मध्य प्रदेश सरकार में किसकी सुनी जा रही है और किसकी नहीं? ये सवाल सिर्फ विपक्ष नहीं उठा रहा. अब सरकार के अपने ही मंत्री और विधायक भी अधिकारियों के रवैये से परेशान होने की शिकायत कर रहे हैं.
अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे शिवराज सिंह चौहान, कहा- 'जुल्म की इंतहा हो गई है यहां'
मध्य प्रदेश के कोसमी गांव में 12 परिवारों के घरों पर बुलडोज़र चल गया. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि उन्होंने पहले ही परिवारों के घर नहीं गिराने का निर्देश दिया था. फिर भी ये कार्रवाई हुई. अब वे खुद गांव पहुंचे और अफसरों को फोन किया.

मध्य प्रदेश में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का गुस्सा इसी नाराजगी की एक बड़ी मिसाल है. जिस इलाके से शिवराज कई बार विधायक रहे, वहां उन्हें धरने पर बैठना पड़ा. जिस गांव के आदिवासियों के घर नहीं तोड़ने के निर्देश देने का दावा किया, वहीं 12 परिवारों के घरों पर बुलडोजर चल गया. खेतों में खड़ी फसल कुचल दी गई और एक कुएं को मिट्टी से भरने का भी आरोप है.
इसके बाद शिवराज सिंह चौहान खुद गांव पहुंचे. पीड़ित परिवारों के साथ धरने पर बैठे. अधिकारियों को फोन लगाया और सख्त कार्रवाई की मांग की.
मामला मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव का है. ये गांव बुधनी विधानसभा क्षेत्र में आता है और शिवराज सिंह चौहान के विदिशा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. 11 अक्टूबर को वन विकास निगम और वन अमले की कार्रवाई में बारेला आदिवासी समुदाय के 12 परिवारों के मकान तोड़े जाने की खबर सामने आई. ग्रामीणों का आरोप है कि उनके घर उजाड़ दिए गए, खेतों में खड़ी मक्का और तुअर की फसल नष्ट कर दी गई और पानी के लिए इस्तेमाल होने वाले कुएं को भी मिट्टी से भर दिया गया.
इसके विरोध में ग्रामीण धरने पर बैठ गए. जब इस घटना की जानकारी शिवराज सिंह चौहान को मिली, तो वो खुद कोसमी गांव पहुंचे. वहां प्रभावित परिवारों से मुलाकात की. महिलाओं और बच्चों की हालत देखकर नाराजगी जताई और धरने पर बैठ गए.
मौके पर वन विकास निगम और प्रशासन के किसी वरिष्ठ अधिकारी के मौजूद नहीं होने पर भी उन्होंने सवाल उठाए. शिवराज ने इसे अपने क्षेत्र में जुल्म और अन्याय की हद बताया है. अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि गरीबों के घर उजाड़ने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए.
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात ये है कि शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि करीब एक साल पहले भी उन्होंने इस मामले में अधिकारियों से बात की थी. आदिवासी परिवारों के घर नहीं गिराने का निर्देश उन्होंने दिया था. उनकी शिकायत के बाद सीहोर के तत्कालीन DFO मगन सिंह डाबर को पद से हटाए जाने की बात भी सामने आई थी. इसके बावजूद 11 अक्टूबर को ये कार्रवाई हुई.
मामला सामने आने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी अशोक बरनवाल से फोन पर बात की. उन्होंने प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल इंतजाम करने के लिए भी कहा. उन्होंने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भी फोन कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी. साथ ही सीएम मोहन यादव से बात कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया.
शिवराज सिंह चौहान ने प्रभावित परिवारों को नए पक्के मकान बनवाने का भरोसा दिया है. उन्होंने कहा कि जब तक नए घर तैयार नहीं हो जाते, तब तक परिवारों के रहने और खाने की व्यवस्था की जाए.
ये भी पढ़ें: MP में नहीं मिलेगा 27% OBC आरक्षण, खाली पदों पर अनारक्षित अभ्यर्थियों की नियुक्ति होगी
विपक्ष ने उठाए सवालअब जरा इस मामले का राजनीतिक पहलू भी समझिए. मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक्स पर पोस्ट किया. उन्होंने लिखा कि क्या बीजेपी की आंतरिक राजनीति में इतनी अदावत हो गई है कि पूर्व मुख्यमंत्री की बात को नजरअंदाज करना मौजूदा मुख्यमंत्री का धर्म बन गया है?
कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी के भीतर की राजनीतिक खींचतान का खामियाजा आम लोगों, खासकर आदिवासी परिवारों को भुगतना पड़ रहा है.
वहीं, वन विभाग की ओर से कार्रवाई को अतिक्रमण हटाने की मुहिम बताया गया है. ऐसे में ये जानना भी जरूरी है कि कार्रवाई किस आधार पर हुई, प्रभावित परिवारों के दावों और उनके रहने की स्थिति की जांच कैसे की गई और पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद कार्रवाई क्यों हुई? इन सवालों के स्पष्ट जवाब सामने आना अभी बाकी है.
वीडियो: शिवराज सिंह के बेटे कार्तिकेय से जुड़े मानहानि मामले में राहुल गांधी को राहत









