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स्टीव स्मिथ, कपिल देव, मोदी और योगी ने कौन सा एक ही काम किया जिससे उन्हें फ़ायदा मिला

स्टीव स्मिथ प्रेस कांफ्रेंस में रो दिए. उनके पाप धुल गए. ठीक वैसे जैसे कोई भी भाजपा में शामिल हो जाता है तो उसके सारे गुनाह माफ़ हो जाते हैं. साल 2000 में मनोज प्रभाकर ने तहलका किया था. इंडियन क्रिकेट हिला हुआ था. कपिल देव करन थापर के सामने जाकर फफकते हुए रो पड़े थे. उनके पाप धुल गए थे. यही आज स्टीव के साथ देखने को मिला. अपने देश में पहली कांफ्रेंस थी. सही जगह चोट की. जो जनता उनकी थू-थू कर रही थी, अभी सहानुभूति दिखा रही है. रोना बहुत कुछ बदल देता है. देश में मोदी भी प्रधानमंत्री बनते ही रोये थे. उससे पहले पाकिस्तान उनके नाम से थर-थर कांपता था. योगी भी जाकर आंसू चुआ चुके हैं. वो, जो हजरतगंज चौराहे पर खड़े होकर सूबे के मुख्यमंत्री को कभी ये चैलेन्ज देते हुए पाए गए थे कि दम हो तो उन्हें अरेस्ट कर लिया जाए.

अपनी पर आने पे सभी विकल्प आजमाए जाते हैं. रोना वाकई सब कुछ बदल देता है. अगर आपको लगता है कि ये पहला मौका है जब ऑस्ट्रेलिया ने गेंद से छेड़छाड़ की और इसी बारी में पकड़ लिए गए तो आप गलत हैं. गलत क्या, भोले हैं. फैनी डिविलियर्स की बातें सुनिये. साउथ अफ़्रीका के लिए खेल चुका प्लेयर जो अब कमेंट्री करता है. वो पहले टेस्ट से इस बात पर उंगली उठा रहा था कि आखिर ऐसा क्या है जो ऑस्ट्रेलिया के बॉलर्स 26वें ओवर से रिवर्स स्विंग करने लगते हैं. जबकि इसके ठीक पहले इंडिया एक सीरीज़ खेलकर गई थी और वहां ऐसा कुछ नहीं हुआ था. तीसरे टेस्ट मैच में साउथ अफ़्रीका की बॉलिंग के दौरान एक ऑस्ट्रेलिया के बैट्समेन ने अम्पायर से कहा था, “How the f**k do they reverse swing this early in the game?” नतीजतन उन्हें भी गेम में शुरुआत में ही रिवर्स स्विंग की चाह थी. इस चाह के चलते एक सोची-समझी साज़िश के तहत बैनक्रॉफ्ट की जेब में टेप रखवाया गया. वो टेप जिसे 29 मार्च को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अपने स्टेटमेंट में सैंडपेपर अर्थात रेगमाल घोषित कर दिया. क्यूंकि अगर उसे टेप ही रखा जायेगा तो शायद आगे चलकर उनके खिलाड़ियों को मैदान पर उसके किसी भी तरह के इस्तेमाल पर शक की निगाह से देखा जा सकता है. जबकि सैंडपेपर को अमूमन बल्लों के खुरदुरे हिस्से को शेप में लाने या और कामों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो कि ड्रेसिंग रूम में ही हो जाता है.


डेविड वार्नर, जिन्हें पिछले डेढ़-दो सालों से लगभग हर सीरीज़ में किसी न किसी से भिड़ते, गाली-गलौज करते हुए देखा जा रहा था, टीम के उपकप्तान थे. लगातार उके ख़िलाफ़ बातें कही जा रही थीं. वो लगातार अनुशासनहीनता दिखा रहे थे. लेकिन फिर भी उनका 12 महीने बैन झेलना समझ नहीं आ रहा. इसका जवाब है डैरेन लेहमेन. उन्हें इस पूरे किये-धरे से पाक-साफ़ रखा जाना था. यदि एक कोच को कटघरे में ला खड़ा किया जाता है तो पूरी टीम की नीयत पर शक होता है. मालूम पड़ता है कि वही असली रिंगमास्टर और बाकी जो भी चल रहा है, उसकी देखरेख में चालू था. सिर्फ़ 3 लोगों पर दोष डाले जाने से मामला एक क्लोज्ड अफ़ेयर ज़्यादा मालूम पड़ेगा. इस बात का यहां ख़ास ख़याल रखा गया है.


Warner image

डैरेन लेहमेंन यानी ऑस्ट्रेलिया का कोच जिसने स्मिथ के स्टेटमेंट और उनके रुदाली गान के बाद इस्तीफ़ा दिया. जिसके बारे में कहा जा रहा है कि उसे बॉलटेम्परिंग के बारे में तब तक नहीं मालूम था जब तक उसने टीवी कैमरों को बैनक्रॉफ्ट को पकड़ते नहीं देखा. वो कोच जिसने, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के अनुसार, वॉकी-टॉकी पर हैंड्सकूम्ब से कहा, “what the f**k is going on?” और हैंड्सकूम्ब दौड़ कर मैदान पर बैनक्रॉफ्ट को ये बताने पहुंच गया कि वो पकड़ा जा चुका था. (ये बात उसने मुस्कुराते हुए बताई थी.) और बताया जाता है कि टीम के कोच को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. ये अपचनीय है. उतना ही जितना सिद्धू का तहलका टेप में ये कहना कि ‘कपिल के मेरे ऊपर बहुत करम हैं. मैं उसके ख़िलाफ़ कुछ नहीं बोल सकता.’ और फिर कपिल का जाकर बीबीसी के स्टूडियो में रो देना. उतना ही अपचनीय जितना ये कहना कि सचिन ने गेंद की सीम से सिर्फ घास हटाई थी, वो उसकी सीम को खुरच नहीं रहे थे.

स्टीव स्मिथ और डेविड वॉर्नर ने बैनक्रॉफ्ट को बेहतरीन ढंग से फंसाया है. एक नया खिलाड़ी जो टीम में जगह पक्की करना चाहता है. जो इंग्लैंड के टूर पर जेब में चीनी भर कर मैदान पर उतरता है. उस समय में जब प्लेयर्स के लिए तमाम प्रकार की जेली बीन्स और च्युइंग गम मौजूद रहती हैं. उसे एक आदेश मिलता है जो उसे पूरा करना ही होगा. सहवाग को गांगुली ने टेस्ट मैच में ओपनिंग करने के लिए कहा था. सहवाग श्योर नहीं थे तो उन्होंने अपनी परेशानी ज़ाहिर कर दी थी. गांगुली ने उन्हें ये वादा किया था कि अगर वो अगले 5 टेस्ट में हर इनिंग्स में ज़ीरो पर भी आउट होगे तो भी उनकी टीम में जगह बरकरार रहेगी. बैनक्रॉफ्ट के लिए ये वही मौका था. उन्होंने उसे तुरंत (एक बार फिर?) लपक लिया. इस बार फंस गए. फैनी डिविलियर्स केप टाउन पहुंचे और टीवी प्रोड्यूसर्स को सचेत कर दिया. उनके पास सहूलियत थी सो उन्होंने ये कर लिया. और जब किया, उसी रोज़, डेढ़ घंटे में ऑस्ट्रेलिया फांसे में आ गया? या तो ये एक बेहतरीन इत्तेफ़ाक था या क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया, स्टीव स्मिथ, डेविड वॉर्नर, डैरेन लेहमेन और जेम्स सदरलैंड दुनिया को बेवक़ूफ़ मान चुके हैं और उन्हें और भी ज़्यादा बेवक़ूफ़ बनाना चाहते हैं. आप बन भी सकते हैं. आपकी इच्छा है. अगर आप क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की कही बातें मान रहे हैं तो आप ये भी मान लीजियेगा कि 2003 वर्ल्ड कप फाइनल में पोंटिंग के बल्ले में स्प्रिंग, टूर्नामेंट भर सचिन की आंखों में लेंस लगा था और गिलक्रिस्ट के ग्लव्स में चुम्बक था.

स्टीव स्मिथ की हालत अज़ीज़ मियां के कहे उस शेर की सी है
“वही हम हैं कभी जो रात दिन फूलों में तुलते थे
वही हम हैं के तुर्बत चार फूलों को तरसती है
दबा के चल दिए…
किसी के मुंह से निकला हमारे दफ्न के वक़्त
के इनपे ख़ाक न डालो ये हैं नहाए हुए
दबा के चल दिए…दबा के चल दिए…”


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