गुजरात सरकार ने बिलकिस बानो केस के 11 दोषियों को रिहा करने का जो फैसला लिया है वो मुंबई ट्रायल कोर्ट के विचार के खिलाफ है. मुंबई ट्रायल कोर्ट ने ही साल 2008 में इन दोषियों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी.
बिलकिस बानो के दोषियों की रिहाई के लिए गुजरात सरकार ने क्या खेल किया?
गुजरात सरकार ने बताया उन्होंने ट्रायल कोर्ट की सलाह के खिलाफ जाकर दोषियों को क्यों रिहा किया?
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स्क्रॉल पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, जेल एडवाइज़री समिति के एक सदस्य ने बताया कि मुंबई की ट्रायल कोर्ट ने माफी नीति के तहत लगाई याचिका (Remission plea) पर रज़ामंदी नहीं दी थी. इस बारे में गुजरात सरकार से सवाल किया गया.पूछा गया कि उन्होंने ट्रायल कोर्ट की सलाह के खिलाफ जाकर दोषियों को क्यों रिहा किया? गुजरात के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) राज कुमार ने कहा,
"गुजरात सरकार ने जेल एडवाइज़री बोर्ड के सुझावों के साथ जाने का फैसला किया था. बोर्ड ने कहा था कि दोषियों को रिहा किया जाना चाहिए. जेल एडवाइज़री कमिटी ने दोषियों के स्वास्थ्य, जेल में उनका व्यवहार और मानसिक स्थिति जैसी चीजों को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया है. वहीं ट्रायल कोर्ट के जज ने सुनवाई के दौरान जो देखा-सुना उस आधार पर अपनी राय बनाई होगी." देखिए वीडियो.
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