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ओडिशा-बंगाल में चिंता बढ़ाने वाले चक्रवात Yaas का नाम कैसे पड़ा?

पश्चिम में चक्रवात ताउ’ते से मची तबाही के बाद अब पूर्वी भारत पर एक चक्रवाती तूफान का खतरा मंडरा रहा है. नाम है ‘यास’. ये 26 मई की दोपहर तक उत्तरी ओडिशा और बंगाल के तटों से टकराएगा. मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि तटों से टकराने से पहले यास बेहद शक्तिशाली चक्रवात में बदल सकता है. इस चेतावनी के बाद भारी तबाही से बचने के लिए लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है.

IMD के डायरेक्टर डॉक्टर मृत्युंजय मोहापात्रा ने बताया कि ओडिशा के केंद्रापाड़ा और जगतसिंहपुर इलाकों में 80 किलोमीटर प्रतिघंटे की स्पीड से हवाएं चल सकती हैं. उन्होंने बताया कि यास से राज्य के चांदबाली जिले में सबसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका है.

तूफान से निपटने के लिए ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने राज्य के गृहमंत्री को बालासोर पहुंचने के लिए कहा है. गृहमंत्री वहीं रहकर स्थिति की समीक्षा करेंगे.

आशंका है कि ओडिशा के बाद इस चक्रवात से पश्चिम बंगाल सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्विटर पर जानकारी दी कि उन्होंने राज्य के सभी जिलों के मजिस्ट्रेट्स से बात की है. उन्होंने कहा है कि वो नौबान में रहकर स्थिति पर कड़ी नज़र रखेंगी.

कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने भी अपने पार्टी वर्कर्स से अपील की है कि वो आम लोगों की मदद करें.

NDRF DG एसएन प्रधान ने जानकारी दी है,

”चक्रवात यास अब एक खतरनाक तूफान में बदल गया है. शाम तक इसकी हवा की गति भी बढ़ने की आशंका है जो कि कल (26 मई) तक 160-185 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है. NDRF ने पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में 115 टीमों को तैनात कर दिया है. जिसमें से 52 ओडिशा और 45 पश्चिमी बंगाल में है.”

24 मई को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी इस पर एक बैठक की. जिसमें बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, आंध्र के सीएम जगन मोहन रेड्डी, ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक और अंडमान निकोबार द्वीप समूह के एलजी डीके जोशी शामिल थे. अमित शाह ने मीटिंग में कहा,

”इस तूफान की जद में पूर्वी तट आ रहा है. यहां पर करीब 24 ऑक्सीजन प्लांट भी हैं, जिनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी है. नौसेना और एयरफोर्स भी सतर्क है. राहत और बचाव के कामों के लिए टीमें तैनात की जा रही हैं. निचले तटीय इलाकों से लोगों से जल्द से जल्द बाहर निकाला जाना चाहिए.”

कैसे पड़ा तूफान का नाम यास?

यास, ताउ’ते…ये सब पढ़कर लगता है कि समय बचाने के लिए साइंटिस्ट्स ने बिना सोचे-समझे, जो मन में आया वो नाम रख दिया. लेकिन ऐसा होता नहीं है. ये नाम बेहद सावधानी से और किसी न किसी चीज़ की तरफ इशारा करते हुए रखे जाते हैं. जैसे पिछले अरेबियन सागर से उठे तूफान ताउ’ते की बात करें तो उसका नाम म्यांमार ने दिया था. जिसका मतलब होता है ‘गैको’. एक तरह की छिपकली.

इसी तरह से अब जो ये यास तूफान आया है. इसका नामकरण किया है ओमान ने, और इसका मतलब होता है पेड़. ‘यास’ शब्द की उत्पत्ति फारसी भाषा में हुई है, जिसका अंग्रेजी मतलब होता जैस्मीन.

तूफानों को नाम कैसे देते हैं?

तूफानों को सबसे पहले नाम 20वीं शताब्दी में दिया गया था. ये नाम आस्ट्रेलिया के एक मौसम वैज्ञानिक ने देने शुरू किए थे. वो तूफानों के नाम उन राजनेताओं के नाम पर रखता था, जिन्हें वो पसंद नहीं करता था. वक्त के साथ कैरिबियन आइलैंड्स के लोग कैथलिक संतों के नाम पर चक्रवातों के नाम रखने लगे. इसके बाद तूफानों के नाम रखने की जिम्मेदारी अमेरिका के पास आ गई. अमेरिका हर साल 21 नामों की लिस्ट तैयार करता है. अंग्रेजी वर्णमाला के हर अक्षर से एक नाम रखा जाता है, लेकिन Q,U,X,Y और Z से नाम नहीं रखे जाते. अगर साल में 21 से ज़्यादा तूफान आते हैं, तो फिर उनका नाम ग्रीक अल्फाबेट जैसे अल्फा, बीटा, गामा रख दिया जाता है. इन नामों को रखने में भी ऑड-ईवन फॉर्मूला अपनाया जाता है. ईवन साल जैसे 2004, 2014, 2018 में चक्रवात को आदमी का नाम दिया जाता है. ऑड साल में (2001, 2003, 2007) में चक्रवात को औरत का नाम दिया जाता है. एक नाम छह साल के अंदर दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाता. ज़्यादा तबाही मचाने वाले तूफानों के नाम रिटायर कर दिए जाते हैं, जैसे कटरीना.

भारत में क्या सिस्टम है?

अपने यहां का सिस्टम थोड़ा सा अलग है. भारत सारे नाम खुद तय नहीं करता. भारत में तूफानों को नाम देने का चलन 2004 में शुरू हुआ था. उस वक्त भारत, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाइलैंड ने मिलकर नाम देने का एक फॉर्मूला बनाया. इसके मुताबिक, सभी देशों ने अपनी ओर से नामों की एक लिस्ट वर्ल्ड मीटियोरोलॉजिकल ऑर्गनाइज़ेशन को दी है. भारत की लिस्ट में ‘अग्नि’, ‘आकाश’, ‘बिजली’, ‘मेघ’ और ‘सागर’ जैसे नाम हैं. पाकिस्तान की भेजी लिस्ट में ‘नीलोफर’, ‘तितली’ और ‘बुलबुल’ जैसे नाम हैं. नाम देने लायक चक्रवात आने पर आठ देशों के भेजे नामों में से बारी-बारी एक नाम चुना जाता है. इस बार नाम देने की बारी ओमान की थी. और उसने नाम दिया है ‘यास’. अपने यहां के सिस्टम में 10 साल तक एक नाम दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाता. ज़्यादा तबाही मचाने वाले चक्रवातों के नाम को रिटायर कर दिया जाता है.


ओडिशा-बंगाल से लेकर यूपी-बिहार तक पहुंच सकता है तूफान ‘यास’, जानिए किस राज्य को कितना खतरा? 

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