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ऑनलाइन सेल के धुरंधर कैसे ले उड़ते हैं मोबाइल का पूरा स्टॉक

ऑनलाइन बिक्री वाले फोन ऑफ़लाइन बेचे जा रहे हैं.

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(सांकेतिक पिक्चर: indiatoday)
एक छोटे-से शहर के रहने वाले छन्नूलाल के मोबाइल की जब भद्द पिट गई, तो नया फ़ोन लेने के लिए इंटरनेट की शरण में पहुंचे. ऑनलाइन सेल का इंतज़ार किया. सेल आयी, तो दिल, दिमाग़ और आंखें, सब स्क्रीन पर गड़ाकर बैठ गए. पर फ़्लैश सेल आंधी की तरह आई और तूफ़ान की तरह चली गई. सेकंडों में बंटाधार हो गया और छन्नूलाल बैठे के बैठे रह गए.
“कोई बात नहीं, अगली सेल पर बुक कर लेंगे”, कहकर ख़ुद को दिलासा दिया. मगर अगले हफ़्ते की सेल पर भी हाथ में कुछ नहीं आया. ये सिलसिला हफ़्ते क्रॉस कर के महीने में तब्दील हो गया. कभी पेमेंट फ़ेल हुआ, तो कभी बुकिंग के बाद ऑर्डर कैन्सल हो गया. न कभी हाथ को आया, न मुंह को लगा. झख मारकर मार्केट पहुंचे. मोबाइल की दुकान पर उसी फ़ोन को पसंद किया, जिसे ऑनलाइन ख़रीदने की लालसा तो महीने में भी पूरी न कर पाए थे. लेकिन यहां तो वही फ़ोन 1,500 रुपए महंगा मिल रहा. दुकानदार बोला,
“भय्या हमने ख़ुद हज़ार रुपए एक्स्ट्रा देकर मंगवाया है. कुछ तो हम भी कमाएंगे. आप चाहो, तो ख़ुद ऑनलाइन ऑर्डर कर लो.”
छन्नूलाल ख़ुद ऑर्डर कर लेते, तो दुकान थोड़ी न जाते. इन्होंने एक नज़र अपने फ़ोन पर डाली. उसकी चंद बची हुई सांसों को मजबूरी का नाम दिया. 14,000 रुपए वाले फ़ोन के लिए 15,500 रुपए चुकाए और घर को लौट आए.

कैसे शुरू हुआ स्मार्टफ़ोन रीसेल का काम

पुराने मोबाइल फ़ोन ख़रीदने और बेचने का धंधा तो स्मार्टफ़ोन से भी पुराना है. लखनऊ के चारबाग़ स्टेशन के पास की ‘गोल मार्केट' और हज़रतगंज का ‘श्री राम टावर’ तो इसी का जमघट है. मगर नए फ़ोन की रीसेल शुरू हुए क़रीब चार साल हो गए हैं.
तब फ्लिपकार्ट और ऐमज़ॉन छोटे शहरों में डिलिवरी नहीं करते थे. लोग दिल्ली के प्रवासी कामगारों के पास फ़ोन ऑर्डर करवा देते थे. जब उनमें से कोई घर वापस आता, तो फ़ोन भी लेता आता था. शुरू में ये काम ज़रूरत मुताबिक लिमिटेड रहा, मगर बाद में मुनाफ़ा कमाकर दूसरों को बेचने के लिए भी किया जाने लगा. फिर कुछ दुकानदारों ने इसे रीसेल का ज़रिया बना लिया.
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मोबाइल ऑर्डर करते वक़्त रीसेलर. (फ़ोटो: फिर हेरा फ़ेरी)

उत्तर प्रदेश में एक शहर है सीतापुर. यहां एक मोबाइल रीचार्ज की दुकान चलाने वाले कहते हैं:
“चार साल पहले ऑनलाइन डिलिवेरी अपने यहां नहीं थी. उस वक़्त रेडमी 3 का ज़ोर था. तब हम ऑनलाइन बुक कर के दिल्ली में फ़ोन मंगवा लेते थे. वहां से ये सीतापुर आ जाता था. फिर इसे यहीं बेच दिया करते थे. उस वक़्त इधर बस दो-चार लोग ही ऐसा किया करते थे. लेकिन जब से ऑनलाइन डिलिवरी छोटे शहरों में शुरू हुई है, तब से बहुत से लोगों ने यही काम शुरू कर दिया है. आज तो लगभग हर दुकान वाला रीसेल कर रहा है.”

रीसेल ही ज़रिया है फ़ोन ख़रीदने का!

शाओमी और रियलमी जैसी कम्पनियां फ़्लैश सेल पर अपने नए मॉडल बेचती हैं. यानी हफ़्तेभर में जितना माल बनता है, उतना ही ऑनलाइन लाकर एक फ़िक्स्ड डेट पर बेच देती हैं. स्टॉक कम होता है और ख़रीदने वाले ज़्यादा. सेकंडों में आइटम “आउट ऑफ़ स्टॉक” हो जाता है. ख़रीदना बड़ा मुश्किल होता है.
यूपी के सीतापुर, लखीमपुर, शाहजहांपुर, बिसवां, हरदोई, लहरपुर और बदायूं जैसे टियर 3 शहरों में इन कंपनियों के ऑफ़िशियल स्टोर नहीं हैं, न ही ये छोटे दुकानदारों तक अपने डिवाइस पहुंचा पा रही हैं. ऊपर से कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो ऑनलाइन ख़रीदारी में यक़ीन नहीं रखते. ये फ़ोन हाथ में लेकर, चेक करके ख़रीदना चाहते हैं. गांव-खेड़े के लोगों का तो ऑनलाइन सेल से कम ही लगाव है. इनकी नज़र में आज भी शहर और क़स्बे की मोबाइल रिचार्ज की दुकान पर ही फ़ोन मिलता है.
बढ़ती हुई डिमांड को काउंटर करने के लिए दुकानदार ख़ुद ही मैदान में उतर आए. ऑनलाइन फ़ोन ऑर्डर करते हैं, फिर बेच देते हैं. पर कोई अकेला कितने फ़ोन ऑर्डर करेगा. दूसरे लोगों ने इस डिमांड को पूरा करने में अपना योगदान देना शुरू किया और चल पड़ा कारवां.

रीसेल पैदा कर रहा पार्ट-टाइम जॉब

हमारे पुराने साथी हैं अदनान अंसारी (बदला हुआ नाम). बेरोज़गारी में फ़ोन रीसेल करते रहते हैं. वो बताते हैं,
“रेडमी नोट 5 प्रो 2018 में आया था. तब से ऑनलाइन फ़ोन की रीसेल ने ज़ोर पकड़ा था यहां. आज के टाइम पर तो रेडमी और रियलमी फ़ोन की एकदम लुट्टस मची हुई है. इंफ़िनिक्स भी ज़ोर पकड़ रहा है. दुकानदार तो बोलते हैं कि बस ले आओ. फ़र्क़ नहीं कि एक है या दो हैं या 20-30. जितने हों, सब ले आओ.”
कुछ लोगों ने तो इस काम के लिए एजेंट बना रखे हैं. ये एजेंट 16-17 साल के गली-मोहल्लों में घूमने वाले लड़के हैं. इनको वो हर फ़ोन बुकिंग का 200 रुपया देते हैं. और फ़ोन की डिलिवेरी ख़ुद लेकर दुकान पर बेच देते हैं.
डिमांड वाले फ़ोन की लिस्ट हर हफ़्ते वॉट्सऐप पर शेयर की जाती है. इस लिस्ट में डिवाइसेज़ की सेल डेट भी लिखी होती है. नीचे लगे हुए स्क्रीनशॉट में देखिए:
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कौन-सा फ़ोन कब सेल पर आएगा.

अदनान ने बताया-
“जो फ़ोन सस्ता है, जैसे रियलमी C11, तो उस पर बस 300-400 रुपए ही मिलते हैं. बाक़ी रेडमी नोट 9 प्रो मैक्स और रियलमी नार्ज़ो 10 जैसे डिवाइस पर 600-700 रुपए मिल जाते हैं. दुकान वाला फिर उसके ऊपर भी 300-400 रुपए बढ़ाकर बेचता है,”
जिसने ऑनलाइन फ़ोन ऑर्डर करने को अपना काम ही बना लिया हो, उसे छन्नूलाल तो पछाड़ने से रहे. लेकिन फिर भी सब खरा-खरा नहीं होता. फ्लिपकार्ट और ऐमज़ॉन पर इतना ज़्यादा ट्रैफ़िक हो जाने के चलते पेमेंट में दिक्कत आती हैं. वेबसाइट स्टॉक से ज़्यादा ऑर्डर ले लेती है, फिर वो बाद में कैन्सल हो जाते हैं. अदनान बताते हैं, “रियलमी नार्ज़ो 10 की सेल पर 10 फ़ोन ऑर्डर करवाए थे. उसमें से बाद में आठ फ्लिपकार्ट ने कैन्सल कर दिए. सिर्फ़ दो ही मिल पाए.”

बड़े-बड़े दुकानदार भी करवा रहे काम

जहां गली-मोहल्लों की दुकान में 'इस हाथ ले, उस हाथ दे' वाला हिसाब चल रहा है, बड़े दुकानदार अलग ही लेवल पर खेल रहे हैं. ये तो फ़ोन की डाइरेक्ट डिलिवेरी ही ले लेते हैं. वॉट्सऐप ग्रुप बना रखे हैं, जहां पर बता दिया जाता है कि इन्हें कौन-सा फ़ोन चाहिए. साथ ही ये भी कि एक फ़ोन पर कितना पैसा देंगे.
अदनान बताते हैं,
“पुणे के कुछ दुकानदार हैं. ये वॉट्सऐप पर अपना रेट बता देते हैं और एड्रेस दे देते हैं. उसी एड्रेस पर फ़ोन ऑर्डर करना होता है. ऑर्डर के शिप हो जाने के बाद ट्रैकिंग आईडी शेयर करना होता है. उधर डिलिवेरी होती है, इधर पैसा आ जाता है.”
अभी कुछ टाइम पहले ये रेट चल रहा था-- रियलमी C2 पर 450 से 600 रुपए, रियलमी 5s पर 200 से 350 रुपए, रेडमी नोट 9 सीरीज़ पर 650 से 1000 रुपए, रियलमी C11 पर 500 रुपए.
Lt Resale Screenshot
किस फ़ोन की बुकिंग पर कितना पैसा मिलेगा.

जब तक कंपनियां फ़्लैश सेल पर ज़्यादा फ़ोन लेकर नहीं आतीं और जब तक छोटे-छोटे शहरों की दुकानों पर अपने फ़ोन की डिमांड को पूरा नहीं कर देतीं, छन्नूलाल महंगा फ़ोन ही ख़रीदते रहेंगे. छन्नूलाल कौन? हम और आप.


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