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लॉकडाउन में बैंक के लाखों कर्मचारियों को किन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है?

देश में 25 मार्च से लॉकडाउन चल रहा है. इस दौरान फ्रंट लाइन वॉरियर्स की खूब चर्चा हुई. होनी भी चाहिए. हमने उनके सम्मान में ताली और थाली बजाई. दीए जलाए. सेना ने अस्पतालों पर फूल बरसाए. मेडिकल स्टाफ के प्रति सम्मान प्रकट किया. पुलिस के काम की भी तारीफ हो रही है. लेकिन इस बीच कुछ ऐसे वॉरियर्स हैं जो चुपचाप अपना काम कर रहे हैं. लेकिन उनकी कहीं कोई चर्चा नहीं हो रही है. हम बात कर रहे हैं उन लाखों बैंक कर्मचारियों की, जो खामोशी से अपना काम कर रहे हैं, ताकि लोगों को बैंकिंग से जुड़ी दिक्कत ना हो.

ऐसे ही कुछ बैंक कर्मचारियों से दी लल्लनटॉप ने बात की. उनके अनुभव जानने की कोशिश की. लॉकडाउन के दौरान सरकार की ओर से भेजी गई मदद के लिए लगने वाली लंबी-लंबी लाइनों के बीच वो किस तरह काम कर रहे हैं. कोरोना संक्रमण का कितना खतरा है. ऐसे में जब नोटों से कोरोना फैलने की बात हो रही है, वो कैश का काम कैसे कर रहे हैं.

सुरक्षा की वजह से हम यहां किसी भी बैंक कर्मचारी का नाम नहीं दे रहे हैं.

बड़ौदा यूपी बैंक, कुशीनगर (यूपी)

यहां के असिस्टेंट मैनेजर ने बताया कि गांव में विधवा पेंशन, वृद्धा पेंशन, पीएम किसान योजना, गैस सब्सिडी का पैसा, जनधन खाते का पैसा. ये सब लेने के लिए ज्यादातर बुजुर्ग ही बैंक आ रहे हैं. लोगों के बीच एक अफवाह ये भी फैली है कि पैसा नहीं निकाला तो वापस चला जाएगा. चार बजे के बाद बैंक खोलने की परमिशन नहीं है. अगर चार बजे के बाद बैंक में लूट होती है तो इंश्योरेंस काम नहीं करता. फिर भी हम पांच बजे तक बैंक खोले रहते हैं. उनका कहना है,

कैशियर की जॉब इतनी रिस्की है कि उसे PPE किट मिलनी चाहिए. वो सीधे लोगों के संपर्क में आता है. उसे बैंक आने वाले लोगों का अंगूठा लगवाना है. पासबुक लेना है. उन्हें नोट गिनकर देने हैं. हालांकि वो ग्लव्स पहनकर काम करते हैं लेकिन यह पर्याप्त नहीं है. हम लोग कफन बांध कर काम कर रहे हैं. अन्य बैंकों ने एक महीने की एडवांस सैलरी दी, लेकिन हमारे यहां नहीं मिली. मास्क, ग्लव्स और सेनिटाइजर खुद के पैसे से खरीदना पड़ रहा है.

उनका कहना है कि कुछ कर्मचारी ट्रेन से आते थे. लॉकडाउन में उन्हें दिक्कत हो रही है. कई लोग एक ही कार से आते थे, लेकिन अब नहीं आ पा रहे हैं. ब्रांच के तीन लोग एक साथ रह रहे हैं. अगर किसी एक को कोरोना हो गया हम सबको फैलने का डर है.

बैंक के कैशियर सबसे ज्यादा लोगों के संपर्क में आते हैं. (फोटो-पीटीआई)
बैंक के कैशियर सबसे ज्यादा लोगों के संपर्क में आते हैं. (फोटो-पीटीआई)

केनरा बैंक, दिल्ली

बैंक में काम करने वाले मार्केटिंग ऑफिसर से बात हुई. उनका कहना है कि बैंक रोज खुल रहे हैं, लेकिन सैनेटाइज नहीं हो रहे हैं. महीने में एक बार होता है. बैंक आने वाले लोगों से हम सोशल डिस्टेंसिंग के लिए बोलते हैं तो लोग हमारे ऊपर ही चढ़ जाते हैं. लोगों का आधार कार्ड थंब इंप्रेशन लेते हैं. अगर कभी काम नहीं किया तो कस्टमर हम पर गुस्सा करते हैं. मैनेजमेंट भी हमें ही सॉरी बोलने के लिए कहता है. उन्होंने बताया,

कोविड-19 लोन निकला है. ये लोन उन्हें दिया जा रहा है जो पिछला लोन नहीं चुका पा रहे हैं. इनकम कम होने से EMI नहीं दे पा रहे हैं. कोविड-19 लोन में छह महीने के बाद से EMI शुरू होगी. लोन देने के लिए हमें लोगों के घर तक जाना पड़ रहा है. हमारी कहीं भी ड्यूटी लग जाती है. हालांकि बैंक ने मास्क और सेनिटाइजर की व्यवस्था की है. फील्ड में जाने का एक्स्ट्रा पैसा भी मिलेगा, लेकिन रिस्क तो है.

जनधन खातों से पैसे निकालने के लिए ग्रामीण इलाके वाले बैंकों में लंबी-लंबी लाइने देखने को मिल रही हैं. (फाइल फोटो)
जनधन खातों से पैसे निकालने के लिए ग्रामीण इलाके वाले बैंकों में लंबी-लंबी लाइने देखने को मिल रही हैं. (फाइल फोटो)

बैंक ऑफ इंडिया, सतारा, (महाराष्ट्र)

बैंक मैनेजर का कहना है कि 10 से 12 लोगों का स्टाफ है. रोटेशन चल रहा है. आधा स्टाफ काम कर रहा है तो लोड बढ़ गया है. चार से छह गांवों में एक बैंक है. पुलिस का भी सपोर्ट नहीं है. स्टाफ मिलकर लोगों को मैनेज कर रहा है. अगर सोशल डिस्टेंसिंग फॉलो नहीं होती तो ब्रांच मैनेजर पर FIR हो जाती है. उन्होंने बताया,

पहले बाहर मेस में खाते थे, लेकिन अभी खुद से बनाना पड़ रहा है. बहुत दिक्कत हो रही है. जैसे तैसे काम चल रहा है. एक दो केस आने के बाद पूरा मार्केट बंद कर दिया गया था तीन-चार दिनों के लिए. बहुत मुश्किल हुई. सतारा रेड जोन है, फिर भी सारी चीजें खुल रही हैं. हमारे बगल में ही एक हॉटस्पॉट है, डर लगा रहता है. घर परिवार से दूर हैं. उन्हें हमारी चिंता लगी रहती है.

Coronavirus: Lockdown In Sangli
बैंकों में लगनी वाली लंबी-लबी लाइनों को मैनेज करने के लिए पुलिस का सहारा लेना पड़ रहा है. (फोटो-पीटीआई)

केनरा बैंक, आगरा, (यूपी)

यहां के असिस्टेंट बैंक मैनेजर बताते हैं कि आगरा रेड जोन में है. दो बैंकर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. इसके बाद बैंक कर्मचारियों में डर है. बैंकों में भीड़ बहुत हो रही है. एक-एक किलोमीटर तक लाइन लग रही है. मान लीजिए कि आधे किलोमीटर के बाद अगर कहीं कोई सटकर खड़ा है तो शिकायत हो जाती है कि बैंक मैनेजर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करा पा रहे हैं. उन्होंने कहा,

आगरा में हॉट स्पॉट एरिया चिन्हित किए गए हैं. डीएम ने कहा कि हॉट स्पॉट में बैंक बंद रहेंगे. लेकिन अगले दिन बैंक खुले. क्योंकि स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं थी. अब भी खुल रहे हैं. रिस्क बढ़ गया है. बैंकों के टारगेट में कोई कमी नहीं है.

पंजाब नेशनल बैंक, दिल्ली

PNB के हेड ऑफिस में काम करने वाले प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) ने बताया कि हमें रोज बैंक जाना पड़ रहा है. बैंक के कई कर्मचारियों के पास पांच, 10 और 15 हजार का ऑनलाइन चालान आया है. लॉकडाउन में सड़क खाली है, तो लोग रेड लाइट का ध्यान नहीं रखते हैं. अब ऐसे कई कर्मचारियों के पास चलान आया है. उन्होंने बताया,

हमारे हेड ऑफिस में एक हफ्ता पहले ही कोरोना के दो पॉजिटिव केस आए. दो दिन ऑफिस बंद हुआ. बिल्डिंग सेनिटाइज हुई. फिर से काम शुरू हो गया. मेरी वाइफ प्रेगनेंट हैं. और ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है. अभी किसी का टेस्ट नहीं हुआ. जिस डिविजन में केस आया वहां के लोगों को क्वारंटीन किया गया. लेकिन वो हमारे पास भी कभी ना कभी तो आए होंगे. लेकिन अब तक किसी का टेस्ट नहीं हुआ.

केनरा बैंक, धनबाद, (झारखंड)

बैंक मैनेजर का कहना है कि महिला कर्मचारियों को दिक्कत हो रही है. छोटे-छोटे बच्चे हैं. पोस्टिंग घर से दूर है. लॉकडाउन से पहले हर हफ्ते घर चले जाते थे लेकिन अभी बहुत दिनों से बच्चों से मिलना नहीं हो पा रहा है. हालांकि कुछ बैंकों ने लॉकडाउन में घर के पास ही पोस्टिंग दी है. लेकिन ये सबको नहीं मिली है.

उन्होंने बताया,

बैंक टाइम से पहुंचना होता है. लॉकडाउन में साधन नहीं मिलते. बहुत दिक्कत होती है. बैंकों में भीड़ बहुत हो रही है. नोट से कोरोना फैलने की खबरों के बीच डर लगा रहता है. कस्टमर से जो कैश लेते हैं उसे लेकर डाउट रहता है कि कोरोना वायरस तो नहीं है. कस्टमर को ये नहीं बोल सकते कि नोट नहीं ले सकते. बैंक में जो नोट लिए जा रहे हैं वो करोड़ों में होते हैं, उन्हें सेनिटाइज करना मुश्किल है. नोट वैसे ही लॉकर में रख दिए जाते हैं.

ग्रामीण बैंक उरई

उरई के ग्रामीण बैंक के मैनेजर का कहना है कि बैंकिंग इमरजेंसी सर्विस में है, लेकिन सरकार का उतना ध्यान है नहीं. जबकि पैसा हर आदमी की आवश्यकता है. किसान की फसल नहीं बिक रही है. उसे पैसे की जरूरत है तो बैंक आ रहा है. लॉकडाउन में भीड़ बहुत हो रही है बैंकों में. ऐसे में कहां कोई बच पाएगा. रिस्क उठाकर लोगों की सेवा कर रहे हैं. उन्होंने बताया,

रेड जोन में जॉब पर जाने के लिए पुलिस को फेस करना पड़ता है. पुलिस कहती है कि आपका पास है, गाड़ी का नहीं है. बड़ी नोकझोक होती है. एटा में बैंक मैनेजर को कोरोना हो गया. फिर अन्य लोगों को क्वारंटीन करना पड़ा. ब्रांच को सील करना पड़ा. बैंकों में पहले ही कर्मचारियों की दिक्कत है. अल्टरनेट दिन पर काम करने से ये समस्या और बढ़ गई है.

हमारे यहां ग्रामीण बैंक के 50 से ज्यादा ब्रांच हैं. सभी ब्रांच में कैश पहुंचना होता है. कितने नोटों को सैनिटाइज किया जा सकता है. एक-एक नोट तो सैनिटाइज हो नहीं सकती. ऐसे में खतरा तो रहता ही है.

नोएडा में ICICI बैंक में काम करने वाले सेल्समैन ने बताया कि लॉकडाउन में घर से ही काम कर रहे हैं. लेकिन कोई भी प्रोडक्ट नहीं बेच पा रहे हैं. लोगों में नौकरी जाने का डर है. इसलिए वो ना तो क्रेडिट कार्ड ले रहे हैं और ना ही किसी तरह का लोन. बिजनेस प्रभावित हुआ है. हालांकि बैंक भी इस बात को समझता है, इसलिए पहले जितना बड़ा टारगेट नहीं मिला है.


Video: कोरोना लॉकडाउन के नाम पर लेबर लॉ सस्पेंड करने की तैयारी?

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