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हरभजन सिंह के करियर के पांच बड़े विवाद, एक के लिए तो उन्हें तगड़ा नुकसान भी उठाना पड़ा

साल 1998 में 17 साल की उम्र में एक पतले-दुबले सरदार ने टीम इंडिया के लिए डेब्यू किया. शरीर से हलके होने के बावजूद इस सरदार में अपने खेल के लिए लड़ जाने वाला जुनून था. नाम हरभजन सिंह. हरभजन ने अपने गांव से लेकर स्कूल और फिर इंटरनेशनल क्रिकेट तक इस चीज़ को बरकरार रखा. इसी का नतीजा है कि 18 साल बाद जब भज्जी खुद अपने करियर को पीछे पलट कर देखते होंगे, तो यही सोचते होंगे कि सबकुछ अच्छा रहा लेकिन विवादों की लिस्ट थोड़ी सी छोटी होती, तो और अच्छा हो जाता.

खैर, हरभजन टीम इंडिया के दिग्गज खिलाड़ी रहे. जिन्होंने एक नहीं कई मौकों पर भारतीय टीम के लिए शानदार प्रदर्शन किया. साल 2007 हो या 2011. विश्वकप में भी उन्होंने अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया. लेकिन आज हम बात करेंगे उनके विवादों पर. आइये जानते हैं, उनके करियर से जुड़े पांच बड़े विवाद.

मंकीगेट विवाद

सिडनी टेस्ट का तीसरा दिन. हरभजन सिंह बल्लेबाज़ी कर रहे थे. सायमंड्स के साथ भज्जी की कहासुनी होती है. मैच बिल्कुल कांटे की तरह फंसा हुआ था. सचिन और हरभजन मैच को बचाने के लिए जी-जान लगाए हुए थे. लेकिन सायमंड्स लगातार भज्जी को बड़ा शॉट खेलने के लिए उकसा रहे थे. भज्जी एकाग्र होकर क्रीज़ पर जमे हुए थे. थोड़ी देर तक भज्जी ये सब अनसुना करते रहे. लेकिन जब बात हद से ज़्यादा बढ़ी तो भज्जी ने सायमंड्स को पलटकर जवाब दे दिया.

उनका ये बयान ऑस्ट्रेलियन कप्तान रिकी पोन्टिंग को नागवार गुज़रा और उन्होंने मैच को मैच ना रहने देते हुए जंग का मैदान बना दिया. यानि मैच की नोंकझोंक की शिकायत मैच रेफरी से कर दी. लेकिन बड़ी बात ये थी कि उन्होंने मैच रेफरी से आम शिकायत नहीं की थी. उन्होंने रेफरी से स्लेजिंग की शिकायत नहीं की थी. बल्कि उन्होंने हरभजन पर नस्लीय टिप्पणी यानि रेसिज़्म का गंभीर आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि

भज्जी ने सायमंड्स को मैदान पर ‘मंकी’ यानि बंदर कहा है.

ये अपराध आईसीसी के नियम के मुताबिक बहुत बड़ा था. किसी भी तरह की नस्लीय टिप्पणी को ‘लेवल तीन’ का अपराध माना जाता है. इसमें आरोप साबित होने पर किसी भी खिलाड़ी पर दो से चार टेस्ट या फिर चार से आठ वनडे का बैन लग सकता है.

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तीसरे दिन का खेल खत्म हुआ और सिडनी क्रिकेट मैदान पर मैच रेफरी के सामने सुनवाई शुरू हो गई. लगभग छह घंटे लंबी सुनवाई आधी रात तक चली और आखिरकार हरभजन को दोषी ठहराते हुए तीन मैचों का बैन लगा दिया गया.

इसके बाद मैच जैसे-तैसे पूरा हुआ और ऑस्ट्रेलिया ने कुछ विवादास्पद फैसलों के साथ मैच जीत लिया.

लेकिन असली कहानी इसके बाद शुरू होती है. अब भारतीय टीम वो करने वाली थी जो उनकी एकता को दिखाता है. अनिल कुंबले की कप्तानी वाली टीम ने हरभजन के साथ डटे रहने का फैसला किया. भारतीय टीम ने अगले प्रेक्टिस मैच के लिए केनबरा जाने से इन्कार कर दिया. भारतीय खिलाड़ियों ने साफ कर दिया कि, अगर भज्जी पर से नस्लभेदी टिप्पणी के आरोप वापस नहीं लिए गए, तो वो दौरा रद्द करके वापस लौट जाएंगे.

अब बीसीसीआई भी इस मामले के बीच आ गया था. मामला अब आईसीसी के पाले में था. मामले ने इतना तूल पकड़ लिया था कि टीम इंडिया को वापस लाने के लिए एक चार्टर्ड प्लेन का इंतज़ाम भी किया जा चुका था.

न्यूज़ीलैंड हाईकोर्ट के जज जॉन हैन्सन ने की मामले की सुनवाई:

इस पूरे मामले में विवाद बढ़ता देख, आईसीसी ने इसकी सुनवाई न्यूज़ीलैंड के जज जॉन हैन्सन को सौंप दी. इस मामले में ये खबर भी थी कि भारतीय टीम अब कोर्ट में ये दलील पेश करने वाली है कि हरभजन ने सायमंड्स को ‘मंकी’ नहीं बल्कि उससे मिलती जुलती हिंदी भाषा की एक गाली दी थी.

इसके बाद 29 जनवरी 2008 के दिन कोर्ट के अंदर इंडिया और ऑस्ट्रेलिया के कई खिलाड़ी पहुंचे. हरभजन सिंह के साथ सचिन तेंडुलकर, जबकि एंड्र्यू सायमंड्स के साथ माइकल क्लार्क और रिकी पोन्टिंग थे. सुनवाई लगभग शाम के चार बजे तक चली और आखिर में पत्रकारों को भी कोर्ट रूम के अंदर बुला लिया गया. हालांकि उन्हें सवाल पूछने की इजाज़त नहीं थी.

जज जॉन हैन्सन ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुनाया. उन्होंने भज्जी पर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा,

”भज्जी ने सायमंड्स को ‘मंकी’ नहीं बल्कि ‘तेरी मां की’ कहा था.”

इस तरह से भज्जी आरोपों से बरी हो गए और ये विवाद क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े विवादों में शुमार हुआ.

IPL 2008 में भज्जी-श्रीसंत स्लैपगेट विवाद

साल 2008, आईपीएल का पहला सीज़न. मोहाली में मैच हो रहा था किंग्स इलेवन पंजाब और मुंबई इंडियंस के बीच. मोहाली हरभजन का होमग्राउंड था. लेकिन वो मुंबई के लिए खेल रहे थे. श्रीसंत उन दिनों पंजाब के लिए खेलते थे, युवराज पंजाब के कप्तान थे. पंजाब ने मुंबई को मैच में 66 रनों से हरा दिया. इसके बाद टीवी पर टीमें मैदान से आती-जाती दिखती है. इतने में एक तस्वीर में दिखते हैं श्रीसंत. श्रीसंत उस वक्त रो रहे थे. किसी को कुछ समझ नहीं आया.

Sreesanth Slap
श्रीसंत. फाइल फोटो

लेकिन थोड़ी देर बाद खबर आई. ये कि श्रीसंत ने इल्ज़ाम लगाया था हरभजन ने उन्हें थप्पड़ मारा है.

यहां तक कि इस पूरे मामले में ये भी सामने आया कि हरभजन के दोस्त युवराज सिंह भी भज्जी की इस हरकत से बहुत खफा हुए. उन्होंने कहा,

‘ये क्रिकेट नहीं है. ये ठीक नहीं है.’

इसके बाद मैच वाली रात ही हरभजन ने आजतक को इंटरव्यू दिया. जिसमें उन्होंने कहा,

”श्रीसंत और मैं भाई की तरह हैं, ऐसा कुछ नहीं है, मैंने थप्पड़ नहीं मारा, कुछ कहा सुनी हुई है और सबकुछ ठीक हो जाएगा. ये सब सिर्फ बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया जा रहा है.”

हरभजन के बाद ही श्रीसंत भी इंटरव्यू के लिए आ गए. उन्होंने भी इस तरह की घटना से साफ इन्कार कर दिया. उन्होंने कहा,

‘उन्होंने कोई थप्पड़ नहीं मारा. थोड़ी सी कहासुनी हुई थी, भज्जू पा मेरे भाई की तरह हैं, सबकुछ ठीक है.’

इसके बाद ऐसा लगने लगा था कि अब सबकुछ सुलझा लिया गया है. लेकिन मैच के अगले दिन ही यानि 26 अप्रेल के दिन मैच रेफरी फारुख इंजीनियर ने इंटरव्यू में ये कहकर सबको चौंका दिया कि

”क्रिकेट में ऐसा थोड़ी होता है, लफाड़ा मार दिया.”

उनके इस बयान से ये साफ हो गया था कि इस मामले में कोई ना कोई जानकारी या सबूत मैच रेफरी इंजीनियर के हाथ लगा है. या तो सीसीटीवी फुटेज या कोई चीज़ तो है जो इस घटना पर से पर्दा उठा रही है. इसके बाद हरभजन को पूरे आईपीएल 2008 के लिए बैन कर दिया गया. पूरे मामले की जांच की गई. जांच की जिम्मेदारी आईपीएल कमिश्वर सुधीर नानावटी को सौंपी गई. उन्होंने मई के महीने में अपनी रिपोर्ट बीसीसीआई को सौंप दी. हरभजन सिंह पर पांच वनडे मैचों का बैन और लगाया गया.

2013 में श्रीसंत ने फिर से ट्विटर के जरिए हरभजन सिंह पर आरोप लगाया था कि

भज्जी ने उन्हें थप्पड़ नहीं, कोहनी मारी थी.

ऐसा ही आरोप उन्होंने 2018 में बिग बॉस शो में जाकर भी लगाया था.

हालांकि साल 2020 में उनका एक बार फिर से नया बयान आया है. जिसमें उन्होंने कहा है कि सचिन तेंडुलकर ने स्लैपगेट पर उनका और हरभजन के बीच का सारा विवाद खत्म करवा दिया था.

रॉयल चैलेंजर्स ऐड विवाद

एक और विवाद हुआ साल 2006 में. जब हरभजन सिंह ने ‘रॉयल स्टैग’ शराब की कंपनी के लिए एक विज्ञापन किया. इस विज्ञापन में हरभजन बिना पगड़ी के नज़र आए. इसके बाद सिख समुदाय ने हरभजन सिंह के इस विज्ञापन की जमकर आलोचना की. बिना पगड़ी के ऐड में आना ही नहीं बल्कि एक शराब के विज्ञापन के लिए उन्हें जमकर घेरा गया. यहां तक कि हरभजन सिंह के होमटाउन जालंधर में भज्जी के पोस्टर जलाए गए. हरभजन से इस ऐड के लिए माफी की मांग की गई. साथ ही इस ऐड को हटाने की भी मांग की गई.

बाद में कंपनी ने इस ऐड को हटा लिया. हरभजन सिंह ने भी बिना शर्त के माफी मांग ली.

रिकी पोन्टिंग के साथ विवाद

वर्ल्ड क्रिकेट में ऐसे बहुत से खिलाड़ी रहे जिन्हें भारत में पसंद नहीं किया गया. लेकिन आईपीएल शुरू होने के बाद उन खिलाड़ियों को भी भारत में खूब प्यार और फैंस मिले. कई खिलाड़ी जिनके साथ भारतीय खिलाड़ियों के रिश्ते बहुत अच्छे नहीं थे. वो भारतियों के दोस्त भी बने. ऐसे ही एक खिलाड़ी रहे रिकी पोन्टिंग. आईपीएल आने के बाद रिकी पोन्टिंग भारत आए और सचिन तेंडुलकर और हरभजन सिंह के साथ अच्छी दोस्ती निभाई. लेकिन शुरूआत दौर में रिकी पोन्टिंग के साथ हरभजन सिंह का छत्तीस का आंकड़ा रहा.

Bhajji Ponting
भज्जी-पोन्टिंग फाइल फोटो

साल 1998 में हरभजन को टीम इंडिया में पहला मौका मोहम्मद अज़़हरूद्दीन की कप्तानी में मिला. जब हरभजन टीम में पहुंचे तो पहली सीरीज़ में उनकी टक्कर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ थी. 17 साल की उम्र में जब भज्जी ब्लू जर्सी में वनडे खेलने उतरे, तो उन्होंने रिकी पोन्टिंग को अपनी गेंद पर चकमा देकर स्टम्प आउट करवा दिया. पोन्टिंग को आउट करने के बाद भज्जी बिल्कुल एक जोशीले नौजवान और कम उम्र बच्चे की तरह जश्न मना रहे थे. जिसके बाद पोन्टिंग उनसे उलझ गए. वो जश्न मनाते भज्जी के पास आकर कुछ कहते हुए वहां से चले गए.

भज्जी पर इस हरकत के लिए आईसीसी कोड ऑफ कन्डक्ट उल्लंघन करने का आरोप लगा. जिसकी वजह से उन पर जुर्माना और एक मैच का प्रतिबंध लगाया गया.

रावण-सीता डांस विवाद

साल 2008, वाकई हरभजन सिंह के लिए करियर का सबसे खराब साल रहा. जब वो एक बाद एक विवादों में घिरते जा रहे थे. पहले मंकीगेट विवाद, फिर स्लैपगेट विवाद और फिर आखिर में आते-आते एक टीवी शो में डांस विवाद.

साल 2008 में एक रिएलिटी टीवी शो आया. जिसका नाम था ‘एक खिलाड़ी एक हसीना.’ इस शो में हरभजन सिंह समेत कई भारतीय क्रिकेटर्स ने हिस्सा लिया. उनके सामने एक एक्ट्रेस होती थी. लेकिन इस शो के दौरान हरभजन सिंह ने एक ऐसा डांस आइटम पेश किया जिसपर विवाद हो गया. इस शो में हरभजन की को-डांसर थीं मोना सिंह. भज्जी ने मोना के साथ ‘रावण और सीता’ का डांस पेश किया.

इस डांस के ऊपर खूब विवाद हुआ. हिन्दू और सिख समुदायों ने हरभजन सिंह के इस ऐक्ट की जमकर आलोचना की और इसके खिलाफ प्रदर्शन भी किए. उस वक्त अकाल तख्त की तरफ से बयान जारी कर कहा गया था कि

”हमें लगता है कि इस तरह धार्मिक देवी-देवताओं का मजाक उड़ाना अनुचित है. रावण को उनकी बुराइयों के लिए पहचाना जाता है. तो फिर किस तरह से रावण और सीता (राम की पत्नी) एक साथ डांस कर सकते हैं? इस डांस को दो सिखों ने पेश किया जो कि निंदनीय है.”

तो कुल जमा बात ये कि हरभजन सिंह का पूरा करियर कामयाबियों के साथ-साथ विवादों से भी जुड़ा रहा.


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