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बहुत बुरी मौत मरा भारत का एक वक्त का सबसे बड़ा घोटालेबाज

2जी, 3जी, सीडब्ल्यूजी घोटाले तो आप लोगों ने यूपीए-2 के दौरान सुने. सच बताएं? इससे पहले देश का सबसे बड़ा घोटाला कोई और था. फर्जी स्टैंप घोटाला. 20 हजार करोड़ रुपये का घोटाला. 16 राज्यों में फैले थे इसके तार. इसका मास्टरमाइंड था अब्दुल करीम तेलगी. 2001 में उसे अजमेर से गिरफ्तार किया गया था. 2006 में कोर्ट ने उसे दोषी मानते हुए 30 साल जेल की सजा दी थी. छोटा-मोटा नहीं, पूरे 202 करोड़ का जुर्माना लगाया था उस पर. 26 अक्टूबर 2017 को उसकी मौत हो गई. मौत की वजह मल्टीपल ऑर्गन फेलियर बताई जा रही है. उसे डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या थी. इंडियन एक्सप्रेस ने अपुष्ट रिपोर्टों के हवाले से लिखा है कि करीम को एड्स भी था. वो बंगलुरु के परापाना अग्रहारा सेंट्रल जेल में पिछले 16 साल से बंद था. करीम ने कब, कैसे शुरू किया ये काला धंधा और कैसे वो बन गया खरबपति. जानते हैं उसकी कहानी-

20 हजार करोड़ रुपये के स्टैंप बेचने के आरोप थे करीम पर.
20 हजार करोड़ रुपये के स्टैंप बेचने के आरोप थे करीम पर.

90 के दशक में सबको तेजी से पैसा कमाने की लत थी. सबको शॉर्टकट की तलाश थी. महाराष्ट्र में अंडरवर्ल्ड का इतिहास तो सब ही जानते हैं. कैसे दौलत और शोहरत के चक्कर में तमाम लड़के अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे थे. उसी वक्त एक और आदमी था जो पैसे कमाने के लिए कई तिकड़म भिड़ाने में लगा था. नाम अब्दुल करीम तेलगी. पर उसका तरीका अंडरवर्ल्ड का नहीं, अंडर द टेबल वाला था. पैसे कमाने की लत उसे बचपन से ही लग गई थी. शौक से नहीं, मजबूरी में. करीम का जन्म 1961 में कर्नाटक के खानपुर में हुआ था. पिता रेलवे में कर्मचारी थे, मगर वो बहुत जल्दी गुजर गए. परिवार की जिम्मेदारी उस पर आ गई. उसने स्टेशन पर ठेला लगाकर फल बेचे, सब्जी बेची. किसी तरह इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. सउदी जाने का ट्रेंड चल रहा था सो वो भी निकल गया. पैसे कमाने की लत अब आदत बन चुकी थी. सात साल बाद लौटा तो पहुंचा मायानगरी के राज्य महाराष्ट्र. 1980 का वक्त था. उसने पहले फर्जी पासपोर्ट बनाने का काम शुरू किया. काम चलता रहा. 1991 में उसको मुंबई पुलिस ने इसी फर्जीवाड़े में गिरफ्तार किया. मगर ये जेल दौरा उसके लिए फायदेमंद साबित हुआ. एक साथी कैदी ने उसे बताया कि हर्षद मेहता शेयर घोटाले के बाद बाजार में स्टैंप की कमी हो गई है. तेलगी को कथित तौर पर जानकारी मिली कि लोग पुराने शेयर ट्रांसफर सर्टिफिकेट से रेवेन्यू स्टांप निकाल रहे हैं और उन्हें इस्तेमाल कर रहे हैं.

उसे आईडिया क्लिक कर गया. जेल से बाहर आते ही उसने स्टैंप पेपर बेचने का लाइसेंस लिया. पहले महाराष्ट्र में नेटवर्क फैलाया. बैंकों, बीमा कंपनियों और स्टाक ब्रोकरेज फर्मो को फर्जी स्टांप बेचने शुरू किए. इन विभागों के कई कर्मचारियों और अधिकारियों को भी उसने मक्खन पॉलिश लगाके और पैसे खिलाकर अपने पाले में कर लिया. धंधा सेट हुआ तो उसने इसका विस्तार शुरू किया. एक-एक कर करीब 16 राज्यों में उसने अपना नेटवर्क बना लिया. सब जगह उसके फर्जी स्टैंप धड़ल्ले से बिकने लगे. करोड़ों के वारे-न्यारे होने लगे.

एमबीए कर चुके लड़के नौकरी पर रखे

बताया जाता है कि तेलगी ने फर्जी स्टाम्प पेपर बेचने के कारोबार और पैसों का हिसाब रखने के लिए करीब 300 एमबीए कर चुके लड़कों को नौकरी पर रखा था. स्टैंप बेचने के लिए भी उसने अच्छी पढ़ाई करने वाले लड़कों को अपने गैंग में शामिल किया. ये लड़के वित्तीय संस्थानों और बड़े-बड़े निजी संगठनों से संपर्क कर उन्हें मोटे कमीशन का लालच देते थे. इससे आसानी से फर्जी स्टांप बिक जाते थे और काम बढ़ता गया.

300 से ज्यादा प्रफेसनल्स से काम करवाता था करीम.
300 से ज्यादा प्रोफेशनल्स से काम करवाता था करीम.

वहीं, फर्जी स्टैंप छापने के लिए तेलगी ने नासिक की सरकारी टकसाल से पुरानी और खारिज हो चुकी ‘मशीन’ नीलामी में खरीदी. इनसे स्टांप पेपर पर आसानी से सुरक्षा चिन्ह (सिक्योरिटी मार्क्स) छप जाते थे. नीलामी के दौरान इसे बेकार बताकर बेचा गया था, लेकिन असलियत में ऐसा था नहीं. तेलगी ने मशीन सबसे ज्यादा बोली लगाकर खरीदी थी. इसके बाद उसने स्टाम्प पेपर्स के पॉजीटिव प्राप्त किए जिनके जरिए प्रिंटिंग के लिए प्लेट बनती है. 10 रुपये का स्टाम्प पेपर हो या 1,000 का, छापने की तकनीक एक ही होती है इसलिए एक ही मशीन से करोड़ों रुपये मूल्य के स्टाम्प छापे गए. एक और गजब बात ये है कि ये कोई कभी नहीं जान पाया कि उसने वो फर्जी पेपर कहां छापे. किसी जांच एजेंसी को छपाई के अड्डे की जानकारी नहीं हो सकी.

फिर शुरू हुए बुरे दिन

1992 से 2002 के बीच तेलगी पर अकेले महाराष्ट्र में 12 मामले दर्ज किए गए. 15 और मामले देश के अन्य राज्यों में दर्ज किए गए. मगर उसकी सरकार, अधिकारियों और सिस्टम में ऐसी पैठ थी कि उसका धंधा चलता रहा. 2001 में जाकर कहीं उसकी गिरफ्तारी हो सकी. पूछताछ में उसने कई पुलिस अधिकारी और नेताओं के नाम लिए थे. जांच में सबसे दिलचस्प रूप से एक असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर दिलीप कामथ का नाम आया. मात्र 9000 रुपये सैलरी वाले इस शख्स की प्रॉपर्टी करीब 100 करोड़ रुपये की पाई गई थी. इसी तरह एक क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर वशिष्ट अंदाले की संपत्ति 50 करोड़ की पाई गई थी.

तेलगी की गिरफ्तारी 2001 में अजमेर से हुई थी.
तेलगी की गिरफ्तारी 2001 में अजमेर से हुई थी.

अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि तेलगी ने कैसे सिस्टम में अपनी पैठ बनाई थी. जांच एजेंसियों ने देशभर में तेलगी की 36 प्रॉपर्टीज का पता लगाया था. दिल्ली, मुंबई, बंगलुरु, चेन्नई और इंदौर जैसे करीब 18 बड़े शहरों में उसके 123 अकाउंट सामने आए थे. मामले में एक्टिविस्ट अन्ना हजारे की पीआईएल के बाद जांच तेज हुई थी और कई लोगों की गिरफ्तारियां हुई थीं. फिर भी कहा जाता है कि इस मामले में कई बड़े लोग बच निकले.

एक बार डांसर थी तेलगी की गर्लफ्रेंड

बार डांसर थी अब्दुल करीम की गर्लफ्रेंड.
बार डांसर थी अब्दुल करीम की गर्लफ्रेंड.

बताया जाता है कि मुंबई की फेमस बार गर्ल तरन्नुम खान तेलगी की गर्लफ्रेंड थी. तेलगी ने तरन्नुम का डांस देखते हुए एक रात में 93 लाख रुपये उड़ा दिए थे. तेलगी ने गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ में यह कबूल किया कि उसने दीपा बार में एक लड़की पर कई लाख रुपये उड़ा दिए थे. बार ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए कहा था- तेलगी यहां आया जरूर था, लेकिन उसने 93 लाख रुपये नहीं उड़ाए थे. हां यह जरूर है कि पैसे बहुत ज्यादा थे. कुछ लोग यह भी कहते हैं कि तेलगी की वजह से ही तरन्नुम कुछ ही दिनों में मुंबई की सबसे अमीर बार गर्ल बन गई थी.

कुछ महीने पहले फिर सुर्खियों में था तेलगी

डी रूपा ने ही लगाया था तेलगी को सुविधाएं देने का आरोप.
डी रूपा ने ही लगाया था तेलगी को सुविधाएं देने का आरोप.

बंगलुरु की डीआईजी (जेल) डी. रूपा ने जुलाई 2017 में एक खुलासा कर सनसनी फैला दी थी. कहा था कि जेल में तेलगी को स्पेशल ट्रीटमेंट दिया जाता है. रूपा ने कहा था कि तेलगी को मसाज के लिए तीन या चार लोग दिए जाते हैं. उसे और भी कई सुविधाएं जेल के अंदर दी जाती हैं.


ये लल्लनटॉप वीडियो देखें- 

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