किसी फिल्म में सुना था कि ‘युद्ध इंसान को वक्त से पहले बड़ा बना देता है.’ लेकिन एक्ट्रेस ज़ायरा वसीम को युद्ध ने नहीं, बल्कि ‘दंगल’ ने बड़ा बना दिया. बच्चे का बड़ा होना भले अच्छा न हो, लेकिन बच्चे की उम्र में ही बड़ा हो जाना बड़ा खूबसूरत होता है. ये हमें ज़ायरा वसीम बताती हैं.
'आमिर अपने काम के पीछे इतने पागल हैं कि कभी-कभी लगता है उन्हें बीमारी है'
लल्लनटॉप शो में ज़ायरा वसीम ने की लल्लनटॉप बातें.

7 अक्टूबर को लखनऊ के 'दी लल्लनटॉप शो में' जब ज़ायरा ने एंट्री ली, तो लगा कि कोई अल्हड़ सी लड़की नपी-तुली जबान में बनावटी जवाब देगी. लेकिन जब ज़ायरा बोलना शुरू करती हैं, तो ऐसा लगता है कि कोई भयानक एक्सपीरियंस्ड एक्ट्रेस अपने फलसफे शेयर कर रही है.
आइए जानें ज़ायरा को, उनके सफ़र को.
1.पहली मेमरी सिनेमा की
मैंने बहुत कम फ़िल्में देखी हैं. जब भी आमिर के साथ सेट पर होते थे, तब वो कुछ न कुछ यादें बताते थे फिल्मों की. इस फिल्म के वक़्त ये हुआ, उस फिल्म के वक़्त ऐसा हुआ. मुझे कुछ पता नहीं होता था. मुझे 'शोले' याद है थोड़ी. थ्रिलर फ़िल्में देखते वक़्त मैं बेचैन हो जाती हूं. पता नहीं हैप्पी एंडिंग होगी कि नहीं? ज़्यादा फ़िल्में मैंने देखी नहीं बचपन में.

#. दंगल कैसे मिली?
मैं ज़्यादा लोगों से बात नहीं करती थी. अपने में खोई रहती थी. स्कूल में एक प्ले में हिस्सा लिया. 'मेरा क्या कसूर" नाम था प्ले का. भ्रूण ह्त्या पर था. सब रोने लग गए थे. मेरी प्रिंसिपल ने मेरे टैलेंट को पहचाना. फिर एक दिन एक फिल्म क्रू स्कूल आया. वो किसी मूवी के लिए ऑडिशन ले रहा था. प्रिंसिपल ने मुझे बुलाया. उनसे मिलाया. हालांकि उस फिल्म के लिए सिलेक्शन नहीं हुआ. लेकिन एक ऐड के लिए हो गया. टाटा स्काई की ऐड. उसके बेसिस पर दंगल के ऑडिशन के लिए कॉल आया. ऐसे मिली दंगल.

ज़ायरा बताती हैं कि ‘दंगल’ की शूटिंग के समय उन्हें आमिर खान और बाकी टीम ने कैसे पैंपर किया, कैसे ख्याल रखा, पता नहीं आगे की फिल्मों में ऐसा ट्रीटमेंट मिले या न मिले. ज़ायरा ये भी बताती हैं कि कैसे उनकी मां बाकी सारी मांओं की तरह कुछ ज्यादा ही फिक्र करती हैं.
# मां का कैसा रिएक्शन रहा?
मम्मी ने कहा कि 6 महीने के लिए घर से बाहर जाने की इजाज़त नहीं मिलेगी. बच्चों के घर से बाहर रहने पर मांए ड्रैमेटिक हो जाती हैं. मैं ट्रक के नीचे आ जाऊंगी, मुझे कुत्ता खा जाऊंगा. इस तरह के ख्याल आते हैं दिल में.
पहली फिल्म के दौरान खूब पैंपर किया गया था. आमिर सर और टीम ने खूब ध्यान रखा.
# दंगल में बाल मर्ज़ी से काटे थे?
हां. पहले मुझे लगा था कि मज़ाक कर रहे हैं. कई बार बोला कि बाल काटे जाएंगे, तो मैंने कहा हां, ठीक है. फिर कॉन्ट्रैक्ट साइन करने के टाइम भी पूछा गया कि बाल काटे जाएंगे, आप साइन कर रही हैं न? लेकिन फिर उन्होंने बाल काट दिए.
शूटिंग के दौरान एक बच्चा आया और बोला कि भइया आप दंगल में हो न? मुझे बहुत गुस्सा आया.

# परफेक्शनिस्ट आमिर
आमिर सर और उनकी टीम परफेक्शन के पीछे इतना पागल है कि कभी-कभी लगता है कि सबको OCD है. बहुत जुनून से काम करते हैं सारे.
अगर एक्ट्रेस नहीं होती, तो उस समय भी पढ़ रही होती. प्लान्स बनते नहीं हैं, इसलिए कुछ प्लान नहीं करती.
# फिल्म कैसी भी बने मेहनत लगती ही है
फिल्म देखकर लोग एक बार में जज कर लेते हैं कि अच्छी फिल्म है या बुरी फिल्म है, लेकिन स्क्रिप्ट कितनी भी बुरी हो, उसे बनाते में बहुत मेहनत लगती है. जो स्क्रिप्ट मुझे कश्मीर न लेकर जाए और मुंबई में ही रखे, वो फिल्म करना चाहूंगी. क्योंकि स्क्रिप्ट सुनकर मुझे हर बार सब कुछ समझ में नहीं आता है.
# रोल मॉडल के कॉन्सेप्ट से अग्री नहीं करती
दंगल की प्रैक्टिस के वीडियो देखकर आमिर खान प्रोडक्शंस के किसी ने मुझसे पूछा था कि क्या मैं सीक्रेट सुपरस्टार करना चाहूंगी? मैं ईद के लिए कश्मीर वापस गई. फिर आई.
जब मेरे घर में तीसरी बिल्ली आई, तो मम्मी के साथ युद्ध हो गया था. पापा पजेसिव हैं, लेकिन ओवर प्रोटेक्टिव नहीं हैं.
# हाजिरजवाब ज़ायरा
जब ज़ायरा से पूछा गया कि लड़के लड़की को इम्प्रेस करने के लिए क्या करें? तो ज़ायरा चहकते हुए बोली,
नहा लिया करो यार!
लोगों को पढ़ी-लिखी पत्नी चाहिए. और वो करियर ओरिएंटेड भी न हो ऐसा चाहते हैं. ऐसा कैसे हो सकता है?
हाज़िरजवाबी का एक और नमूना तब मिला जब ज़ायरा से बोला गया कि लड़के लड़कियों के बारे में स्टीरियोटाइपिंग करते हैं, इसपर वो बोली,
हम भी तो करते हैं लड़कों की. अभी मैंने कहा था कि लड़के नहाते नहीं हैं. वो भी तो वही था.
देखिए ज़ायरा वसीम का लल्लनटॉप इंटरव्यू:













