एक हिंदू धार्मिक संगठन BAPS के कहने पर एफिल टावर की महिला कर्मचारियों को उनके वर्कप्लेस से हटाने के मामले में बड़ा एक्शन हुआ है. एफिल टावर का मैनेजमेंट और ऑपरेशन देखने वाली 'सोसाइटी डी'एक्सप्लॉइटेशन डे ला टूर एफिल' (SETE) के चीफ पैट्रिक ब्रैंको रुइवो ने पद छोड़ने का ऐलान किया है. 5 सितंबर को हिंदू धार्मिक संगठन 'बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था' (BAPS) की मांग पर फीमेल स्टाफ को हटा दिया गया था. इसके बाद पेरिस में बड़ा विवाद हुआ. कर्मचारियों के विरोध के चलते 7 सितंबर को एफिल टावर को कुछ समय के लिए बंद भी करना पड़ा.
हिंदू संगठन के कहने पर महिला कर्मियों पर लगाई रोक... अब एफिल टॉवर के बड़े अफसर की नौकरी गई
एफिल टावर के मैनेजमेंट संगठन SETE ने कबूला कि हिंदू संगठन BAPS के डेलीगेशन ने 'महिलाओं के साथ इंटरैक्शन' को कम करने के लिए दौरे को एडजस्ट करने की रिक्वेस्ट की थी. SETE ने माना कि 'इन शर्तों को नहीं मानना चाहिए था.'

पैट्रिक ब्रैंको रुइवो साल 2018 से इस SETE के डायरेक्टर हैं. वे इस साल के आखिर में अपना पद छोड़ देंगे. फ्रांसीसी अखबार ले मोंडे की रिपोर्ट के मुताबिक, एक इंडिपेंडेंट फर्म की जांच के बाद SETE ने उनके पद छोड़ने की जानकारी दी. SETE ने एक बयान में कहा कि जांच में एफिल टावर के कामकाज में खामियां और कमियां मिलीं. इनकी वजह से महिला स्टाफ मेंबर्स को गलत तरीके से हटाया गया.
एफिल टावर पर क्यों बढ़ा बवाल?एफिल टावर के स्टाफ ने एक बयान में कहा कि उन्हें निर्देश मिले थे, जिसके कारण महिला कर्मचारियों को साइडलाइन कर दिया गया. कुछ पोजिशन में उनकी जगह पर मेल स्टाफ को तैनात किया गया. बयान में कहा कि महिला स्टाफ को महज उनके जेंडर की वजह से उनके वर्कप्लेस से ओझल कर दिया गया. SETE के बयान में कहा गया,
"महिला कर्मचारियों को उनके जेंडर की वजह से किनारे कर दिया गया, उनकी जगह किसी और को रख लिया गया और उन्हें ओझल कर दिया गया. कुछ पोजिशन पर उनकी जगह पुरुषों को रख लिया गया. सभी महिला कर्मचारियों को निर्देश दिया गया कि जब BAPS डेलीगेशन मौजूद हो, तो वे कुछ खास इलाकों से ना गुजरें या उन्हें पार ना करें."
तब SETE ने कबूला कि हिंदू डेलीगेशन ने 'महिलाओं के साथ इंटरैक्शन' को कम करने के लिए दौरे को एडजस्ट करने की रिक्वेस्ट की थी. SETE ने माना कि 'इन शर्तों को नहीं मानना चाहिए था.'
महिला स्टाफ को हटाए जाने पर स्टाफ यूनियन ने प्रोटेस्ट शुरू कर दिया. विरोध-प्रदर्शन के चलते एफिल टावर को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया. बाद में बातचीत के बाद एफिल टावर का गेट खोल दिया गया.
पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोयर ने भी मामले की जांच का आदेश दिया. उन्होंने X पर एक पोस्ट कर इस घटना की निंदा की. मेयर ने यूनियन के प्रोटेस्ट का समर्थन किया और कहा ‘जेंडर के आधार पर ये तय नहीं किया जाएगा कि कौन कहां काम करेगा. महिलाओं को हर जगह जाने की आजादी है. ये हमारे संस्कार नहीं हैं.’
इस घटना पर फ्रांस में कई लोगों ने विरोध जताया. फ्रांस की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष याएल ब्रॉन-पिवे ने कहा कि विदेशी मेहमानों की मांग पूरी करने के लिए महिलाओं को पीछे नहीं किया जा सकता. दूसरे लोगों का स्वागत करना फ्रांस के मूल्यों को छोड़ना नहीं है.
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BAPS की माफीदूसरी तरफ, हिंदू संगठन BAPS ने ऐसे किसी आरोप से इनकार किया. हालांकि, BAPS ने कहा कि अगर इस घटना से किसी की भावनाएं आहत हुई हों तो माफ कर दें.

5 सितंबर को BAPS का एक डेलीगेशन ‘BAPS स्वामीनारायण हिंदू मंदिर’ के उद्घाटन के लिए पेरिस पहुंचा था. इसमें 100 लोग शामिल थे. उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वर्चुअली शामिल हुए. पीएम मोदी ने कार्यक्रम में भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों पर बात की.
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