“दान की बछिया के दांत नहीं गिने जाते” कहावत का मतलब तो पता ही होगा आपको. यहां बात हो रही है मुफ्त के माल की. आजकल तो फ्री देने की जैसे होड़ मची हुई है. मोबाइल पर डेटा फ्री, खाने वाले ऐप्स पर खाना फ्री. कई सरकारें तो मुफ्त स्मार्टफोन और लैपटॉप देने की भी वादे करती हैं. मुफ्त में कोई सामान मिलना अच्छी बात है, लेकिन क्या मुफ्त के चक्कर में आपको कुछ कम तो नहीं मिलता. या फिर जो आपको मिल रहा है उसकी क्वालिटी तो प्रभावित नहीं हो रही है. देखें वीडियो.
यूट्यूब प्रीमियम, ट्रूकॉलर जैसे ऐप्स का सब्सक्रिप्शन लेने पर आपको कई सारे नए फीचर्स मिलेंगे
सीमित फीचर्स के साथ लोग इन ऐप्स को फ्री में भी यूज करते हैं.
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