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टीवी के प्रेशर ने महान वेस्ट इंडीज़ से कराया ऐसा काम, लोग हैरान रह गए!

क़िस्सा 'टाइम वेस्ट' कर हालात बदलने वाली टीम का.

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वेस्टइंडीज़ टीम (फोटो - Getty Images)

स्पिरिट ऑफ क्रिकेट? वो क्या चीज़ है. हमें तो हर क़ीमत पर जीतना है. अरे, ऐसा हम नहीं कह रहे. पहले की कई टीम्स ऐसा सोचती थीं. और आज हम आपको ऐसा ही एक क़िस्सा सुनाएंगे. इस क़िस्से के बाद आप जानेंगे, कि कैसे सीरीज़ बचाने के लिए वेस्टइंडीज़ के कप्तान ने बीच मैच टाइमपास करना शुरू कर दिया था. और इंग्लैंड को सीरीज़ नहीं जीतने दी थी.

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ये बात साल 1990 की है. इंग्लैंड की टीम वेस्टइंडीज़ के दौरे पर थी. उनके साथ पांच टेस्ट और पांच मैच की वनडे सीरीज़ खेलने के लिए. दौरे पर उन्होंने कई टूर मैच भी खेले थे. और पहले के ज़माने में ऐसे टूर बड़े लम्बे हुआ भी करते थे. और इन टूर्स में टेस्ट, वनडे, टूर मैच सब मिला जुलाकर खेले जाते थे.

यहां पर भी ऐसा ही हुआ. पहले दो वनडे मैच हुए और फिर पहला टेस्ट मुकाबला. किंग्सटन में हुए पहले टेस्ट मैच को इंग्लैंड ने नौ विकेट से जीता था. इसके बाद फिर दो वनडे मैच हुए और फिर दूसरा टेस्ट मुकाबला जॉर्ज टाउन में. ये मैच बारिश के कारण बिना एक गेंद डाले रद्द हो गया.

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# Desmond Haynes

अब नंबर आया तीसरे टेस्ट मैच का. जिसमें स्टैंड इन कप्तान डेसमंड हैन्स ने जीत की जिद को बहुत ही ज्यादा सीरियसली ले लिया. पोर्ट ऑफ स्पेन में खेले गए इस मैच की शुरुआत में सब सही चल रहा था. इंग्लैंड ने टॉस जीतकर वेस्टइंडीज़ को पहले बल्लेबाजी के लिए बुला लिया था. गस लॉगी के 98 रन के दम पर टीम ने पहली पारी 199 रन बनाए.

जवाब में इंग्लैंड के कप्तान ग्राहम गूच ने अपनी टीम को मस्त शुरुआत दिलाई. उन्होंने वेन लार्किंस के साथ मिलकर शतकीय साझेदारी की. ये जोड़ी और ज्यादा कहर ढाती उससे पहले ही कर्टली एम्ब्रोस और इयन बिशप ने विकेट चटकाना शुरू कर दिया. दोनों ने मिलकर सात विकेट निकाले. और इंग्लैंड को 288 रन पर रोक दिया.

जब वेस्टइंडीज़ अपनी दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने आई, तो उन्होंने 239 रन बनाए. यानी अब इंग्लैंड को जीत के लिए बनाने थे 151 रन. लेकिन इस बार उनके ओपनर्स फेल रहे. ग्राहम गूच रिटायर्ड हर्ट हो गए. और एलेक स्टीवर्ट, एलन लैम्ब ने कुछ रन्स जरुर जोड़े. लेकिन इस बीच बारिश आई, जिसकी वजह से मैच कुछ देर तक रूका रहा.

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और जब बारिश गई, तब स्काई स्पोर्ट्स के अनुसार क़रीबन 30 ओवर के अंदर जीत के लिए 78 रन बनाने थे. दूर से ऐसा लग रहा था कि ये मैच इंग्लैंड की झोली में जा रहा है. वो इस सीरीज़ में 2-0 की बढ़त लेने वाले हैं. और इसके साथ ये भी तय हो जाता कि इंग्लैंड ये सीरीज़ तो नहीं ही गंवाता.

लेकिन तभी वेस्टइंडीज़ ने कहा, ऐसे कैसे?

वेस्टइंडीज़ के पास सीरीज़ बचाने का एक ही तरीका था- इंग्लैंड को ये मैच ना जीतने देना. वेस्टइंडीज़ ड्रॉ के लिए जाने में खुश थी, क्योंकि इससे सीरीज़ खुली रहती. लेकिन समस्या ये थी कि स्कोर इतना बड़ा नहीं था कि इंग्लैंड चेज़ ना कर पाए. ऐसे में यहां पर कप्तान डेसमंड हैन्स ने दिमाग लगाया. और मैच में टाइमवेस्ट करना शुरू कर दिया.

उन्होंने खूब ब्रेक्स लिए. वेस्टइंडीज़ के गेंदबाज अपने रन-अप के दौरान बीच में रुकने लगे. मैदान को सूखा करने के लिए धूल लाई गई. और इन सबके बीच लाइट्स कम होती गई और मैच ड्रॉ हो गया. वेस्टइडीज़ टीम अपने प्लान में सफल रही.

इसके बाद हैन्स ने पिच और अपने गेंदबाजों के लिए कहा,

‘ये खेलने के लिए सही नहीं थी. जब इयन बिशप गेंदबाजी के लिए आ रहे थे, तब पानी के छपछपाने की आवाज़ आ रही थी.’

साथ ही उन्होंने एक बहाना भी बनाया. क्या था वो बहाना, खुद हैन्स से सुनिए,

‘मुझे लगता है कि हम पर खेलने का प्रेशर इसलिए था, क्योंकि यह पहली बार था जब हम कैरेबियन देशों में टीवी पर प्रसारित हुए थे. मैंने रुल्स के हिसाब से खेला. मैंने कुछ भी ऐसा नहीं किया जो गूच नहीं करते.’

अंत में बताते चलें, इस मैच को ड्रॉ करवाने के बाद वेस्टइंडीज़ ने अगले दो मुकाबले भी जीते. और सीरीज़ को 2-1 से अपने नाम किया. यानी हैन्स का प्लान सफल रहा.

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