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घर के बाहर बिजली का खंबा लगाने के मिल रहे 1.25 करोड़, पति-पत्नी ने फिर भी मना कर दिया

पति-पत्नी ने सवा करोड़ रुपये का प्रस्ताव ठुकरा दिया. उन्होंने इसकी वजह भी सरकार और मीडिया को बताई है.

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अमेरिकन दंपति ने डेटा सेंटर के लिए पावर लाइन लगाने का 1.25 करोड़ का ऑफर ठुकरा दिया

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  • अमेरिका के विस्कॉन्सिन में रहने वाले 75 वर्षीय जैरी ज़ेलेंका और उनकी पत्नी ने अमेरिकी ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा डेटा सेंटर के लिए प्रस्तावित 1,31,000 डॉलर के मुआवजे को ठुकरा दिया है।
  • यह मामला इस कारण उठा है क्योंकि प्रस्तावित पावर लाइन के निर्माण से जैरी ज़ेलेंका के छह इमारतें और पुराने पेड़ प्रभावित होंगे, जबकि वे जमीन को 1990 में खरीदे थे।
  • यह जोड़ा इस विवाद को संघीय अदालत में चुनौती दे रहा है, जिससे आगे भूमि अधिग्रहण कानून के इस्तेमाल और मुआवजे की वैधता पर फैसला किया जाएगा।

आपके घर के आसपास से एक बिजली की लाइन जानी हो और उसको लगाने के लिए सरकार आपको करोड़ों रुपये ऑफर करे तो आप क्या करेंगे. हां या ना की जगह आप कहोगे कि भईया पहले करोड़ों का ऑफर आने दो फिर तय करते हैं. ठीक बात. लेकिन अमेरिका के विस्कॉन्सिन के एक दंपति ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया है. अमेरिका के विस्कॉन्सिन राज्य में रहने वाले 75 वर्षीय जैरी ज़ेलेंका (Jerry Zelenka) और उनकी पत्नी ने अमेरिकन ट्रांसमिशन कंपनी (ATC) के 1,31,000 डॉलर (1.25 करोड़ रुपये) के मुआवजे के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है.

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विस्कॉन्सिन के इस जोड़े ने डेटा सेंटर की प्रस्तावित पावर लाइन के लिए सवा करोड़ रुपये का प्रस्ताव ठुकरा दिया है, जिससे उनके पेड़ और छह इमारतें खतरे में हैं. पावर लाइन के लिए उनके ड्राइव-वे के पास 130 फीट ऊंचा टावर बनाया जाना है.

डेटा सेंटर की पावर लाइन

अमेरिकन ट्रांसमिशन कंपनी (ATC) डेटा सेंटर के लिए जिस पावर लाइन को डालने के लिए मुआवजा देने की पेशकश कर रही है, उस जमीन को ज़ेलेंका और उनकी पत्नी ने साल 1990 में खरीदा था. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 6 महीने की मेहनत के बाद घर तैयार हुआ जिसमें घर से लेकर गैराज सहित छह इमारतें हैं. 1000 फीट लंबे और 75 फीट चौड़े इस प्लॉट में देवदार, ओक, ऐश आदि के पुराने पेड़ भी लगे हैं.

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अमेरिकन ट्रांसमिशन कंपनी ने संपत्ति के नुकसान के लिए 81,000 डॉलर और तुरंत समझौते पर हस्ताक्षर करने पर 50,000 डॉलर का अतिरिक्त भुगतान देने की पेशकश की थी. लेकिन ज़ेलेंका का कहना है कि यह मुआवजा उनकी इमारतों को फिर से बनवाने या संपत्ति के वास्तविक नुकसान की भरपाई करने के लिए नाकाफी है. ज़ेलेंका और उनकी पत्नी (जो गंभीर पार्किंसंस बीमारी से पीड़ित हैं) के लिए वहां से कहीं और जाना मुमकिन नहीं है.

ज़ेलेंका को इस बात से भी चिंतित हैं कि कंपनी 'एमिनेंट डोमेन' (जमीन अधिग्रहण कानून) का इस्तेमाल करके उनकी जमीन जबरन न ले ले. उनका तर्क है कि यह पावर लाइन आम जनता के बजाय एक प्राइवेट डेटा सेंटर के लिए है, इसलिए इस पर यह नियम लागू नहीं होना चाहिए. वो अपने पड़ोसी वकीलों के साथ मिलकर इस मामले को संघीय अदालत (Federal Court) में चुनौती दे रहे हैं.

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डेटा सेंटर्स का भी विरोध

आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि एआई कंपनियों के लिए बनाए जा रहे डेटा सेंटर्स का विरोध अमेरिका में कोई नया नहीं है. दुनिया में सबसे ज्यादा डेटा सेंटरों वाले अमेरिकी राज्य वर्जीनिया में ऐमजॉन ने 2024 में आम लोगों की चिंताओं के कारण तीन डेटा सेंटर्स के प्रस्ताव को रोक दिया था. मतलब पीने लायक साफ पानी, बिजली, शोर, हरियाली को लेकर चिंता तो हर जगह हो रही है. इस केस में आगे क्या होगा वो वाकई देखने वाली बात होगी.

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