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गांगुली ने राहुल द्रविड़ के करियर को लेकर किया बड़ा दावा, 'मैने उनका करियर बचाया'

Sourav Ganguly News: सौरव गांगुली ने राहुल द्रविड़ के करियर को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि उनका करियर बचाने के लिए उन्होंने सेलेक्टर्स से लड़ाई की थी. उन्होंने कहा कि मैंने द्रविड़ को ड्रॉप नहीं किया था.

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सौरव गांगुली ने राहुल द्रविड़ का खुलकर समर्थन किया था. (फोटो-PTI)

मार्च 2000 में सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) के रेग्युलर कप्तान बने. उन पर टीम को रीशेप करने की जिम्मेदारी थी. जिम्मेदारी इसलिए भी थी क्योंकि भारत का अगला मिशन 2003 क्रिकेट वर्ल्ड कप था. गांगुली ने टीम इंडिया (Team India) के कप्तान बनने के बाद कुछ कड़े फैसले लिए. उन्होंने अपनी कैप्टेंसी में नए प्लेयर्स को मौका दिया. इसके अलावा, उन्होंने कुछ खिलाड़ियों का खुलकर समर्थन किया. जिन प्लेयर्स को गांगुली ने खुलकर सपोर्ट किया उनमें राहुल द्रविड़ भी थे. वनडे करियर कि शुरुआत में द्रविड़ काफी धीमी बैटिंग करते थे. द्रविड़ को टीम में शामिल करने के लिए अक्सर सेलेक्टर्स और गांगुली के बीच बहस होती थी. पूर्व कप्तान ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में खुलासा किया है कि उन्होंने द्रविड़ का करियर कैसे बचाया?

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द्रविड़ के पक्ष में नहीं थे सेलेक्टर्स

टीम इंडिया का यह ऐसा वक्त था, जब भारतीय सेलेक्टर्स राहुल द्रविड़ को वनडे में चुनने के मूड में नहीं थे. स्ट्राइक रेट की वजह से नेशनल सेलेक्टर्स उन्हें बाहर करना चाहते थे. चयनकर्ता खुद गांगुली के पास आकर द्रविड़ को ड्रॉप करने के लिए कहते थे. लेकिन, सौरव गांगुली ने द्रविड़ का साथ नहीं छोड़ा. वह उनके लिए सेलेक्टर्स के खिलाफ चले गए.

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सौरव गांगुली ने राज शमानी के पॉडकास्ट में कहा,

एक समय था जब लोग मेरे पास आकर कहते थे कि राहुल द्रविड़ का स्ट्राइक रेट अच्छा नहीं है. सेलेक्टर्स कहते थे कि द्रविड़ की जगह किसी दूसरे प्लेयर को चुना जाना चाहिए. क्योंकि वनडे में तेजी से रन बनाने पड़ते हैं. लेकिन, मैंने द्रविड़ को ड्रॉप नहीं किया. अगर ड्रॉप कर देता, तो द्रविड़ का करियर खत्म हो जाता.

गांगुली ने आगे बताया,

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मैं द्रविड़ से अलग से बात करता था. मैं उन्हें खेल में बदलाव लाने के लिए प्रेरित करता था. मैं द्रविड़ से कहता था कि जैम थोड़ा अलग तरीके से खेलना होगा. वह इतने ग्रेट प्लेयर थे कि उन्होंने खुद को ढाल लिया. वह भारत के लिए नंबर-5 पर खेले और विकेटकीपिंग भी की.

टीम को विकेटकीपर बैटर की तलाश थी

भारतीय टीम को उन दिनों एक ऐसे विकेटकीपर की जरूरत थी, जो विकेटकीपिंग करने के अलावा बैटिंग भी कर सके. क्योंकि, बाकी टीमों के पास ऐसे विकेटकीपर थे जो विकेटकीपिंग करने के अलावा धुआंधार बैटिंग भी करते थे. सौरव गांगुली ने राहुल द्रविड़ को विकेटकीपिंग के लिए तैयार किया. वहीं, मोहम्मद कैफ को एक्सट्रॉ बैटर के तौर पर खिलाया.  

गांगुली के मुताबिक,

उन दिनों हमारे पास ऐसा विकेटकीपर नहीं था जो बैटिंग कर सके. श्रीलंका के पास कुमार संगकारा थे. साउथ अफ्रीका के पास मार्क बाउचर थे और ऑस्ट्रेलिया के पास एडम गिलक्रिस्ट थे. ये सभी बैटिंग करते थे. हमारी बैटिंग नंबर-6 के बाद खत्म हो जाती थी. इसलिए हमने द्रविड़ की विकेटकीपर बनाया और मोहम्मद कैफ को नंबर-7 पर खिलाया, जिससे हमारे बैटिंग मजबूत हुई.

टीम में ऑलराउंडर नहीं थे

यह वो दौर था जब टीम इंडिया के पास प्रॉपर ऑलराउंडर नहीं थे. इसलिए उन्होंने सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और युवराज सिंह से बॉलिंग करवाई. सौरव गांगुली खुद भी कुछ ओवर डालते थे. उन्होंने इस ट्रेंड के बारे में कहा,

हमारे पास कोई भरोसमंद ऑलराउंडर नहीं था. मुझे टीम बनानी थी. यही वजह थी कि सहवाग बॉलिंग करते थे. सचिन गेंदबाजी करते थे. युवराज गेंदबाजी करते थे. मैं खुद बॉलिंग करता था. अच्छी टीमों के पास ऑलराउंडर और बैटिंग करने वाले विकेटकीपर होते थे, लेकिन हमारे पास नहीं थे. इसलिए टीम बनाने के लिए यह जरूरी था.

गांगुली सफल कप्तान

सौरव गांगुली अपने समय में भारत के सबसे सफल कप्तान थे. उन्होंने 49 टेस्ट मैचों में भारतीय टीम की कप्तानी की. इस दौरान भारत ने 21 टेस्ट जीते, 13 हारे और 15 ड्रॉ रहे. सौरव गांगुली वनडे कैप्टन के तौर पर भी सफल रहे. उन्होंने 146 वनडे मैचों में भारत की कप्तानी की. इन 146 वनडे में से टीम इंडिया ने 76 मैच जीते और 65 में हार मिली. वहीं, 5 मैचों का रिजल्ट नहीं निकला. 

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