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श्रीसंत को मंदिर में दे आए थे पिता? पूर्व क्रिकेटर ने सुनाई बचपन की कहानी

श्रीसंत जब महज छह हफ्ते के थे तब उनकी तबीयत काफी खराब हो गई. डॉक्टर्स ने परिवार वालों को बताया कि श्रीसंत के पेट में ट्यूमर है. उनके बचने की उम्मीद बहुत कम थी.

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श्रीसंत के पिता ने उन्हें मंदिर में छोड़ दिया था. (Photo-Sreesanth)

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  • श्रीसंत के पिता ने उनकी सर्जरी के लिए घर बेचकर पैसे जुटाए और ठीक होने पर भगवान शिव को एक मन्नत देकर श्रीसंत को मंदिर में छोड़ दिया, जैसा कि उन्होंने वादा किया था।
  • श्रीसंत के पेट में गंभीर ट्यूमर था और पिता ने महंगी सर्जरी के लिए आर्थिक तंगी के बावजूद भी प्रयास किया, जिससे उनकी जान बचाने की कोशिश हुई।
  • श्रीसंत ने मंदिर में रहने और शिव की सेवा करने की शर्त स्वीकार की है तथा अब तक 38 शिव मंदिरों के दर्शन कर चुके हैं, और भविष्य में भी यह अनुष्ठान जारी रखना चाहते हैं।

श्रीसंत के क्रिकेट करियर और विवादों से जुड़ी कई कहानियां आपने सुनी होगी. किस तरह श्रीसंत ने भारत को कई मैच जिताए. किस तरह वह पाकिस्तानियों से भिड़े और किस तरह वह क्रिकेट मैदान से तिहाड़ जेल पहुंच गए. लेकिन, श्रीसंत के बचपन से जुड़ी एक ऐसी कहानी है, जो बहुत कम लोग जानते हैं. श्रीसंत ने दी लल्लनटॉप के शो 'गेस्ट इन द न्यूजरूम' में बताया कि बचपन में उनके पिता उन्हें मंदिर में छोड़ आए थे. 

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पिता ने मंदिर में छोड़ा

श्रीसंत जब महज छह हफ्ते के थे तब उनकी तबीयत काफी खराब हो गई. डॉक्टर्स ने परिवार वालों को बताया कि श्रीसंत के पेट में ट्यूमर है. उनके बचने की उम्मीद बहुत कम थी. श्रीसंत को सर्जरी की जरूरत थी. सर्जरी बहुत महंगी थी. बेटे को बचाने के लिए श्रीसंत के पिता ने घर बहुत कम पैसों में बेच दिए. 

इसके बाद भी श्रीसंत के बचने की उम्मीद नहीं थी. छह महीने तक वह अस्पताल में रहे. तब श्रीसंत के पिता ने मन्नत मांगी. उन्होंने भगवान शिव से बेटे की जिंदगी मांगी. साथ ही यह भी कहा कि अगर श्रीसंत ठीक हो गए तो वह उन्हें मंदिर में दे आएंगे.

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पिता ने पूरी की मन्नत

श्रीसंत कुछ समय बाद ठीक हो गए. डॉक्टर्स ने श्रीसंत को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया. पूरा परिवार बहुत खुश था. लेकिन, पिता को मन्नत याद थी. एक दिन श्रीसंत अपनी मां के साथ सो रहे थे. श्रीसंत के पिता ने बेटे को उठाया और पास के शिव मंदिर चले गए. वहां के पुजारी को अपना बेटा थमाया. मंदिर के पास फूल की माला बनाने वाली औरत ने श्रीसंत की जिम्मेदारी ली. उन्होंने कहा कि श्रीसंत को पालेंगी और वह मंदिर के काम करेंगे. श्रीसंत के पिता रोते हुए वापस घर आ गए.

श्रीसंत बन गए शिव दास

इसके बाद, श्रीसंत की नानी घर पर आईं. वह श्रीसंत को ढूंढने लगीं. जब वह कहीं नहीं मिले तो उन्होंने अपने बेटी और दामाद से पूछा. उन्हें सच्चाई पता चली तो वह बहुत नाराज हो गईं. वह मंदिर गईं और पुजारी से श्रीसंत को वापस मांगा. पुजारी इसके लिए तैयार तो हो गए, लेकिन शर्त भी रखी. शर्त थी कि मंदिर के घड़े में एक सिक्का डाला जाए. 

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साथ ही श्रीसंत को अपनी पूरी जिंदगी शिव का स्मरण करना होगा. अपनी पूरी जिंदगी में 108 शिव मंदिर में जाना होगा. जब श्रीसंत को यह पता चला तो वह खुद शिव के दास बन गए. वह खुद को भक्त नहीं मानते. श्रीसंत अब तक 38 शिव मंदिर के दर्शन कर चुके हैं. वह चाहते हैं कि उनकी जिंदगी लंबी हो ताकी वह यह काम भी पूरा कर सकें. 

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