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ये वीडियो उन तमाम लोगों के लिए जो छठ मनाने घर नहीं जा पाएंगे

छठ. बिहार, मिथिला, झारखंड और पूर्वांचल का बस एक त्यौहार नहीं है. वो भावना है  जिससे लोग भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं. हम देख सकते हैं कि छठ मनाने वाले लोग, जो अपने रोजी-रोटी के लिए परदेस में रहते हैं, वो किसी दूसरे किसी त्यौहार में घर जाएं न जाएं पर छठ में जरूर जाते हैं. चाहे ट्रेन में रिजर्वेशन हो या न हो. टीटी को फाइन दे देंगे, पर जाएंगे जरूर.

छठ में घर जाने के लिए बंदा ऑफिस में बॉस से भी लड़ लेता है. कुछ तो छुट्टी न मिलने पर जॉब छोड़कर भी छठ के लिए घर को निकल पड़ते हैं. चाहे वो दो पैसे कमाने वाला मजदूर तबका हो या चाहे बड़ी सैलरी वाला अफसर तबका. इसी भावना को एक वीडियो में समेटा है मिथिला मखान फेम नितिन नीरा चंद्रा ने इस वीडियो में. इस वीडियो में ‘क्रांति प्रकाश झा’ और ‘क्रिस्टीन जेडेक’ को फिल्माया गया है. भाग-दौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास त्यौहार मनाने का भी समय नहीं रहता है. ऐसे में ये वीडियो अपने सोसाइटी के लिए एक मैसेज की तरह है.

वीडियो  का नाम है ‘पहिले पहिल हम कईनी’.

इस वीडियो में एक कपल को दिखाया गया है. जो कि विदेश में रहते हैं. सुबह का ब्रेक-फास्ट कर रहे हैं. तभी घर से लड़के की मां का फोन आता है. पहले मां  पूछती है “का हाल बा बेटा.”
लड़का- “हां हम ठीक बानी.. बाबूजी कईसन बाड़े.”
मां- “बाबूजी ठीक बाड़े.. तू अप्पन टिकट कैंसिल करा ल.”
लड़का- “हम ता दिवाली के बाद छठ खातिर पटना आवे के सोचने रहनी.”
मां- “शायद हम अई साल छठ न करब..तोहार बाबूजी मना क र तारन, उनकर अर्थराइटिस न बढ़ गईल बा.”
लड़के की वाइफ- “कौन है..”
लड़का- “मां..”
वाइफ- “प्रणाम मां..”
मां- “खुश रहो बेटा..कईसी हो”
वाइफ- “बिलकुल ठीक..आप कैसी हैं मां..”
मां- “हम भी ठीक हैं बेटा..”
लड़का- “पर मां के करता छठ अहि बार..”
मां- “अब कहां हमनी खानदान में कियो छठ करता..”
लड़का- “काहे मां.. ई त लेकिन ब..ब..बहुत..”
मां- “राजू चाचा का पतोह भी अब छठ न करेले… रुचिका भी काम काज करे वाला लड़की बाड़ी..उहो का सोची कि हमार सास पुराना सोच थोप रहल बाड़ी.
ओकर त संस्कृति भी अलग बा बेचारी के. इंग्लिश मीडियम में पढ़े वाला लड़की सब कहां छठ करिहं सं हो..”
लड़का- “अच्छा..ठीक बा मां.फेर हम नया साल पर घर आयब..अभी रखा तानी, ऑफिस जाए में देर होता..”
मां- “ठीक बा बेटा..खुश रहा.”
लड़का- “प्रणाम.”

फोन पर बात खत्म हुई. फिर लड़के की वाइफ, लड़के से पूछती है “मां क्या कह रही थीं ?”
लड़का- “इस बार घर में कोई छठ नहीं करेगा. नन ऑफ माय कजन डू एंड इट्स वैरी सैड. आई हैव वैरी फाउंड एवरी इयर ऑफ छठ. घाट पर जाना. सब साथ में रहते थे. इकट्ठा रहते थे. मां कह रही थी इस बार यह ट्रेडिशन खत्म हो जाएगा. क्योंकि छठ करने वाला कोई नहीं है.
वाइफ- “बट, शी वॉज से समथिंग अबाउट मी ना.”
लड़का- “शी डज नॉट वांट टू इम्पोज हर बीलिव ऑन यू, सो.. चलता हूं. ऑफिस के लिए देर हो रही है. सीयू!”

इसके बाद से लड़के की वाइफ पूरे दिन इसके बारे में सोचती रहती है. फिर छठ के दिन लड़का देखता है कि उसकी वाइफ छठ-पूजा की तैयारी कर रही है. बैकग्राउंड में शारदा सिन्हा के छठ वाले गाने बज रहे होते हैं. और वाइफ लड़के के पास आकर कहती है कि, “मैं छठ कर रही हूं, घर की परंपरा खत्म न होएं.”

दोनों मिलकर छठ पूजा के लिए पकवान बनाने लगते हैं. वाइफ पूरे पारंपरिक तरीके से साड़ी पहनी होती है.

एक झलक शारदा सिन्हा की है. वो स्टूडियो में गाना गा रही हैं. वो गाना जो छठ-घाटों की रौनक है “हे छठी मैया”. और यही गाना बैकग्राउंड में बजने लगता है. और दोनों पति-पत्नी घाट पर अरग दे रहे होते हैं. सबकुछ बहुत ही सुखद और भावनात्मक है.

पहिले पहिल हम कईनी, छठी मईया व्रत तोहर.
करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार.
सब के बलकवा के दिहा, छठी मईया ममता-दुलार.
पिया के सनईहा बनईहा, मईया दिहा सुख-सार.
नारियल-केरवा घोउदवा, साजल नदिया किनार.
सुनिहा अरज छठी मईया, बढ़े कुल-परिवार.
घाट सजेवली मनोहर, मईया तोरा भगती अपार.
लिहिएं अरग हे मईया, दिहीं आशीष हजार.
पहिले पहिल हम कईनी, छठी मईया व्रत तोहर.
करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार.

आप भी देखिए इस वीडियो को.

ये वीडियो उन लोगों के लिए भी एक मैसेज है जो ये सोचते हैं, ‘अरे छठ तो बिहार का फेस्टिवल है. पुराना जो गांव में लोग मनाते हैं. वैसे मॉर्डन तो होली-दिवाली का फेस्टिवल भी नहीं है. पर लोग मनाते हैं. वो भी बड़ी धूम-धाम से. छठ पूजा में दो अरग होते हैं. एक सांझ (शाम) वाला और दूसरा भोर (सुबह) वाला. इसमें भगवान सूर्य की पूजा होती है. पता, छठ एकमात्र ऐसा त्यौहार है जिसे लोग नदी या तालाब के किनारे इकट्ठा होकर मनाते हैं.

साल 2015 की छठ पूजा का इमोशनल वीडियो 

इसी तरह का एक वीडियो पिछले साल छठ पूजा पर आया था. उस गाने में मेट्रो में जॉब करता एक लड़का छठ पर बहन का मैसेज देख, न जाते-जाते घर निकल जाता है.

ये है वो वीडियो

ये छठ पर बजने वाले फेमस गीत हैं. आप भी सुनिए.

1. शारदा सिन्हा- हो दीनानाथ

2. शारदा सिन्हा-  केलवा के पात पर 

3. अनुराधा पौडवाल- मार बो रे सुगवा

4. अनुराधा पौडवाल- उगा हो सूरूज देव


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ये स्टोरी आदित्य प्रकाश ने लिखी है.


वीडियो देखें:

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