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IMPACT FEATURE: संजय मिश्रा बोले- MX Player ओरिजिनल 'रनअवे लुगाई' में दिखेगा बाप-बेटे का एक मज़ेदार रिश्ता

हुनर किसी भी चीज़ का मोहताज़ नहीं होता. इसकी जीती जागती मिसाल हैं जाने-माने बॉलीवुड अभिनेता संजय मिश्रा. संजय मिश्रा के फ़िल्मी करिअर पर अगर नज़र डालें तो पाएंगे कि वो काफी लम्बे समय से दर्शकों का मनोरंजन करते आ रहे हैं.

साल 2018 में आयी फिल्म ‘कामयाब’ में उनका उम्दा प्रदर्शन हम सभी ने देखा था. इस फिल्म में संजय ने अपनी बेहतरीन एक्टिंग से इंडस्ट्री के उन  कलाकारों का दर्द बयां किया जो टैलेंटेड होने के बावजूद अपने नाम से नहीं, बल्कि साइड ऐक्टर्स के नाम से में पहचाने जाते हैं. ऐसे ही कई शानदार फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुक संजय एक बार फिर दर्शकों को हंसाने आ रहे हैं.  MX Player की नई सीरीज़ ‘रनअवे लुगाई’ में वो विधायक नरेंद्र सिन्हा के रूप में दिखेंगे. उनके अलावा इस सीरीज़ में नवीन कस्तूरिया, रुही सिंह,रवि किशन, आर्य बब्बर और पंकज झा भी प्रमुख भूमिकाओं में नज़र आएंगे.

जब रन अवे हुई लुगाई 

कहते हैं कि शादी का लड्डू जो खाये वो पछताए और जो ना खाये वो भी पछताए. लेकिन ये लड्डू किसी को कितना भारी पड़ सकता है, ये आपको ‘रनअवे लुगाई’  में देखने को मिलेगा. कहानी का मुख्य किरदार है रजनीकांत सिंहा उर्फ़ रजनी (नवीन कस्तूरिया), जो विधायक नरेंद्र सिन्हा (संजय मिश्रा) का बेटा है. बचपन से जवानी तक रजनी अपनी लाइफ में कुछ खास प्राप्त नहीं कर पाता है और अपने पिता के कहने पर ही सारे काम करता है. रजनी की ज़िन्दगी में असली उथल-पुथल तब होती है जब वो एक बोल्ड लड़की बुलबुल (रूही सिंह) से शादी कर लेता है. शादीशुदा ज़िन्दगी का सुख उसकी ज़िन्दगी में ज़्यादा दिन नहीं टिक पाता है. बुलबुल घर से भाग जाती है. और फिर शुरू होता है उसे ढूंढ कर वापस लाने का सिलसिला. रजनी के पिता नरेंद्र सिन्हा एक महीने के अंदर बुलबुल को घर वापस लाने की प्रतिज्ञा ले लेते हैं. हमने संजय मिश्रा से ‘रनअवे लुगाई’ और उनके कैरेक्टर नरेंद्र सिन्हा के बारे में कुछ सवाल किये. प्रस्तुत हैं उनसे हमारी ख़ास बातचीत के कुछ अंश.

रनअवे लुगाईमें आप एक डॉमिनेटिंग पिता का किरदार निभा रहे हैं. असल ज़िन्दगी में आप किस तरह के पिता हैं?

असल ज़िन्दगी में मैं एक डॉमिनेटिंग पिता नहीं हूँ. लेकिन कुछ मामलों में मैं बच्चों को नसीहत ज़रूर करता हूँ. आज मेरे बच्चे उम्र के उस पड़ाव पर हैं, जहां मैं चाहता हूँ कि वो अच्छा खाएं, ना कि केवल जंक फूड की ओर भागें. ताकिअच्छे खान- पान से उनकी उम्र लम्बी हो और वो स्वस्थ रहें. कई बार मैं उनको इंडियन और वेस्टर्न क्लासिकल म्यूज़िक सुनने के लिए भी कहता हूँ, जो लम्बे समय से अभी तक बरकरार है और आगे भी रहेगा. मेरा मानना है कि असल ज़िन्दगी में मैं ‘रनअवे लुगाई’ से बिल्कुल अलग पिता हूँ.

आजकल फिल्मों और शोज़ में बापबेटे के रिश्ते को पहले के मुकाबले काफी अलग तरह से दिखाया जाता है. आप इस बदलाव को किस तरह देखते हैं?  

रामायण में जब एक पिता अपने बेटे को कहता है कि तुम 14 सालों के लिए वनवास चले जाओ तो बेटा चला जाता है. लेकिन क्या आज की डेट में आप ये उम्मीद करेंगे?  वक़्त सारे रिश्तों को खुद ही बदलता रहता है. पहले तलाक़ के केस भी बहुत कम होते थे. आपस में पति-पत्नी की नहीं भी बनती थी, तब भी वो किसी तरह साथ रहते थे. वहीं पहले किसी के घर कोई गुज़र जाता था, तो वहाँ ज़रूर जाते थे. लेकिन अब लोग सिर्फ फेसबुक या व्हाट्सऐप पर RIP लिख देते हैं. सभी रिश्ते समय के साथ बदले हैं, जिसका असर फिल्मों में भी दिखता है, क्यूंकि सिनेमा समाज का एक दर्पण ही है.

क्या आपको लगता है कि रिश्तों में इस तरह का बदलाव सही है?

इसमें सही और गलत का फैसला नहीं किया जा सकता, क्योंकि ये एक सामाजिक बदलाव है. हमें इस बदलाव के साथ आगे बढ़ना ही पड़ता है, क्यूंकि हर तरफ ऐसा ही हो रहा है. आज से 25 साल पहले तक हर रिश्ते की अपनी एक अलग एहमियत थी, लोग मिल-जुल कर रहते थे. लेकिन आज कल सब बस फ़ोन से रिश्ते निभा रहे हैं. मैंने भी खुद को आज के समय के मुताबिक ढाल लिया है और अपनी दोनों बेटियों के हिसाब से चीज़ों को समझना शुरू कर दिया है.

रनअवे लुगाईमें आपके और नवीन कस्तूरिया के बीच का रिश्ता काफी अलग है. उसके बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?

देखिये, वो रिश्ता अलग है, इसी लिए दिखा रहे हैं. अगर कोई नार्मल रिश्ता होता तो क्यों दिखाते? अलग में ही मज़ा है. हाँ, मैं इतना ज़रूर कह सकता हूँ कि ये बाप- बेटे के रिश्ते की एक ऐसी कहानी है, जो दर्शकों को पसंद आएगी.

आज तक आपने पिता के रूप में जितने भी किरदार निभाए हैं, उसमें से आपका फेवरेट कौन सा है?

पिता के रूप में आज तक मैंने जितने रोल्ज़ किये हैं, उनमें से मुझे ‘दम लगा के हईशा’ का अपना किरदार बहुत पसंद है. ‘आंखों देखी’ में भी पिता का कैरेक्टर काफी अच्छा है, जहाँ बेटी के साथ पिता का एक अलग ही रिश्ता है.


 

Note: ये स्टोरी प्रायोजित है.


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