्ड ने इस प्रकरण के बारे में लोगों को बताया. बात फैल गई. मीडिया को भी ख़बर लगी. इस घटना के दो रोज़ बाद, यानी 26 जून, 1947 को ‘शिकागो सन’ नाम के अख़बार ने इसपर एक ख़बर छापी. इसकी हैडिंग थी-

सुपरसॉनिक फ़्लाइंग सॉसर्स साइटेड बाय आइडहो पायलट. स्पीड एस्टिमेटेड ऐट 1,200 माइल्स एन आवर. वेन सीन 10,000 फीट अप नियर माउंट रेनियर.

बस यहीं से चल निकला वो फ़्लाइंग सॉसर्स का टर्म. जिसका हमारे यहां हिंदी अनुवाद हुआ- उड़न तश्तरी.

माना जाता है कि अर्नोल्ड के दावे के साथ ही एलियन ऑब्ज़ेक्ट्स देखे जाने का ये आधुनिक काल शुरू हुआ. इसके बाद तो ऐसे प्रकरणों की बाढ़ आ गई. 1947 का साल ख़त्म होते-होते अकेले अमेरिका में इस तरह के 800 से ज़्यादा प्रकरण रिपोर्ट हुए.

बहस शुरू हो गई कि क्या दूसरे ग्रह के वासी धरती के दौरे में आते हैं?

क्या ये मुमकिन है? इस सवाल का ठोस जवाब तो खगोलशास्त्री और वैज्ञानिक ही दे सकते थे. उन्होंने क्या कहा? साइंटिस्ट कम्युनिटी की मोटा-माटी राय ये थी कि उड़नतश्तरी की बातें बेबुनियाद हैं. ऐसा कुछ नहीं है. क्यों? क्योंकि उनके मुताबिक, ऐसा कुछ हो ही नहीं सकता. कहा गया कि कभी बादल देखकर, कभी वेदर बलून देखकर, तो कभी ऐसी ही किसी ग़लतफ़हमी से लोगों को UFO का आभास हुआ होगा. जब UFO साइटिंग्स के मामले बढ़ने लगे, तो इसके पीछे कल्पनाशीलता, मास हीस्टीरिया, सम्मोहन, कन्सपिरेसी थिअरी में दिलचस्पी, पॉपुलर होने की चाहत जैसी वजहें भी गिनाई जाने लगीं.

ये तो हुई वैज्ञानिकों की राय? अब बात करते हैं सरकारों की? क्या उन्होंने भी इसे खारिज़ कर दिया? अब यहां एक चीज ग़ौर कीजिएगा. ये जिस दौर की बात है, तब कोल्ड वॉर शुरू हो चुका था. सोवियत और अमेरिका गुट, दोनों हथियार और तकनीक में एक-दूसरे को छकाना चाहते थे. दोनों के आगे अपने इलाके सुरक्षित करने की भी चुनौती थी. दोनों को डर था कि कहीं सामने वाला उनके इलाके में घुसपैठ करके कोई चालाकी या बदमाशी न करे. ऐसे में जब आसमान में उड़ने वाली अज्ञात चीजों को देखे जाने की ख़बरें बढ़ीं, तो किसी भी पक्ष के लिए इसे अनदेखा करना मुमकिन नहीं रहा. अमेरिका को लगता, कहीं सोवियत ने कोई बेहद अडवांस्ड विमान तो नहीं बना लिया? यही शक सोवियत को भी होता अमेरिका पर.

सितंबर 1947 में, यानी अर्नोल्ड के दावे के तीन महीने बाद ये चर्चा इतनी बढ़ गई कि अमेरिकी वायु सेना के अंदरखाने में भी बातें होने लगीं. तब US एयरफ़ोर्स में एक अधिकारी थे, लेफ़्टिनेंट जनरल नाथन एफ़ ट्विनिंग. सितंबर 1947 में उन्होंने आर्म्ड फ़ोर्सेज़ के कमांडिंग जनरल को एक मेमो भेजा. इसमें लिखा था कि ये जो आसमान में रहस्यमय चीजें देखे जाने की चर्चा है, वो काल्पनिक नहीं, सच है. मेमो में आगे कहा गया था कि मुमकिन है, किसी दुश्मन देश ने कोई अविश्वसनीय सी विमान टेक्नॉलज़ी ईजाद कर ली हो. ऐसी तकनीक, जिसकी हम फिलहाल कल्पना भी नहीं कर सकते.

लेफ़्टिनेंट जनरल नाथन एफ़ ट्विनिंग. (तस्वीर: एएफपी)
लेफ़्टिनेंट जनरल नाथन एफ़ ट्विनिंग. (तस्वीर: एएफपी)

क्या हुआ इस मेमो का नतीजा?

इसके बाद अमेरिका ने एक गोपनीय प्रोग्राम शुरू किया. इसका नाम था- प्रॉज़ेक्ट साइन. इसका मक़सद था, उड़नतश्तरियां देखे जाने की रिपोर्ट्स की पड़ताल करना. विषय को लेकर इस प्रॉज़ेक्ट के अधिकारी एकमत नहीं थे. कुछ को लगता था, मुमकिन है उड़नतश्तरियां एलियन्स की हों. वहीं कुछ को लगता था कि ये सब ग़लतफ़हमी का नतीजा है.

अब आते हैं 1948 के साल पर. अर्नोल्ड वाले प्रकरण को एक साल बीतते-बीतते एक और बड़ी ख़बर आई. ये बात है 24 जुलाई, 1948 की. मौसम साफ़ था. अमेरिका के ईस्टर्न एयरलाइन्स का एक विमान डीसी-3 करीब 5,000 फुट की ऊंचाई पर उड़ रहा था. तड़के सुबह तकरीबन पौने तीन बजे होंगे. एकाएक विमान के पायलट क्लैरेंस चिल्स और को-पायलट जॉन विट्टेड ने अपनी दक्षिण-पश्चिम दिशा में उड़ रही एक विशाल वस्तु देखी.

उस ऑब्ज़ेक्ट का आकार सिगार जैसा था. उसमें किसी आम विमान की तरह डैने नहीं थे. उस ऑब्ज़ेक्ट के पीछे से तेज़ रोशनी निकल रही थी. उसके निचले हिस्से में एक नीले रंग की आभा निकल रही थी. वो ऑब्ज़ेक्ट अद्भुत रफ़्तार से उड़ते हुए डीसी-3 विमान के करीब आया. इतने करीब कि दोनों पायलटों ने देखा, उस उड़ रहे ऑब्जेक्ट में खिड़कियों की दो पंक्तियां हैं. मानो उस ऑब्जेक्ट के भीतर दो मंज़िलें रही होंगी. उन खिड़कियों के भीतर, उस ऑब्ज़ेक्ट के भीतरी हिस्से में बहुत तेज़ रोशनी थी.

वो ऑबेज़ेक्ट डीसी-3 विमान की तरफ़ ही बढ़ रहा था कि अचानक उसने एक अविश्वसनीय टर्न लिया और गुम हो गया. ये घटना उन दोनों पायलट्स ने ही नहीं देखी. विमान पर उस समय कुल 20 पैसेंज़र सवार थे. उनमें से 19 सोये हुए थे. क्लैरेंस मैकक्लाइव नाम का एक यात्री जगा हुआ था. उसने भी वही बात कही, जो विमान के दोनों पायलट्स ने कही थी. इस फ़्लाइंग ऑब्ज़ेक्ट को वहां से गुज़र रहे एक और विमान के पायलट ने भी देखा था. ज़मीन पर भी कुछ लोग इस साइटिंग के चश्मदीद थे. पूछताछ के दौरान इन सभी ने कमोबेश एक सी बातें कहीं.

ये पहली दफ़ा था, जब किसी ने उन अज्ञात फ़्लाइंग ऑब्ज़ेक्ट्स को इतने करीब से देखा था. इस घटना पर शोर मच गया. 25 जुलाई, 1948 को ‘दी अटलांटा कॉन्स्टिट्यूशन’ अख़बार ने इस प्रकरण पर छापी गई अपनी ख़बर को हेडिंग दी-

अटलांटा पायलट्स रिपोर्ट विंगलेस स्काई मॉनस्टर.

हमने आपको 1947 में गठित ‘प्रॉज़ेक्ट साइन’ के बारे में बताया था. उसके जांचकर्ताओं ने इस प्रकरण की भी जांच की. उन्होंने अपनी फाइंडिग्स का ब्योरा फाइल किया. इस टॉप-सीक्रेट मेमो का नाम था- एस्टिमेट ऑफ़ दी सिचुएशन. क्या था इसमें? इसमें फ़्लाइंग ऑबेज़ेक्ट के दूसरे ग्रह से आने की अवधारणा पर बात की गई थी.

अमेरिका UFO को सार्वजनिक तौर पर तवज्जो नहीं देता.

इसके बाद भी फ़्लाइंग ऑब्जेक्ट्स देखे जाने के दावे नियमित रूप से सामने आते रहे. मगर ज़्यादातर दावे अपुष्ट थे. लेकिन जुलाई 1952 में एक ऐसी घटना हुई, जिसे कइयों ने देखा. जिसे नकारा जाना मुमकिन नहीं था. ये बात है 22 जुलाई, 1952 की. इस रोज़ ‘न्यू यॉर्क टाइम्स’ में एक ख़बर छपी. इसकी हेडिंग थी-

फ़्लाइंग ऑब्ज़ेक्ट्स नियर वॉशिंगटन स्पॉटेड बाय बोथ पायलट्स ऐंड रेडार. एयरफ़ोर्स रिवील्स रिपोर्ट्स ऑफ़ समथिंग, परहेप्स सॉसर्स.

न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट.
न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट.

ये उड़नतश्तरियां वाइट हाउस की हवाई सीमा में घुस आई थीं. ब्योरा देते हुए टाइम्स ने अपनी रपट में लिखा था-

वायु सेना ने आज रात ख़ुलासा किया कि उन्हें राजधानी में अज्ञात फ़्लाइंग ऑब्ज़ेक्ट्स के विज़िट की रिपोर्ट मिली है. ये फ़्लाइंग ऑब्ज़ेक्ट्स आसमान में ऊपर-नीचे कूदती सी चल रही थीं. वॉशिंगटन नैशनल एयरपोर्ट के एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल सेंटर ने भी इसकी पुष्टि की. सेंटर ने बताया कि पिछले शनिवार उनके रेडार ने करीब आठ अज्ञात फ़्लाइंग ऑब्ज़ेक्ट्स को नोटिस किया. कैपिटल एयरलाइन्स फ़्लाइट 807 के पायलट ने भी पिछले शनिवार की रात करीब सवा तीन बजे सात फ़्लाइंग ऑब्जेक्ट्स को देखा. विमान के पायलट का कहना है कि उसे पहले लगा, कोई तारा टूटकर गिर रहा है. बाद में ग़ौर करने पर समझ आया कि वो अज्ञात चीजें बेहद तेज़ गति से हॉरिज़ॉन्टली उड़ रही थीं.

उन अज्ञात उड़ने वाली चीजों का वाइट हाउस एयर स्पेस में घुसना गंभीर घटना थी. मगर सेना इस मुद्दे को सार्वजनिक तौर पर तवज्जो नहीं देना चाहती थी. उसने शुरू में इसे डाउनप्ले किया. लेकिन पब्लिक प्रेशर के चलते उसे जवाब देने सामने आना पड़ा. तब US एयर फ़ोर्स के डायरेक्टर ऑफ़ इंटेलिज़ेंस थे, मेज़र जनरल जॉन सैमफ़ोर्ड. उन्होंने एक बड़ी प्रेस कॉन्फ़्रेंस की. इसमें उन्होंने कहा-

इन अज्ञात फ़्लाइंग ऑब्ज़ेक्ट्स से जुड़ी बहुत सारी रिपोर्ट्स आ रही हैं. इनका एक हिस्सा विश्वसनीय ऑब्ज़र्वर्स के मार्फ़त आया है. उनके द्वारा दी गई जानकारियां हैरतअंगेज़ और कल्पना से परे हैं.

क्या इसके बाद अमेरिकी सेना और प्रशासन ने इस मसले को गंभीरता दी?

जवाब है, हां. 1953 में अमेरिकी ख़ुफिया एजेंसी CIA ने इस मसले से डील करने के लिए विशेषज्ञों की एक ख़ास कमिटी बनाई. इस कमिटी के मुखिया थे, भौतिकशास्त्री हॉवर्ड पी रॉबर्टसन. उन्हीं के नाम पर ये कमिटी ‘रॉबर्टसन पैनल’ कहलाई.

इस कमिटी का काम आसान नहीं था. ये चाहते थे कि अज्ञात फ़्लाइंग ऑब्ज़ेक्ट्स से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा के ख़तरों को गंभीरता से डील किया जाए. इसके लिए तथ्य और अफ़वाह को अलग-अलग करना ज़रूरी था. मगर यहां एक बड़ी परेशानी थी. उड़नतश्तरी देखे जाने के दावों की बाढ़ आ गई थी. सारे दावे सही नहीं थे. हर दावे की पड़ताल करना बहुत पहाड़ काम था. आशंका थी कि कहीं अफ़वाहों के समंदर को टटोलते-टटोलते असली वाक़ये अनदेखे न रह जाएं. इसके लिए कोशिश की गई कि जनता का ध्यान उड़नतश्तरियों से जुड़ी अफ़वाहों और कन्सपिरेसी थिअरी से हटाया जाए.

1966 में CBS चैनल पर बताया गया कि UFO सत्य नहीं, कल्पना हैं.
1966 में CBS चैनल पर बताया गया कि UFO सत्य नहीं, कल्पना हैं.

इस काम में मीडिया और सरकारी प्रचार तंत्र की मदद ली गई. इसी कैंपेन के चलते 1966 में CBS चैनल पर एक ख़ास प्रोग्राम प्रसारित करवाया गया. इसका नाम था- UFO: फ्रेंड, फ़ो ऑर फ़ैंटसी? इसमें बताया गया कि UFO सत्य नहीं, कल्पना हैं.

एक तरफ़ जहां UFO की अवधारणा को पब्लिकली हतोत्साहित किया जा रहा था, वहीं भीतर-भीतर सेना इसपर पर्याप्त चिंतित थी. UFO साइटिंग्स की रिपोर्ट को दर्ज किया जा रहा था. ये हो रहा था ‘प्रॉजेक्ट ब्लू बुक’ के अंतर्गत. इसमें दर्ज UFO साइटिंग्स के तक़रीबन 90 फ़ीसदी दावे अफ़वाह या ग़लतफ़हमी पाए गए. कई लोग तो ऐसे थे, जिन्होंने अमेरिका के गुप्त विमान, मसलन, U-2 स्पाई प्लेन और SR-71 ब्लैकबर्ड को देखा था और उन्हें UFO समझ लिया था. मगर कम-से-कम पांच पर्सेंट दावे ऐसे थे, जो अनसुलझे रह गए. उन्हें न तो अफ़वाह कहा जा सकता था, न ग़लतफ़हमी. वो बस समझ से परे थे.

सरकार और सेना चाहे जितनी भी कोशिश कर रही हो, मगर UFO से जुड़ा मास हिस्टीरिया थमने का नाम नहीं ले रहा था. UFO में यकीन करने वालों के लिए अलग टर्म चल निकला. वो ‘यूफॉलज़िस्ट’ कहे जाने लगे. ये लोग एक-से-एक सनसनीखेज़ दावे करते. मसलन, रॉसवेल इनसिडेंट.

ये क्या माजरा है?

यूफॉलज़िस्ट्स के मुताबिक़, 1947 की गर्मियों में एलियन्स का एक स्पेसशिप न्यू मैक्सिको के पास रॉसवेल में क्रैश हो गया. इसके भीतर एलियन्स के शव मिले. अमेरिकी सरकार एलियन्स की टेक्नॉलज़ी समझना चाहती थी. इसीलिए तत्कालीन राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन ने इसे टॉप सीक्रेट रखा. इसे कवर-अप करने का जिम्मा दिया गया मज़ैस्टिक 12 नाम के एक सीक्रेट सरकारी संगठन को.

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन. (तस्वीर: एएफपी)
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन. (तस्वीर: एएफपी)

आगे चलकर कैनडी राष्ट्रपति बने. उनका कथित तौर पर एक्ट्रेस मर्लिन मुनरो से अफ़ेयर था. मर्लिन की असमय मौत हो गई. वजह थी, दवा की ओवरडोज़. मगर यूफॉलज़िस्ट्स ये नहीं मानते. उनके मुताबिक, कैनडी ने मर्लिन को रॉसवेल इनसिडेंट का राज़ बता दिया. इसीलिए मर्लिन को अपनी जान गंवानी पड़ी. उन्हें रास्ते से हटा दिया गया, ताकि ये राज़ कभी लीक न हो.

इस तरह की अनंत अफ़वाहें हैं. चटपटी गॉसिप और कन्सपिरेसी थिअरीज़ के चलते UFO एक सस्ता प्रसंग बनकर रह गया. इसकी बात करने वाले उपहास के पात्र बन गए. ऐसा माहौल बन गया कि UFO पर गंभीरता से बात करने का स्कोप ही नहीं रहा. लोग सोचते, इसकी बात करेंगे तो हमारी साख ख़त्म हो जाएगी. जनता की एक ख़ास कैटगरी होती है. ऐसे लोग जो एरिया 51 पर दिमाग़ खपाते हैं. कहते हैं, मून लैंडिंग फ़ेक थी. UFO इसी बिरादरी का एक करेक्टरिस्टिक बनकर रह गया.

एक्ट्रेस मर्लिन मुनरो. (तस्वीर: एएफपी)
एक्ट्रेस मर्लिन मुनरो. (तस्वीर: एएफपी)

हम ये प्रसंग आज क्यों उठा रहे हैं?

क्योंकि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने बीती 25 जून को अपनी एक रिपोर्ट जारी की. पेंटागन की इस रिपोर्ट पर काफ़ी उत्सुकता थी लोगों में. लेकिन रिपोर्ट निराशाजनक रही. यूएफ़ओ से जुड़ी 144 घटनाओं में से केवल एक को आइडेंटिफ़ाई किया गया. कहा गया कि इन घटनाओं की रिपोर्टिंग क्वालिटी ऐसी नहीं थी कि जांच अधिकारी किसी निष्कर्ष पर पहुंच सकते. रिपोर्ट में एलियंस के वजूद को लेकर कुछ नहीं कहा गया और आसमान में UFO देखे जाने की घटनाओं को एक तरह से नकारने की कोशिश की गई.

क्या ख़ास है इस रिपोर्ट में? ख़ास है इसे अड्रेस करना. इसपर बात करना. क्योंकि ये एक टैबू टॉपिक है. इस पर गंभीरता से बात करना एक बड़ी चुनौती है. मगर जानकारों की मानें, तो एक चुनौती राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं भी हैं. यही वजह है कि इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती.

मगर अमेरिकी प्रशासन तो दशकों तक इस मुद्दे को हतोत्साहित करता रहा. तो अब इसपर रिपोर्ट लाने की ज़रूरत क्यों महसूस हुई? इसकी वजह है बीते सालों में हुई कुछ बड़ी घटनाएं. इनमें पहला ज़िक्र करेंगे 2004 की एक घटना का. अमेरिकी नौसेना का एक ग्रुप है- निमित्ज़ कैरियर स्ट्राइक ग्रुप. नवंबर 2004 की बात है. इस ग्रुप का ट्रेनिंग प्रोग्राम चल रहा था. इसी दौरान नेवी के एक जहाज़, USS प्रिंसटन पर लगे अडवांस्ड स्पाई-1 रेडार ने कुछ अजीब सी मौजूदगी नोटिस की. रेडार की लॉगिंग के मुताबिक, आसमान में करीब 80 हज़ार फीट की ऊंचाई पर कुछ अज्ञात ऑब्ज़ेक्ट्स मौजूद थे. ऐसे कुछ ऑब्ज़ेक्ट्स की मौजूदगी समंदर की सतह पर भी रीड की गई.

तक़रीबन एक हफ़्ते तक ये मौजूदगी नोटिस करने के बाद नेवी ने अपने एक क़ाबिल कमांडिंग ऑफ़िसर को निरीक्षण के लिए भेजा. वो एक F-18 फ़ाइटर जेट से रवाना हुआ. रेडार वाली लोकेशन के पास पहुंचकर अफ़सर ने देखा कि कोई चीज है, जो बहुत तेज़ी से समंदर की सतह को मथ रही है. उसके ऊपर तकरीबन 40 फीट लंबा सफ़ेद रंग का एक अंडाकार ऑब्ज़ेक्ट मंडरा रहा है.

वो ऑब्ज़ेक्ट ऐसे बाउंस हो रहा था, मानो कोई बॉल उछल रही हो. उस ऑब्ज़ेक्ट में पंख नहीं थे. वो कैसे उड़ रहा था, ये भी समझ नहीं आ रहा था. मौके पर भेजे गए नेवी के दो और पायलेट्स ने इस घटना की पुष्टि की. इन लोगों ने जब उस ऑब्ज़ेक्ट का पीछा करने की कोशिश की, तो वो बेहद तेज़ रफ़्तार से गायब हो गया. ये घटना ‘निमित्ज़ एनकाउंटर’ के नाम से चर्चित है. इससे जुड़ी एक मिनट, 16 सेकेंड की एक विडियो क्लिप इंटरनेट पर लीक भी हुई.

अमेरिका में 2018 से 2020 के दौरान UFO जैसी कई विश्वसनीय घटनाएं रिपोर्ट हुईं. (तस्वीर: एएफपी)
अमेरिका में 2018 से 2020 के दौरान UFO जैसी कई विश्वसनीय घटनाएं रिपोर्ट हुईं. (तस्वीर: एएफपी)

अमेरिकी रक्षा विभाग ने UFO को माना?

2018 से 2020 के दौरान ऐसी कई विश्वसनीय घटनाएं रिपोर्ट हुईं. इनमें से कुछ घटनाओं से जुड़ी तस्वीरें और विडियोज़ इंटरनेट पर लीक भी हुए. अमेरिकी रक्षा विभाग ने इसकी सत्यता भी मानी. ऐसी ही घटनाओं के मद्देनज़र रक्षा विभाग को इन मामलों की विस्तृत जांच करने की ज़रूरत महसूस हुई. इसीलिए अगस्त 2020 में तत्कालीन डेप्युटी डिफ़ेंस सेक्रेटरी डेविड नॉरक्विस्ट ने एक टास्क फ़ोर्स के गठन का ऐलान किया. इसका मक़सद था, UFO से जुड़े मामलों की जांच करना. डिफ़ेंस डिपार्टमेंट UFO के लिए UAP शब्द इस्तेमाल करता है. UAP माने, अनआइडेंटिफ़ाइड एरियल फेनोमेना.

बढ़ती चिंताओं के मद्देनज़र 2020 में अमेरिकी सांसदों ने एक क़ानून पास किया. इसके तहत, पेंटागन और ख़ुफिया विभाग को निर्देश दिया गया कि वो UFO के साथ हुए एनकाउंटर्स का ब्योरा मुहैया कराएं. ऐसे ब्योरे, जो अब तक सीक्रेट रखे जाते थे, वो सांसदों के आगे पेश किए जाएं.

पूर्व अमेरिकी डेप्युटी डिफ़ेंस सेक्रेटरी डेविड नॉरक्विस्ट. (तस्वीर: एएफपी)
पूर्व अमेरिकी डेप्युटी डिफ़ेंस सेक्रेटरी डेविड नॉरक्विस्ट. (तस्वीर: एएफपी)

इन्हीं डिवेलपमेंट्स का नतीजा है पेंटागन की वो रिपोर्ट, जो 25 जून तक कांग्रेस के आगे पेश होने वाली थी, उससे पहले ही इससे जुड़ी ख़बरें आने लगीं. क्या पता चला है? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, ख़ुफ़िया अधिकारियों को इन यूएफ़ओज़ के एलियन्स के साथ कनेक्शन होने का कोई सबूत नहीं मिला है. मगर वो इस पहेली को सुलझा भी नहीं सके हैं. वो नहीं जान सके हैं कि ये रहस्यमय उड़ने वाली चीजें क्या हैं? इनकी तकनीक क्या है? ख़बरों के मुताबिक, ये अज्ञात चीजें एलियन्स से जुड़ी हो सकती हैं, इस आशंका को भी खारिज़ नहीं किया गया है.

एक्सपर्ट्स क्या कह रहे?

दो दिन पहले, यानी 16 जून को एक और बात हुई. इस रोज़ नेवी और खुफ़िया विभाग ने संसद की हाउस इंटेलिजेंस कमिटी के आगे पेंटागन रिपोर्ट से जुड़ी एक ब्रीफ़िंग दी. इस ब्रीफ़िंग में शामिल कुछ सांसदों ने इसपर बयान भी जारी किया. इनमें से एक हैं टिम बरशेट. उन्होंने कहा कि ब्रीफिंग में दी गई जानकारी परेशान करने वाली है. टिम बोले-

स्पष्ट है कि कुछ बड़ा हो रहा है. कुछ ऐसा हो रहा है, जिसे हम हैंडल नहीं कर सकते.

अमेरिका के एक धड़े में एक आशंका ये भी है कि कहीं ये UFO चीन या रूस द्वारा बनाए गए अति-विकसित एयरक्राफ़्ट तो नहीं. इस बारे में पूछे जाने पर टिम बरशेट ने कहा-

ये बकवास है. अगर रूस के पास UFO टेक्नॉलज़ी होती, तो वो हमपर शासन कर रहे होते. ये कुछ ऐसा है, जो अगर सच में है, तो हमारे ग्रह का नहीं हो सकता. ये कुछ ऐसा है, जो शायद हमारी गैलक्सी से बाहर का है.

कई और जानकारों की भी यही राय है. मसलन, अमेरिका के अडवांस्ड एयरोस्पेस थ्रेट आइडेंटिफ़िकेशन प्रोग्राम के पूर्व निदेशक लूइस एलिज़ोन्डो. उन्होंने ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ को दिए इंटरव्यू में कहा-

UFO बहुत गंभीर ख़तरा हैं हमारे लिए. हमने ऐसी घटनाएं देखी हैं, जहां इन यूएफ़ओज़ ने हमारे देश की न्यूक्लियर क्षमता में दखलंदाज़ी की. उन्हें ऑफ़लाइन कर दिया. दूसरे देशों में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं. हमारे पास डेटा है कि यूएफ़ओज़ ने कुछ देशों की न्यूक्लियर टेक्नॉलज़ी में इंटरफ़ेअर किया और उसे ऑन कर दिया.

एलिज़ोन्डो ने आगे कहा-

हमारा मानना है कि ये ऐसी तकनीक है, जो हमसे कई पीढ़ी आगे है. हम जिसे नेक्स्ट जेनरेशन टेक्नॉलज़ी कहते हैं, उससे भी कई पीढ़ी आगे है यूएफ़ओज़ की टेक्नॉलज़ी. समझिए कि वो तकनीक हमसे 1,000 साल आगे की है.

अब सवाल है कि क्या पेंटागन की पूरी रिपोर्ट पब्लिक की जाएगी?

उत्तर है, नहीं. इसका एक बड़ा हिस्सा सार्वजनिक किया जाएगा. मगर इसमें कई जानकारियां गोपनीय कैटगरी की भी हैं. सुरक्षा कारणों से उन्हें रिलीज़ नहीं किया जाएगा.

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा. (तस्वीर: एएफपी)
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा. (तस्वीर: एएफपी)

ये पहली बार नहीं, जब कोई देश आधिकारिक तौर पर यूएफ़ओज़ से डील कर रहा हो. इससे पहले फ़्रांस में भी ऐसी ही एक चर्चित रिपोर्ट आई थी. वहां कई रिटायर्ड आर्मी जनरल्स, वैज्ञानिक और अंतरिक्ष विशेषज्ञों ने मिलकर 90 पन्नों की एक रिपोर्ट तैयार की थी. इसका शीर्षक कुछ यूं था कि हमें UFO से डिफ़ेंस की तैयारी करनी चाहिए. इस रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स ने कई आधारों पर विश्लेषण करके कहा था कि यूएफ़ओज़ का दूसरे ग्रह से संबंध होने की अवधारणा को खारिज़ नहीं किया जा सकता.

क्या सत्य है, क्या मिथ्या. क्या अफ़वाह है, क्या लेज़िटिमेट कंसर्न. ये फ़ैसला एक्सपर्ट्स ही करें, तो बेहतर है. बहरहाल इतना स्पष्ट है कि UFO से जुड़ी कई बातें फ़िलहाल समझ के परे हैं. जैसा कि मई 2021 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी माना था. CBS को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि आसमान में ऐसी कुछ चीजें देखी गई हैं, जिनके बारे में फिलहाल हम कुछ समझ नहीं रखते. हमें नहीं पता, वो हैं क्या.

क्यों मनाते हैं UFO डे?

एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है. वर्ल्ड यूएफओ डे ऑर्गनाइजेशन. साल 2001 में इसने फ़ैसला किया था हर साल 2 जुलाई का दिन यूएफओ दिवस के रूप में मनाया जाएगा. वजह बताई कि इसी दिन यूएफओ पर विश्वास करने वाले लोग दूसरी दुनिया या सीधा कहें तो एलियंस के अस्तित्व के सबूत देने के लिए सबसे बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए थे. इन लोगों को यक़ीन है कि UFO कोई कल्पना नहीं, हक़ीक़त हैं. ये लोग दावा करते हैं कि इनके पास यूएफ़ओ होने के ऐसे सबूत हैं, जिन्हें नकारा नहीं जा सकता. 2001 में हुई घोषणा के बाद से ये लोग हर साल 2 जुलाई को इकट्ठा होकर पार्टियां आयोजित करते हैं और यूएफओ से जुड़ी थ्योरीज़ पर चर्चा करते हैं.


विडियो- अमेरिका के एरिया-51 में एयर फोर्स से पंगा लेकर भी जाने की तैयारी में क्यों जुटे हैं लोग?

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'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

उनके गाए 'पल' गाने के बगैर आज भी किसी कॉलेज का फेयरवेल पूरा नहीं होता.

कर लिया योगा? अब क्विज खेलने से होगा

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आन्हां, ऐसे नहीं कि योग बस किए, दिखाना पड़ेगा कि बुद्धिबल कित्ता बढ़ा.

तमिल जनता आखिर क्यों कर रही है 'फैमिली मैन-2' का विरोध, क्या है LTTE की पूरी कहानी?

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जब ट्रेलर आया था, तबसे लगातार विरोध जारी है.

माधुरी से डायरेक्ट बोलो 'हम आपके हैं फैन'

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आज जानते हो किसका हैप्पी बड्डे है? माधुरी दीक्षित का. अपन आपका फैन मीटर जांचेंगे. ये क्विज खेलो.

जिन मीम्स को सोशल मीडिया पर शेयर कर चौड़े होते हैं, उनका इतिहास तो जान लीजिए

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कौन सा था वो पहला मीम जो इत्तेफाक से दुनिया में आया?

पार्टियों को चुनाव निशान के आधार पर पहचानते हैं आप?

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चुनावी माहौल में क्विज़ खेलिए और बताइए कितना स्कोर हुआ.

लगातार दो फिफ्टी मारने वाले कोहली ने अब कहां झंडे गाड़ दिए?

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राहुल के साथ यहां भी गड़बड़ हो गई.

रोहित शेट्टी के ऊपर ऐसी कड़क Quiz और कहां पाओगे?

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14 मार्च को बड्डे होता है. ये तो सब जानते हैं, और क्या जानते हो आके बताओ. अरे आओ तो.

आमिर पर अगर ये क्विज़ नहीं खेला तो दोगुना लगान देना पड़ेगा

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म्हारा आमिर, सारुक-सलमान से कम है के?

परफेक्शनिस्ट आमिर पर क्विज़ खेलो और साबित करो कितने जाबड़ फैन हो

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आज आमिर खान का हैप्पी बड्डे है. कित्ता मालूम है उनके बारे में?