AI के इलाके से फिर खबर आई है. अरे नहीं, अभी कोई एजेंट बागी नहीं हुआ है. सैम भाई, सैम भाई को चेतावनी भी नहीं दे रहे. और सैम भाई, सैम भाई को रोकने के लिए भी नहीं कह रहे. इस लाइन के संदर्भ के लिए ये खबर पढ़ें. खबर ये है कि OpenAI अपने कई कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रहा है. टेक कंपनियां पिछले पांच साल से ऐसा कर रही हैं. लेकिन इस बार नौकरी से निकालने का कारण अजीब है.
AI मॉडल से माल उठाकर उसी को चेप दिया, OpenAI ने 'कामचोरों' को निकाला
OpenAI कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को निकाल रही है. दिलचस्प बात ये है कि माना जा रहा है कि ये कॉन्ट्रैक्ट वर्कर कंपनी के AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए AI का ही (people training openai fired for using ai to train the ai) इस्तेमाल कर रहे थे.

OpenAI कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को निकाल रही है. दिलचस्प बात ये सामने आई है कि ये कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स कंपनी के AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए AI का ही इस्तेमाल कर रहे थे.
यही तो नहीं करना थाये हम उन कर्मचारियों से कह रहे जिन्होंने ऐसा किया. ChatGPT से पूछकर ChatGPT को ट्रेन कर रहे. ये तो वही बात हुई जो हम किसी जासूस से उसके टॉप सीक्रेट पूछ लें. वो थोड़े बताएगा. हां, ये बात जरूर है कि जो बताएगा वो पक्का झूठ और गुमराह करने वाला होगा. आपको शायद लगे कि क्या चैटबॉट इतने समझदार हो गए हैं जो खुद सोचने लगे हों.
एकदम भाई साब. आजकल के चैटबॉट बहुत एडवांस हैं. अगर इनको कोई बात पता नहीं होती तो कई बार झूठ बोलते हैं. मनगढ़ंत बातें भी बनाते हैं. OpenAI ने खुद कुछ दिन पहले ऐसी ही एक घटना का जिक्र किया था. माने चैट GPT से पूछकर उसको ही ट्रेन करने का क्या मतलब.
एआई को ‘इंसान’ बनाना हैदरअसल बात ऐसी है कि हर एआई कंपनी अपने मॉडल को रोबोट कम और इंसान ज्यादा बनाना चाहती है. हर एआई कंपनी दावा तो यही करती है. अंदरखाने क्या चल रहा, वो अभी पता नहीं. 404 Media की रिपोर्ट के मुताबिक मुताबिक, वर्कर यह देखने के लिए असली ChatGPT यूज़र प्रॉम्प्ट और बातचीत पढ़ते हैं कि चैटबॉट कैसे जवाब देता है. फिर वे AI के जवाबों का एनालिसिस करते हैं और यह पक्का करते हैं कि चैटबॉट बहुत ज़्यादा चापलूसी न करे – यानी सही जानकारी देने के बजाय यूज़र को वही बताए जो वे सुनना चाहते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, ये कॉन्ट्रैक्ट वर्कर हर घंटे $50 (लगभग ₹4,800) तक कमा सकते हैं.
यहां तक तो ऐसा ही लग रहा कि इंसान ही ChatGPT को पढ़ रहे और सिखा भी रहे. लेकिन हुआ इसका उल्टा है. पता चला है कि इनमें से कई वर्कर खुद काम करने के बजाय AI का इस्तेमाल करके एआई मॉडल को ही ट्रेन कर रहे थे. सीधा-सीधा कामचोरी. रिपोर्ट के मुताबिक, इन प्रोजेक्ट्स में हज़ारों कॉन्ट्रैक्ट वर्कर शामिल हैं.
OpenAI ने इस अपने मॉडल को ट्रेन करने के लिए AI का इस्तेमाल न करने का सख़्त नियम बनाया है. इसकी वजह AI से बने टेक्स्ट पर AI मॉडल को ट्रेन करने से जुड़ा जोखिम है. AI से बने टेक्स्ट पर मॉडल को ट्रेन करने से "मॉडल कोलैप्स" (model collapse) हो सकता है. बोले तो अपने सिर पर हाथ रखकर खुद को भस्म कर सकता है.
इसलिए OpenAI कॉन्ट्रैक्ट वर्कर को निकाल रही है. लेकिन खुद सैम बाबू के एआई एजेंट सारे नियम कानून कायदे सामाजिक मर्यादा तोड़कर दूसरों की वेबसाइट और सिस्टम में घुस जा रहे, उसका क्या.
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