सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक मैसेज दिया है. किसी फ़ूड प्रोडक्ट को प्रमोट करने से पहले यह पक्का कर लें कि उससे जुड़े दावे सच हों, उनकी पुष्टि की जा सके और वे कानून के मुताबिक हों. गुमराह करने वाले या बिना पुष्टि किए गए फ़ूड दावों को प्रमोट करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है.
अपनी रील में इन प्रोडक्ट के प्रचार से पहले FSSAI का नियम जरूर पढ़ें, वरना बड़ा संकट तय
FSSAI चाहता है कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स किसी भी प्रोडक्ट के प्रचार से पहले ये चेक कर लें कि वो प्रोडक्ट FSSAI के नियमों और स्टैंडर्ड के दायरे में आता है या नहीं. कई प्रोडक्ट के दावों को बिना सत्यापन प्रमोट न करने की बात कही गई है.

FSSAI ने अपने एक्स हैंडल पर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए एक किस्म की गाइडलाइन जारी कर दी है. इसके मुताबिक खाने से जुड़े उत्पादों का प्रचार करने से पहले उससे जुड़े हर दावे की जांच जरूरी है. माने अगर कंपनी कहती है कि फलां प्रोडक्ट में इतना प्रोटीन है तो सिर्फ उसके कहने से आपको ये नहीं कहना है. ऐसे दावे का सत्यापन कर लेना. बोले तो टेस्ट रिजल्ट और कागज-पत्री देख लेना.
“Boosts Immunity”, “Rich in Nutrients” जैसे दावों को बिना सत्यापन प्रमोट न करने की बात भी कही गई है. FSSAI का कहना है कि ग्राहक का भरोसा इन्फ्लुएंसर पर होता है इसलिए उसका हर दावा उस भरोसे के लायक होना चाहिए. किसी भी प्रोडक्ट का भ्रामक प्रचार उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकता है और इसके कानूनी परिणाम हो सकते हैं. Food Safety and Standards Act, 2006 की धारा 24 और 53 के तहत भ्रामक विज्ञापन/एंडोर्समेंट पर कार्रवाई और पेनल्टी का प्रावधान है. इस बात की जानकारी भी पोस्ट में दी गई है.
कुल जमा बात ये कि FSSAI चाहता है कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स किसी भी प्रोडक्ट के प्रचार के पहले ये चेक कर लें कि वो प्रोडक्ट FSSAI के नियमों और स्टैंडर्ड के दायरे में आता है या नहीं. बिजनेस की भाषा में कहें तो प्रचार कंपनी से डील डन करने से पहले Due Diligence कर लेना.
FSSAI एक्शन मोड मेंइन दिनों फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ताबड़तोड़ एक्शन मोड में है. देशभर में FSSAI ने कई बड़ी खाने-पीने की कंपनियों पर छापेमारी कर खाने की क्वालिटी की खामियों को उजागर किया है. उदाहरण के लिए बेंगलुरु के शहरी इलाकों में फूड सेफ्टी विंग ने कई छापेमारियां की इस दौरान कई नामी होटलों के किचन में सड़ा हुआ चिकन और यूज किया कुकिंग ऑयल मिला है.
टीम ने जब कानपुर नगर स्थित वैभव आटा मिल का निरीक्षण किया गया और लैब टेस्टिंग के लिए 3 सैंपल एकत्र किए तो, उसके बाद 4,300 किलोग्राम आटा जब्त किया गया था. मुंबई के पॉश कैफे और प्रीमियम क्लबों के किचन में भारी गंदगी मिलने के बाद FSSAI ने उनके लाइसेंस को सस्पेंड किया था.
पिछले हफ्ते ही FSSAI ने डाबर के प्रोडक्ट्स पर लिखे '100% प्योर' और '100% नेचुरल' जैसे दावों पर आपत्ति जताई थी. रेगुलेटर ने कहा कि ये दावे ना तो स्पष्ट हैं, ना वेरिफाई किए जा सकते हैं, और ग्राहकों को गुमराह कर सकते हैं. इसलिए डाबर को तुरंत ‘100%’ दावे का इस्तेमाल बंद करने का आदेश दिया गया है. कंपनी को आदेश पर अमल करने के लिए 15 दिन की मोहलत दी गई है.
ऐसे में फूड प्रोडक्ट का प्रचार करने वाले इन्फ्लुएंसर्स के लिए गाइडलाइन जारी करना तो बनता ही था.
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