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यह देश कोरोना के कर्व को फ्लैट नहीं खत्म करने की ओर बढ़ चुका है

एक प्रधानमंत्री हैं. रात को अपने बिस्तर पर लेटी हैं. घर के कपड़ों में, स्वेटर पहने. फेसबुक लाइव कर रही हैं. देश में कोरोना के कारण लॉकडाउन है. लोगों के दिमाग में सौ सवाल आ रहे हैं. तो वो लोगों से कह रही हैं कि आप सवाल पूछिए. मैं जवाब दूंगी. वो हंसते-मुस्कुराते हुए लोगों को हिम्मत बंधा रही हैं. सरकार क्या कुछ कर रही है, ये बता रही हैं. हज़ारों लोग देख रहे हैं. दिल बना रहे हैं. लिख रहे हैं कि ऐसा लग रहा है, रात को मां थपकी देकर सुला रही हो.

New Zealand Pm Jacinda Ardern Fb Live
फेसबुक लाइव करती हुई न्यू ज़ीलैंड की पीएम जसिंडा ऐडर्न (फोटो: फेसबुक स्क्रीनशॉट)

ये प्रधानमंत्री हैं न्यू ज़ीलैंड की जसिंडा ऐडर्न. जो कोरोना के आगे भी ऐसी लीडरशिप दिखा रही हैं कि दुनियाभर के नेताओं को उनसे ट्यूशन लेनी चाहिए. विशेषज्ञ कह रहे हैं कि न्यू ज़ीलैंड अपने यहां से कोरोना को पूरी तरह साफ करने की तरफ बढ़ रहा है. जसिंडा ऐडर्न ने ऐसा क्या किया कि उनकी इतनी तारीफ़ हो रही है? आज यही बता रहे हैं हम आपको.

दुनिया का सबसे बड़ा महासागर है प्रशांत. अंग्रेज़ी में इसका नाम है, पसिफिक ओशन. इसके दक्षिणी हिस्से में पड़ता है एक छोटा सा द्वीपीय देश- न्यू ज़ीलैंड. 50 लाख से भी कम आबादी. शिक्षा, स्वास्थ्य, नागरिक अधिकार जैसे मामलों में दुनिया के सबसे अच्छे मुल्कों में है ये. अक्टूबर 2017 में यहां की प्रधानमंत्री बनीं जसिंडा ऐडर्न. जसिंडा का नाम सुर्खियों में आया मार्च 2019 के क्राइस्टचर्च आतंकी हमले के बाद. जिस तरह से जसिंडा ने इस मामले को हैंडल किया, दुनियाभर की मीडिया उनकी तारीफ़ों से पट गई. अब यही इंटरनैशनल मीडिया एक बार फिर जसिंडा के लिए तालियां बजा रही है. वजह, न्यू ज़ीलैंड सरकार का कोरोना से निपटने का तरीका.

Google Maps New Zealand
दुनिया के नक़्शे पर न्यू ज़ीलैंड (फोटो: गूगल मैप्स)

26 फरवरी. एक बुजुर्ग महिला बाली होते हुए ईरान से ऑकलैंड आईं. महिला बीमार थीं. परिवार के लोग उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे. 28 फरवरी को पता चला, महिला को कोरोना है. न्यू ज़ीलैंड ने ईरान और चीन पर यात्रा प्रतिबंध लगा दिया. इसके बाद के दिनों में कोई भी विदेश से आता, तो उसे 14 दिन घर में क्वारंटीन रहने को कहा जाता. 19 मार्च को न्यू ज़ीलैंड ने किसी भी विदेशी के अपने यहां आने पर रोक लगा दी. इस वक़्त यहां कोरोना के कुल केस थे 28.

Air New Zealand
एयर न्यू ज़ीलैंड का विमान (फोटो: रॉयटर्स)

21 मार्च. प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन आया. उन्होंने बताया, कोरोना का कितना ख़तरा है देश पर, ये बताने के लिए एक अलर्ट सिस्टम लाया गया है. इसमें चार स्तर होंगे. चौथे स्तर का मतलब, एकदम लाल झंडा. पूरा देश लॉकडाउन. सरकारी वेबसाइट पर एक पेज बनाया गया. जो लोगों को बताता कि अभी जोखिम किस लेवल पर है. किस लेवल में क्या करना चाहिए. किस लेवल पर क्या करना होगा.

New Zealand Alert Level
सरकारी वेबसाइट और अलर्ट सिस्टम (फोटो: covid19.govt.nz)

लोगों को सही समय पर चेतावनियां मिल रही थीं. उनको बताया जा रहा था कि आने वाले दिनों में क्या हो सकता है. सरकार की तरफ से पूरी पारदर्शिता. सरकार इटली, स्पेन, अमेरिका जैसे देशों पर भी करीबी नज़र रख रही थी. ताकि पता चले, क्या करना है. क्या नहीं करना है. इस वक़्त तक विदेश से आए लोगों में ही कोरोना मिला था. विचार हुआ कि कार्रवाई करने का अभी ही सही समय है. आगे कम्यूनिटी स्तर पर संक्रमण फैला, तो बड़ी देर हो जाएगी. जब सख़्त कदम उठाने ही हैं, तो हालात बेकाबू होने का इंतज़ार क्यों करें.

23 मार्च को प्रधानमंत्री फिर आईं देश के आगे. कहा, अभी हमारे यहां कोरोना के कुल 102 केस हैं. सो क्या? कभी इटली में भी इतने ही लोग संक्रमित थे. जेंसिडा ने कहा, हमारा लेवल 4 आ गया है. पूरा लॉकडाउन होगा. उन्होंने लोगों को 48 घंटे का समय दिया. कहा, इतने टाइम में ज़रूरी तैयारियां कर लीजिए.

New Zealand Pm Jacinda Ardern
देश को संबोधित करती हुई पीएम जसिंडा ऐडर्न (फोटो: रॉयटर्स)

ज़रूरी तैयारियां जैसे राशन का सामान खरीदना. लोगों के पास 48 घंटे का समय था इन सब चीजों के लिए. ज़्यादातर लोगों ने अनुशासन दिखाया. अलर्ट लेवल 4 के मुताबिक बताई गई सावधानियां बरतीं. दुकानों के बाहर एक-दूसरे से साढ़े छह फीट की दूरी बनाकर लाइन में खड़े दिखे लोग. एक बार में एक ही आदमी अंदर जाता. वो निकलता, तो दूसरा जाता. 25 मार्च की आधी रात से न्यू ज़ीलैंड में कोरोना लॉकडाउन शुरू हो गया. इस दिन तक करीब 205 मामले हो गए थे कोरोना के. अगले चार हफ़्तों तक लोगों को घर पर रहना था. चार हफ़्ते, मतलब 14-14 दिन के दो आइसोलेशन साइकल. लोग सावधानी बरतते हुए, सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन करते हुए ज़रूरी सामान खरीदने दुकान जा सकते थे. अपने घर के अगल-बगल में थोड़ा टाइम टहल सकते थे.

Newzeland

आज तारीख़ है 9 अप्रैल. न्यू ज़ीलैंड के लॉकडाउन को 15 दिन हो चुके हैं. संक्रमण की संख्या है एक हज़ार दो सौ उनचालीस. 317 लोग चंगे हो गए हैं. अब तक एक की मौत हुई है. अब तक सबसे ज़्यादा 146 नए केस 28 मार्च को सामने आए थे. इसके बाद से नए मामलों की संख्या घट रही है. पिछले तीन-चार दिनों का रेकॉर्ड देखिए. 6 अप्रैल को 67 नए केस. 7 अप्रैल को 54 केस. 8 अप्रैल को 50 नए केस. 9 अप्रैल की दोपहर तक 29 नए केस आए. ग्राफ नीचे की तरफ जा रहा है. वो भी लॉकडाउन के 15 दिनों के भीतर. दुनिया कोरोना के कर्व को फ्लैटन करने के लिए संघर्ष कर रही है. और न्यू ज़ीलैंड का टारगेट है कोरोना को ख़त्म करना. विशेषज्ञ कह रहे हैं, न्यू ज़ीलैंड इसी राह बढ़ता दिख रहा है.

Corona Cases In New Zealand
न्यू ज़ीलैंड सरकार का आधिकारिक आंकड़ा (फोटो: health.govt.nz)

कोरोना के कारण बदहाल देशों की दो कैटगरी है. एक- इटली, स्पेन, ब्रिटेन, अमेरिका जैसे देश. दूसरी कैटगरी- इक्वाडोर जैसे अफ्रीकी देश. पहली कैटगरी के देशों के पास संसाधन थे. मगर उनकी लीडरशिप ने दूरदर्शिता नहीं दिखाई. दूसरे देशों की मिसालों से भी नहीं सीखा. ब्रिटेन में बोरिस जॉनसन और अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप. ये तो शुरू में एकदम गंभीर नहीं थे. ट्रंप कह रहे थे, चमत्कार होगा और कोरोना चला जाएगा. बोरिस कह रहे थे, मैं तो कोरोना पेशेंट्स के साथ हाथ मिलाकर आया. दूसरी कैटगरी में वो देश हैं, जो इतने गरीब हैं कि संसाधन ही नहीं उनके पास.

Lockdown New Zealand
कोरोना काल में लॉकडाउन न्यू ज़ीलैंड (फोटो: रॉयटर्स)

पहली कैटगरी में दुनिया के सबसे नामी-गिरामी मुल्क हैं. अमेरिका, यूरोप. जसिंडा ऐडर्न इन सबके लिए मिसाल हैं. न केवल बिना समय गंवाए ज़रूरी कदम उठाए. बल्कि पूरी पारदर्शिता बरती. जनता को लगातार अपडेट करती रहीं. अनाउंसमेंट करने आती हैं, तो ये नहीं कि मेसेज रेकॉर्ड करके चला दिया. मीडिया के सवालों का जवाब देती हैं. सोशल मीडिया पर लोगों के सवालों का जवाब देती हैं. जहां सख़्ती दिखानी है, दिखा रही हैं. जैसे, उनके स्वास्थ्य मंत्री ने मूर्खता की. समंदर किनारे परिवार लेकर छुट्टी मनाने पहुंच गए. सार्वजनिक तौर पर उनकी क्लास ली जसिंडा ने. कहा, आपदा में कामकाज प्रभावित होने वाली आशंका न होती तो निकाल दिया होता उन्हें.

ये जसिंडा का इकलौता रूप नहीं है. वो मुस्कुराती हैं खूब. ताकि लोगों को हौसला मिले. अभी पता है उन्होंने क्या किया. लॉकडाउन में डॉक्टर, पुलिस की तरह ‘ईस्टर बनी’ और ‘टूथ फेयरी’ को भी इसेंशियल वर्कर्स’ की कैटगरी में जोड़ दिया है. 12 अप्रैल को ईस्टर है. ईसा मसीह के मरकर जी उठने की याद में मनाया जाता है ये. इसी से जुड़ा है, ईस्टर बनी. एक काल्पनिक खरगोश, जो सैंटा क्लॉज़ की तरह बच्चों के लिए तोहफे लाता है. ‘टूथ फेयरी’ समझिए कि परी है एक कहानियों की. बच्चों से कहते हैं कि वो अपने टूटे दांत तकिये के नीचे छुपा दें. परी आएगी और दांत के बदले तोहफ़ा रखकर जाएगी.

जसिंडा ऐडर्न ने इन दोनों को एसेंशियल कर्मचारियों की श्रेणी में रखा. ताकि घरों में बंद बच्चों और उनके मां-बाप के जीवन में कुछ उत्साह आए. वो ड्रॉइंग वाली बुक होती है न. जिसमें बने चित्रों में बच्चे रंग भरते हैं. ऐसी तस्वीरें अपने फेसबुक पर डाल रही हैं जसिंडा. ये पर्सनल टच बनाने की कोशिश है. कि प्रधानमंत्री से कनेक्ट हों लोग, उसपर भरोसा करें. मन भी हल्का हो थोड़ा लोगों का. कोरोना से निपटने के बाद अर्थव्यवस्था को फिर से मज़बूत करने की चुनौती आएगी. फिलहाल तो अच्छी और प्रभावी लीडरशिप के टेस्ट में डिस्टिंक्शन से पास होती दिख रही हैं जसिंडा ऐडर्न. वहां की राजनैतिक पार्टियां भी एकजुटता दिखा रही हैं. सरकार की आलोचना करने की जगह उसका हाथ बंटा रही हैं.

New Zealand Prime Minister Jacinda Arder
न्यू ज़ीलैंड की पीएम जसिंडा ऐडर्न (फोटो: रॉयटर्स)

लीडरशिप अपनी आबादी को खुशहाल और बदहाल, दोनों कर सकता है. जैसे नेपोलियन की कहानी है. जिसने रूस पर हमला किया. नेपोलियन की विशाल सेना आगे बढ़ती रही. रूसी सेना पीछे खिसकती गई. ये नेपोलियन का ब्लंडर था. उसकी सेना को रूस की भयानक ठंड की आदत नहीं थी. लीडर की अदूरदर्शिता के कारण हज़ारों सैनिक ठंड में जमकर मर गए. दुनिया कह रही है, कोरोना बीमारी नहीं जंग है. इस जंग में अगर लीडरशिप फेल होती है, तो इसकी कोई मुआफ़ी नहीं होनी चाहिए.


विडियो- वुहान का लॉकडाउन तो खुला, मगर चीन छुपा रहा है सच्चाई?

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