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कौन हैं वो दो जज, जिन्होंने किया SC-ST ऐक्ट में बदलाव

पूरे देश के दलित संगठनों की ओर से 2 अप्रैल को भारत बंद किया गया. देश तो पूरी तरह से बंद नहीं हुआ, लेकिन प्रदर्शन के दौरान देश के कई हिस्सों में हिंसा हो गई. इतनी हिंसा हुई कि मध्यप्रदेश में चार और राजस्थान में एक आदमी पुलिस की गोलियों का शिकार हो गया. पांच मौतें, सैकड़ों गाड़ियों में आगजनी, शहरों में तोड़फोड़ और कई किलोमीटर तक रेलवे की पटरियां उखाड़ने के बाद भी हिंसा शांत नहीं हुई. इस बीच जैसे-जैसे सोशल मीडिया के जरिए हिंसा की खबरें सामने आती रहीं, ऐक्ट में बदलाव के पक्षधर और विरोधी दोनों की खेमों की जुबान पर बस एक ही नाम था. वो नाम था जस्टिस उदय यू ललित का, जिन्होंने जस्टिस आदर्श कुमार गोयल के साथ मिलकर SC-ST ऐक्ट में बदलाव के आदेश दिए थे.

सोशल मीडिया पर जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की चर्चा नहीं हो रही है, लेकिन जस्टिस उदय यू ललित के बारे में कहा जा रहा है कि यही है वो जज जिसने एससी-एसटी ऐक्ट खत्म कर दिया. पहले देखिए सोशल मीडिया पर चल क्या रहा है.

बाकी और भी चीजें देखनी हों तो फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक या फिर ट्वीटर पर चाहिए. हजारों लोग इस बारे में लिख रहे हैं. लेकिन इसमें तथ्यात्मक तौर पर कुछ गलतियां हैं, जिसके बारे में जानना ज़रूरी है. पहली बात तो ये है कि सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस आदर्श कुमार गोयल दोनों ही लोगों की बेंच ने फैसले पर मुहर लगाई है और दूसरी ये कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐक्ट खत्म नहीं किया है, बल्कि उसमें संशोधन किया है. और यही बात है, जिसके बारे में गलतफहमी फैलाई जा रही है.

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और अब बात उन दोनों जजों की, जिन्होंने ये फैसले दिए हैं.

जस्टिस उदय यू ललित

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मुंबई के रहने वाले जस्टिस उदय यू ललित वकीलों के परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता जस्टिस यू.आर. ललित एक क्रिमिनल लॉयर थे, जिन्हें बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट का एडिशनल जज बनाया गया. अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए यूयू ललित ने 1983 में मुंबई बार असोशिएसन में रजिस्ट्रेशन करवाया. 1986 में यूयू ललित सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे. सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल सोली सोरॉबजी के साथ काम करने लगे और करीब छह साल तक उनके साथ काम किया. अप्रैल 2004 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील का दर्जा दे दिया गया. इसके बाद पूरे देश में क्रिमिनल लॉयर के तौर पर यूयू ललित का नाम लिया जाने लगा.

यूयू ललित देश के कई हाई कोर्ट में बड़े-बड़े मुकदमों की पैरवी करने पहुंचे. इन बड़े मुकदमों में सबसे बड़ा और हाई प्रोफाइल मुकदमा बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का था, जिनपर सोहराबुद्दीन में फर्जी एनकाउंटर के आरोप लगे थे. इसके अलावा यूयू ललित ने गुजरात में हुई तुलसीराम प्रजापति के मुठभेड़ में अमित शाह का नाम सामने आने के बाद उनका बचाव किया था. इसके अलावा यूयू ललित ही वो वकील थे, जिन्होंने ब्लैक बक और चिंकारा मारने के मामले में फिल्म अभिनेता सलमान खान का राजस्थान हाई कोर्ट में बचाव किया था. इसके अलावा जब तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह की उम्र पर विवाद चल रहा था, तो यूयू ललित ही जनरल वीके सिंह के वकील थे. छत्तीसगढ़ के सामाजिक कार्यकर्ता बिनायक सेन पर जब देशद्रोह का मुकदमा दर्ज हुआ था, तो यूयू ललित ने बिनायक सेन की जमानत का विरोघ किया था. इसके अलावा वो पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का भी भ्रष्टाचार के एक मामले में बचाव कर चुके हैं. यूयू ललित ने पुणे के बिजनेस मैन हसन अली खान का भी कोर्ट में बतौर वकील बचाव किया है, जिसपर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे थे. इतने बड़े-बड़े केसों की पैरवी करने वाले यूयू ललित ने देश के सबसे बड़े घोटाले कहे जाने वाले 1.76 लाख करोड़ रुपये के टूजी घोटाले में बतौर स्पेशल प्रोसिक्यूटर पैरवी की थी.

जज बनने के पीछे भी है दिलचस्प किस्सा

सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति कॉलेजियम सिस्टम करता है. कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट के जज के लिए गोपाल सुब्रमण्यम का नाम तय किया था. जब कॉलेजियम ने कानून मंत्री को गोपाल सुब्रमण्यम का नाम भेजा, तो केंद्र सरकारी की ओर से गोपाल सुब्रमण्यन का नाम खारिज कर दिया गया. इसके पीछे तर्क दिया गया कि 2जी केस में जब यूयू ललित स्पेशल प्रोसिक्यूटर थे, तो उन्होंने उस वक्त 2जी घोटाले के आरोपी रहे ए.राजा के वकील से गुपचुप तरीके से मुलाकात की थी. इसके बाद कॉलेजियम ने फिर से एक नया नाम सरकार को भेजा और ये नाम था यूयू ललित का. सरकार की ओर से यूयू ललित के नाम को मंजूरी मिल गई और इसके बाद उन्हें वकील से सीधे सुप्रीम कोर्ट का जज बना दिया गया.

जस्टिस आदर्श कुमार गोयल

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जस्टिस आदर्श कुमार गोयल सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बनने से पहले ओडिशा और गौहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं. इससे पहले वो पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में जस्टिस रहे थे. उनकी शुरुआत भी बतौर वकील ही हुई थी. 1974 में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट बार से की थी. वहां पांच साल तक वकालत करने के बाद जस्टिस आदर्श कुमार गोयल करीब 22 साल तक दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकालत करते रहे. 2001 में उन्हें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में उन्हें जज बना दिया गया. इसके बाद ओडिशा हाई कोर्ट और फिर गौहाटी हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस रहने के बाद जुलाई 2014 में कॉलेजियम ने जस्टिस आदर्श कुमार गोयल को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बना दिया गया.


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