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बाबू गेनू: स्वदेशी के लिए आंदोलन कर रहे थे, ट्रक चढ़ाकर मार डाला गया

शहादत के वक़्त बाबू गेनू की उम्र सिर्फ 22 साल थी.

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अंग्रेजों से लड़ाई में न जाने कितने ज्ञात-अज्ञात लोगों ने प्राणों की आहुति दी है. छोटे-बड़े अनगिनत क्रांतिकारियों की शहादत ने आज़ादी की लड़ाई में अपना-अपना कीमती योगदान दिया है. ऐसे ही एक शहीद को महाराष्ट्र में तो पूरा सम्मान हासिल है लेकिन शेष भारत में उन्हें ज़्यादा लोग नहीं पहचानते. हम बात कर रहे हैं महज़ 22 साल की उम्र में स्वदेशी आंदोलन में अपनी जान दे चुके बाबू गेनू सैद की.

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