दी लल्लनटॉप शो. ये शो नहीं, एक दावत का नाम है. वो दावत, जहां आपको सिनेमा की दुनिया के अपने चहेते मेहमान मिलते हैं. उनके किस्से, उनकी बातें, उनका काम. सब भर-भरकर बहाया जाता है. यही दावत हुई थी मुंबई में, जहां 'संगत' में बैठे थे लिरिसिस्ट स्वानंद किरकिरे, पुनीत शर्मा, इरशाद कामिल और राजशेखर जैसे दिग्गज. तो लीजिए मुंबई के लल्लनटॉप शो का सारा हासिल.
इससे ज्यादा धांसू शाम कहीं दिखे, तो मेल करना
मुंबई के दी लल्लनटॉप शो की 'संगत' का सारा हासिल.

पुनीत शर्मा
'रिवॉल्वर रानी' और 'औरंगजेब' जैसी फिल्मों के लिरिक्स लिखने वाले पुनीत शर्मा ने एक कविता सुनाई. ये कविता उनके एक प्ले में इस्तेमाल हुई थी. प्ले की कहानी में एक गांव था, जहां गड्ढा खोदकर कपड़े, बर्तन और साहित्य भरा जा रहा था. गांव का ही एक बच्चा जब इस पर सवाल करता है, तो पीट दिया जाता है. लेकिन उस बच्चे के पास कहने के लिए बहुत कुछ होता है. सुनिए इसे कविता की शक्ल में.
https://youtu.be/2CTcZqn8PWoस्वानंद किरकिरे
स्वानंद जब भी कहीं जाते हैं, उनसे एक ही गुजारिश की जाती है. 'सर, 'बहती हवा सा था वो' सुना दीजिए.' लेकिन, हवा तो बहुत बह चुकी है. अब कुछ सपने-वपने देखे जाएं, तो कुछ बात बने. तो 'संगत' में स्वानंद ने एक सपना सुनाया. उन्होंने एक प्ले किया था, जिसका नाम था 'आओ साथी सपना देखें'. उसी का एक गीत और स्वानंद की पसंद का भी कुछ-कुछ.
इरशाद कामिल
हिंदी सिनेमा के मकबूल लिरिसिस्ट. इरशाद कामिल. इनका नाम लेना ही इनका इस्तकबाल करने सरीखा होता है. 'संगत' में गाने के माहौल में जब इनसे कुछ सुनाने के लिए कहा गया, तो बोले, 'मैं आपको नाउम्मीद और मायूस करने की पूरी कोशिश करूंगा.' कविता सुनाते हैं कि 'कोई सपना चुभ न जाए मेहंदी वाले पांव में'. पूरी सुनिए. चुभेगी नहीं, सहलाएगी.
https://youtu.be/ZmAQ_RdbjUQ रीना पारेखटीवी इंडस्ट्री के लिए लिखने वाली रीना पारेख. मुंबई में रहती हैं. रोज सैकड़ों लोगों से पाला पड़ता है. उन्हें देखती हैं. पाती हैं कि रोमांस पीछे छूट रहा है. हम उसे पीछे छोड़ आए हैं. उन्होंने एक कविता लिखी है इस पर, 'रोमांस को हम कहीं पीछे छोड़ आए हैं, अब बचा है तो केवल रिश्ता.' सुनिए. आपको अपनी सी कहानी लगेगी.
https://youtu.be/-g_EAt4n80Uगौरव सोलंकी
राइटर हैं. राइटते हैं. अपनी कविता में हमें बताते हैं कि घर में दो कमरे हों या हजार, कत्ल करने की जगह हमेशा मौजूद रहती है. वो बताते हैं कि कौन हमें खिड़की खोलकर कूद जाने से रोकता है. गौरव वो हैं, जिन्हें अपने किसी अजीज की आंखें उस फौजी की आंखों जैसी लगती हैं, जिसने अभी तक एक भी लाश नहीं देखी है. कसम से. लल्लनटॉप. पढ़ते क्या हैं! सुनिए न.
राजशेखर
अहा, राजशेखर का वीडियो भी आ गया. ये गाने लिखते हैं. 'तनु वेड्स मनु' के दोनों पार्ट्स के गाने इन्होंने ही लिखे हैं. बिहार से आते हैं, लेकिन गानों में हरियाणवी ऐसी डालते हैं, जैसे वहीं का दूध पीकर बड़े हुए हों. गाने तो अकेले ही लिखते हैं, लेकिन जब सुनाते हैं, तो इन्हें किसी का साथ चाहिए होता है. साथ मिला, तो इन्होंने एक गाना सुनाया, जिसके किरदार में उड़ीसा के नियमगिरी पहाड़ के पास बसा गांव भी है. सुनिए.
https://youtu.be/9TejRXkbvXUअमितोष नागपाल
इन्हें तो जानते ही होंगे. फिल्म 'बेशरम' में रणबीर कपूर के कर्रे वाले दोस्त बने थे. एकदम जिगरी. 'दबंग' में भी थे. थिएटर करते हैं. लिखते हैं. गाते हैं. इन शॉर्ट, मल्टीटैलेंटेड हैं. ये भी दी लल्लनटॉप शो की संगत में आए थे. अपनी मंडली के साथ. आप तो देखिए बस कि इन्होंने क्या दिखाया... क्या सुनाया.
https://youtu.be/vD2C9A6LgL0पुणे से इंजीनियरिंग करके आए सिंगर तन्मय के पास अलग ही हुनर है. इंजीनियर बनने का नहीं, गिटार पर लोकगीत सुनाने का. बिसमिल्लाह कीजिए.
https://youtu.be/AK1zMyhvDBAऔर इन बड़ी-बड़ी बातों के बीच आईं सिंगर रचिता अरोड़ा. क्लासिकल गाया और क्या तो गाया. रिपीट लगाकर सुनने लायक. लीजिए.
https://youtu.be/K3zQ6BeHDLA'संगत' के मंच पर रोहित शर्मा भी थे. क्रिकेटर नहीं, सिंगर. इन्होंने भी क्लासिकल सुनाया. हमने तो सुन लिया. आप भी सुनिए.
https://youtu.be/JkD-CgS9l64'संगत' में हुसैन भी थे. कविताओं के दौर में उन्होंने भी जुगलबंदी दिखाई. सुनाया, 'सच का पत्ता कहीं नहीं है'
https://youtu.be/1tVE44eFikgलल्लनटॉप शो में आए सिंगर नीरज पांडेय ने भी एक कविता सुनाई. एक बिंदु पर. वो बिंदु, जो कोई अजीज उन्हें छोड़ते हुए थमा गया था. सुनिए.
https://youtu.be/hX3kavVEuCs और आखिर में पुनर्वसु मालवीय का देसी तड़का. एकदम देसी. सुनिए. https://youtu.be/YYHNhhNFCT8ये भी देखें:
बॉलीवुड के 3 शानदार लिरिसिस्ट से लल्लनटॉप बातचीत
मिलिए उस गीतकार से, जिसके बोल सलमान खान ने गाए
देश की सबसे अच्छी फ़िल्में लिखने वालों से मिलोगे?
"ऐड टीवी पर नहीं, आपके दिल में चलना चाहिए"












