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चीन का कोरोनावायरस सांप से आया है या चमगादड़ से?

बिहार के छपरा की एक लड़की चीन से लौटी. बीमारी के कुछ लक्षण दिखाई दिए. उसे फौरन पटना स्थित पटना मेडिकल कॉलेज ले जाया गया. जयपुर के एक लड़के के साथ भी ऐसा ही हुआ.

ऐसे केसेस को लगातार निगरानी में रखा जा रहा है. और इनके ब्लड सेंपल्स पुणे स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी भेजे गए हैं.

इतनी सावधानी की वजह है पिछले दो महीनों से खबरों में बना हुआ चीन का कोरोनावायरस. जो अब सिर्फ चीन में न होकर दुनिया के बाकी हिस्सों में भी फैल रहा है.

चाइना से निकलकर इन देशों में फैल चुका है कोरोनावायरस. (सोर्स - CDC)
चाइना से निकलकर बहुत से देशों में फैल चुका है कोरोनावायरस. (सोर्स – CDC)

इस आर्टिकल का मकसद है कि आपके दिमाग में कोरोनावायरस की एक साफ तस्वीर बन जाए.

वुहान से निकला 2019-nCoV

शुरुआत करते है इसके नाम से. चीन के वुहान शहर से निकलने के कारण इसे वुहान वायरस भी कहा जा रहा है. लेकिन साइंस के सर्किल में इसकी पहचान 2019-nCoV से है. 2019-nCoV का फुल-फॉर्म है – 2019-novel coronavirus. इसे समझने के लिए इसके नाम को तोड़कर एक-एक चीज़ समझनी होगी. पीछे से तोड़ना चालू करते हैं. वायरस से.

वायरस क्या बला है?

हमारे आसपास बहुत सारे कीटाणु टहल रहे हैं. इनमें से सबसे खुरापाती होते हैं वायरस. वायरस स्कूल का वो बच्चा है जो कभी अपना टिफिन नहीं लाता. क्या मतलब?

मतलब ये कि हमारा शरीर बहुत सारे सेल्स यानी कोशिकाओं से मिलकर बना है. ये सेल्स अपना खाना खुद बनाते हैं. वायरस अपना खाना नहीं बनाते. उन्हें जैसे ही किसी सेल का चूल्हा जलता दिखता है, वो अटैक कर देते हैं. अटैक करने के बाद वायरस सेल्स से एनर्जी खींचते हैं और अपने जैसे दूसरे वायरस पैदा करते हैं. और इस तरह ये फैलने लगते हैं.

ये राइनोवायरस है. इसी से ज़ुकाम होता है. (सोर्स - विकिमीडिया)
ये राइनोवायरस है. इसी से ज़ुकाम होता है. (सोर्स – विकिमीडिया)

इनके फैलने की रफ्तार बहुत तेज़ होती है. इतनी तेज़ कि ये अपने आप में फैलने का एक पैमाना बन चुकी है. अगर कोई चीज़ तेज़ी से फैलती है तो हम कहते हैं कि ये वायरल हो गई.

कोरोनावायरस क्या होता है?

कोरोनावायरस कोई एक वायरस नहीं. ये वायरस के एक समूह का नाम है. और इस समूह की खासियत है इसके वायरस की बनावट.

कोरोना अंग्रेज़ी के ‘क्राउन’ से आया है. क्राउन मतलब ताज. इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से देखने पर ये वायरस रेशेनुमा आकृतियों (प्रोटीन) से घिरे दिखते हैं. जैसे कोई ताज पहना हो. इसलिए वायरस की इस फैमिली का नाम पड़ा – कोरोनावायरस. सूरज से प्लाज़्मा निकलने के कारण बने बाहरी इलाके को भी कोरोना कहते हैं.

ये जो हरा-हरा दिख रहा है, यही ताज है. (सोर्स - नेचर)
ये जो हरा-हरा दिख रहा है, यही ताज है. (सोर्स – नेचर)

कोरोनावायस बहुत बड़ी फैमिली है. इसके ज़्यादातर केस जानवरों में ही देखे गए हैं. जैसे कि बिल्ली, चमगादड़ और ऊंट. इंसानों तक कोरोनावायरस फैमिली की बहुत कम पहुंच है. ज़्यादातर केस में ये इंसानों तक पहुंचते भी हैं, तो बस हल्का सा ज़ुकाम देकर निकल लेते हैं. अब तक इंसानों तक गिनती के सात कोरोनावायरस पहुंच पाए हैं –

1. HCoV-229E
2. HCoV-OC43
3. SARS-CoV
4. HCoV-NL63
5. Human coronavirus HKU1
6. MERS-CoV
7. 2019-nCoV

(HCoV का फुल-फॉर्म है – ह्यूमन कोरोनावायरस)

ये जो लाल रंग में SARS और MERS हैं, इनको बाद में अच्छे से देखेंगे. अभी 2019-nCoV की बात करते हैं.

2019-नोवेल कोरोनावायरस क्या है?

ये 2019-nCoV ही वो कोरोनावायरस है जिसने हड़कंप मचा रखा है. 2019 तो समझ ही गए होंगे. पहला केस दिसंबर 2019 में सामने आया. इसलिए इसकी पहचान के लिए शुरू में 2019 जोड़ा गया है.

नोवेल मतलब नया. 2019-nCoV कोरोनावायरस फैमिली का सबसे नया सदस्य है. इसलिए इसके साथ नोवेल शब्द जुड़ा है.

कैसे पहचानें?

होता क्या है कि जैसे ही वायरस हमारे शरीर में घुसता है, हमारा शरीर लड़ाई लड़ता है. जैसे कि इन्हें मुंह और गले से बाहर निकालने के लिए खांसी आती है. नाक से बाहर निकालने के लिए छींक आती है. ये वायरस सांस नली से होता हुआ अंदर की तरफ जाता है. इसलिए हमारी सांस नली में बहुत तकलीफ होती है.

छींकते व्यक्ति की छींक में भी वायरस होता है. (सोर्स - विकिमीडिया)
छींकते व्यक्ति की छींक में भी वायरस होता है. (सोर्स – विकिमीडिया)

हमारे शरीर के अंदर लड़ी जाने वाली लड़ाई ही वायरस के घुसने के लक्षण हैं. और ये लक्षण किसी आम ज़ुकाम के वायरस जैसे ही हैं. (जिन्हें नहीं पता उन्हें बता दें, ज़ुकाम वायरस घुसने के कारण ही होता है.)

ज़्यादातर वायरस ज़ुकाम देकर निकल लेते हैं. निकल क्या लेते हैं, हमारा शरीर उन्हें निकाल फेंकता है. लेकिन कुछ वायरस गर्म खोपड़ी के होते हैं. जैसे कि SARS और MERS. (और अब 2019-nCov भी)

कोरोनावायरस के शुरुआती लक्षण किसी आम वायरस के जैसे ही हैं,

बुखार
सूखी खांसी
मांसपेशियों में दर्द
सांस लेने में तकलीफ

कोरोनावायरस से पीड़ित मरीज़. (सोर्स - रॉयटर्स)
कोरोनावायरस से पीड़ित मरीज़. (सोर्स – रॉयटर्स)

जैसे-जैसे ये वायरस अंदर फैलते हैं, शरीर को न्युमोनिया जकड़ लेता है. न्युमोनिया मतलब हमारे एक या दोनों फेफड़ों तक इन्फेक्शन पहुंच जाना. इस स्टेज पर फेफड़ों के X-ray से इसे पहचाना जा सकता है. अब तक कोरोनावायरस के जिन 41 मरीज़ों की स्टडी की गई है, उन सभी को न्युमोनिया था.

ये नया कोरोनावायरस आया कहां से?

जैसा कि पहले बताया – कोरोनावायरस जानवरों के बीच रहने के लिए जाने जाते हैं. बहुत चांस हैं कि ये जानवरों से इंसानों तक पहुंचे हैं.

इस वायरस के शुरुआती शिकार वही लोग थे, जो वुहान के सीफूड (समुद्री भोजन) और एनिमल मार्केट(पशु बाज़ार) होकर आए थे. इसलिए शुरुआत में ऐसा समझा गया कि ये कोरोनावायरस यहीं से आया है.

इससे पहले के दो कोरोनावायरस SARS और MERS चमगादड़ों से निकले थे. इसलिए चमगादड़ों को भी इस कोरोनावायरस का सोर्स कहा गया.

लेकिन बाद में रीसर्चर्स ने 2019-nCoV के जेनेटिक सीक्वेंस की पढ़ाई की. और इसकी तुलना जानवरों में पाए जाने वाले 200 से ज़्यादा कोरोनावायरसों के जेनेटिक सीक्वेंस से की गई. और इस स्टडी के नतीजे जर्नल ऑफ वायरोलॉजी में छापे गए. इस स्टडी से ये पता चलता है कि 2019-nCoV सापों से निकला है. हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स ने इस स्टडी पर सवाल भी उठाए हैं.

चमगादड़ और सांप. (सोर्स - विकिमीडिया)
चमगादड़ और सांप. (सोर्स – विकिमीडिया)

पहले ऐसा समझा गया था कि ये वायरस सिर्फ जानवरों से ही इंसानों तक पहुंच रहे हैं. बाद में इसके इंसान से इंसान तक फैलने के केस भी सामने आए. और ये बात इसे और खतरनाक बना देती है.

इतिहास से क्या सीखें?

खतरनाक कोरोनावायरस की लिस्ट में दो और नाम हैं – SARS और MERS. इनकी डीटेल्स जान लीजिए.

SARS – Severe Acute Respiratory Syndrome

SARS का पहला केस साल 2002 में सामने आया.
कहां से आया – चीन के गुआंगडोंग प्रोविंस से.
कितने लोगों में फैला – 8000 से ज़्यादा
कितने लोगों की जान गई – 750 से ज़्यादा
कैसे फैला – ये कोरोनावायरस भी जानवरों से इंसानों तक पहुंचा. पक्का तो मालूम नहीं, लेकिन अंदाज़ा ये है कि ये चमगादड़ों से बिल्लियों में पहुंचा और वहां से इंसानों में. बाद में मुख्य रूप से ये इंसानों से इंसानों में फैला.

ये SARS की ग्राफिक इमेज है. (सोर्स - विकिमीडिया)
ये SARS वायरस की ग्राफिक इमेज है. (सोर्स – विकिमीडिया)

MERS – Middle East Respiratory Syndrome

MERS का पहला केस साल 2012 में सामने आया.
कहां से आया – सऊदी अरब से (इसलिए मिडल-ईस्ट के ऊपर नाम पड़ा)
कितने लोगों में फैला – 2000 से ज़्यादा
कितने लोगों की जान गई – 666 से ज़्यादा
कैसे फैला – रीसर्चर्स ने सऊदी अरब के सबसे पहले मरीज़ के घर के पास जाकर रीसर्च की. उन्हें इस घर से करीब सात मील दूर कुछ चमगादड़ों में भी यही वायरस मिला. और ऐसा समझा गया कि ये MERS चमगादड़ों से ही आया था.

इस नए कोरोनावायरस से कैसे बचें?

बैक्टीरिया को मारने के लिए एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल होता है. और वायरस को मारने के लिए एंटीवायरल का. अब तक हम 2019-nCoV को मारने वाला एंटीवायरल नहीं बना पाए हैं. इसलिए इससे बचने का इकलौता तरीका है कि इससे दूर रहें. दूरी के लिए WHO की गाइडलाइन्स देख ली जाएं –

साबुन और पानी से हांथ धोते रहें. एल्कोहल बेस्ड हैंड क्लीनर का इस्तेमाल करें.

खांसते और छींकते वक्त अपना मुंह और नाक ढंक कर रखें.

ज़ुकाम जैसे लक्षण दिखाते व्यक्ति से पर्याप्त दूरी बनाए रखें.

मांस और अंडे को खूब पकाकर खाएं.

पालतू या अन्य जानवरों से सीधे संपर्क में न आएं.


वीडियो – चीन में 9 लोगों की जान ले चुका है कोरोना वायरस जिसकी दवाई भी नहीं

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