Samsung ने अपने स्मार्टफोन के दाम बढ़ा (Samsung Smartphone Price Hike) दिए हैं. क्यों बढ़ा दिए. अरे भाई यह तो होना ही था बस तारीख और समय का पता नहीं था. खैर ऐसा क्यों हुआ उस पर बाद में बात करेंगे क्योंकि वो तो हमने पहले ही बता दिया था. अभी जान लेते हैं कि कीमतें कितनी बढ़ी हैं. 1000 रुपये से लेकर 2000 तक, डिवाइस के पोर्टफोलियो के हिसाब से. साउथ कोरियन कंपनी ने अपनी F और A सीरीज के दाम मोटा-माटी 5 फीसदी बढ़ा दिए हैं. बढ़े हुए दाम आज यानी 5 जनवरी 2026 से लागू भी हो गए हैं.
लो जी, सैमसंग ने अपने स्मार्टफोन के दाम बढ़ा दिए, 2000 रुपये तक महंगे हुए डिवाइस
Samsung ने अपने बजट, मिडरेंज और प्रीमियम मिडरेंज स्मार्टफोन के दाम बढ़ा (Samsung Smartphone Price Hike) दिए हैं. साउथ कोरियन कंपनी ने अपनी F और A सीरीज के दाम मोटा-माटी 5 फीसदी बढ़ा दिए हैं. बढ़े हुए दाम आज यानी 5 जनवरी 2026 से लागू भी हो गए हैं.


सैमसंग की इंट्री लेवल F17 सीरीज के 4GB रैम और 128GB स्टोरेज वाले मॉडल 14,499 से बढ़कर 15,499 रुपये हो गया है. 6GB वाला मॉडल 15,999 की जगह अब 16,999 रुपये में मिलेगा. 8GB वाले मॉडल के लिए अब 18,499 रुपये चुकाना होंगे. पहले इसका दाम 17,499 रुपये था.
Galaxy A36 के लिए 1500 रुपये एक्स्ट्रा देना होंगेसैमसंग की मिडरेंज सीरीज के मॉडल A36 का दाम 38,499 रुपये हो गया है. 12GB रैम और 256 जीबी स्टोरेज के मॉडल का दाम पहले 36,999 रुपये था. इसके 8GB रैम और 256 जीबी स्टोरेज वाले मॉडल का दाम बढ़कर अब 35,499 रुपये हो गया है. 128 जीबी के लिए अब 30,999 रुपये की जगह 32,499 रुपये देना होंगे.
सैमसंग की प्रीमियम मिडरेंज सीरीज के लिए भी अब एक्स्ट्रा पैसा देना होगा. इसका 12GB रैम और 256GB स्टोरेज वाला मॉडल 44,999 की जगह 46,999 रुपये का मिलेगा. 8GB वाला मॉडल 43,999 रुपये में मिलेगा. पहले इसका दाम 41,999 रुपये था. अब ऐसा हुआ क्यों है.
रैम रगड़ने रही हैस्मार्टफोन के दाम बढ़ने के पीछू रैम की कमी है. मार्केट में RAM इन्फ्लेशन आई हुई है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 512GB मेमोरी के दाम में पिछले कुछ महीनों में 65 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. अकेले सैमसंग ने मेमोरी चिप का दाम 60 फीसदी तक बढ़ा दिया है. जो आपको लगे कि कंपनियों ने प्रोडक्शन कम कर दिया है क्या? प्रोडक्शन कम नहीं हुआ. बल्कि खपत बढ़ गई है. रैम को सुरसा की तरह निगलने वाले का नाम है AI. रैम की डिमांड पिछले 18 महीनों में तीन गुना हो गई है. दरअसल AI का पूरा गेम ही रैम बोले तो मेमोरी पर टिका हुआ है.
हर AI मॉडल को सीखने और सिखाने के लिए मेमोरी की जरूरत होती है. फिर भले वो GPT हो या LLM (large language model). जाहिर सी बात है कि डेटा कंपनियों को रैम की जरूरत पड़ रही है. इस समय हर टेक कंपनी का फोकस AI है. हर कंपनी बड़े-बड़े डेटा सेंटर बना रही है. माइक्रोसॉफ्ट से लेकर, OpenAI, Apple, Meta भी दुनिया जहान में ऐसे डेटा सेंटर बना रही हैं. AI के लिए ग्राफिक कार्ड बनाने वाली कंपनी NVIDIA तो है ही. आजकल के लैपटॉप भी AI पावर वाले हैं तो उधर भी रैम चाहिए. बोले तो सबको रैम मांगता. यही डिमांड है जो पूरी नहीं हो रही है. ऊपर से रही सही कसर तब पूरी हो गई जब रैम बनाने वाली बड़ी कंपनी Micron ने अपना धंधा समेट लिया.
इसका असर बाजार पर पड़ा है. स्मार्टफोन के लिए रैम की कमी हो गई है. अभी तो सिर्फ शुरुवात है. इस साल फोन से लेकर लैपटॉप के दामों में अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी.
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