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रोहित-राहुल ने जानबूझकर भारत को T20 वर्ल्ड कप हरा दिया?

ये दोनों गड़बड़ ना करते, तो शायद वर्ल्ड कप हमारा होता!

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रोहित शर्मा-राहुल द्रविड़

कला. मतलब आर्ट. और कलाकार मतलब आर्टिस्ट. वही वाले जिन्हें रणविजय भैया बहुत लाइक करते थे. अपनी फील्ड की बात करें तो यहां अच्छा खेलने वाले को अक्सर कलाकार कहा जाता है. लेकिन इस शब्द का एक और अर्थ होता है. हमारे यहां कलाकार उस व्यक्ति को भी कहते हैं जो बहुत चालू काइंड ऑफ हो. और जिसकी हरकतों से अक्सर आप चौंक जाएं और कहें- बड़े कलाकार हो यार तुम.

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ख़ैर. अब कलाकारी से आगे निकलते हैं और चलते हैं अपनी स्टोरी की ओर. आज के इंट्रो ने अगर आपको कन्फ्यूज किया तो धैर्य रखिए, हम हैं. सारी कन्फ्यूजन दूर करके ही दुकान बढ़ाएंगे. हां तो आज कला और कलाकारी से शुरुआत इसलिए हुई क्योंकि आज के शो में हम कुछ कलाकारों की बात करेंगे.

इन कलाकारों को दुनिया ऑल इंडिया सीनियर सेलेक्शन कमिटी, BCCI या फिर कोच-कप्तान कहकर बुलाती है. इतनी बड़ी जनसंख्या को लपेटने के पीछे का मकसद जानने के लिए परेशान ना हों, वो भी बताएंगे. हां तो इन कलाकारों ने मिलकर कुछ प्लेयर्स चुने थे. जो अभी-अभी ऑस्ट्रेलिया में T20 वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल हारकर न्यूज़ीलैंड की ओर पहुंचे हुए हैं.

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इन प्लेयर्स ने जो किया, वो तो सभी को पता है. सब कुछ शांतिपूर्वक ही हुआ. लेकिन आज बात करेंगे इन प्लेयर्स को चुनने के बाद हुई उस भयानक गलती की, जिस पर हमने अभी तक चर्चा नहीं की है.

# Yuzvendra Tourist Chahal

युज़वेंद्र चहल. लेग स्पिनर हैं. विकेट लेने के लिए जाने जाते हैं. हाल में अच्छी फॉर्म में भी थे. इस साल के 18 T20I मैच में चहल के नाम 21 विकेट्स थे. उनका IPL भी अच्छा गया था. बल्कि यहां तो वह सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बोलर थे. चहल ने IPL2022 की 17 पारियों में 27 विकेट झटके थे. इसके बाद वह वर्ल्ड कप में गए. जहां उन्होंने क्या किया, ये कलाकार लोग ही बता पाएंगे.

क्योंकि हमें तो अंपायर से ठिठोली करने के अलावा उनका कोई और योगदान नहीं दिखा. अब सवाल ये है कि अगर चहल से बोलिंग करानी ही नहीं थी, तो उन्हें ऑस्ट्रेलिया क्यों ले गए? इतना ही नहीं, अभी और सुनिए. वर्ल्ड कप खत्म हो चुका है. इंग्लैंड वाले इसे जीत चुके हैं. और इसका तूफान शांत होने के बाद अब बारी आई आंकड़ों की. क्रिकइंफो ने कुछ आंकड़े जारी किए हैं.

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इन आंकड़ों के मुताबिक बीते वर्ल्ड कप में चहल जैसे रिस्ट स्पिनर्स ने 64 विकेट निकाले. यह विकेट 6.85 की इकॉनमी, 20.44 की ऐवरेज और 17.9 की स्ट्राइक रेट से आए. जबकि इनकी तुलना फिंगर स्पिनर यानी ऑफ स्पिन फेंकने वालों से करें तो उन्होंने 6.93 की इकॉनमी, 22.98 की ऐवरेज और 19.9 की स्ट्राइक रेट से 103 विकेट लिए.

यानी यहां रिस्ट स्पिनर्स ज्यादा कामयाब रहे. जैसा कि इतिहास भी रहा ही है. ऑस्ट्रेलियन पिच पर रिस्ट स्पिनर हमेशा से ज्यादा कामयाब रहे हैं. लेकिन हमने ना तो इतिहास से सीखा और ना ही वर्तमान से. अगर इतिहास पर भरोसा नहीं था, तो कम से कम वर्ल्ड कप में रिस्ट स्पिनर्स के जलवे से ही सबक ले लेते. लेकिन नहीं लिया. क्यों नहीं लिया? क्योंकि हमारे कोच और कप्तान की जोड़ी यही चाहती थी.

और अगर ये लोग यही चाहते हैं, तो यही करेंगे. क्योंकि इन लोगों की इमेज साफ-सुथरी है. ये कूल लोग हैं, जिन्हें गुस्सा नहीं आता. और भी पता नहीं क्या-क्या. कुछ ही महीने पहले तमाम नाटक करके इन्हें टीम इंडिया की बागडोर सौंपी गई. कहा गया कि कोहली-शास्त्री की हॉट ऐज लावा जोड़ी जो नहीं कर पाई, राहुल द्रविड़ और रोहित शर्मा की कूल ऐज कुकंबर जोड़ी वो करेगी.

लेकिन इस जोड़ी ने किया क्या? इन्होंने सबसे बड़े टूर्नामेंट में अपने सबसे मारक हथियार को ही बाहर कर दिया. लगातार बातें होती रहीं लेकिन इन पर कोई असर नहीं पड़ा. और अब, जबकि टूर्नामेंट खत्म हो चला है. सब ओर शांति है. अब वो समय याद करिए, जब कोहली की कप्तानी में भारत की टीम इंग्लैंड में थी. अश्विन को लगातार बाहर रखने पर कितना बवाल मचा था. कितनी बातें की गई. शास्त्री-कोहली के लिए क्या कुछ नहीं कहा गया.

भले ही हम उस सीरीज़ में 2-1 से आगे रहे, लेकिन इससे ज्यादा चर्चा अश्विन के बेंच पर बैठने ने बटोरी. और अब, जबकि हम वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल से बाहर हो चुके हैं, सब लोग रोहित और राहुल को डिफेंड कर रहे हैं. कहा जा रहा है कि और मौके मिलने चाहिए. वैसे मौके तो मिलने ही चाहिए. क्योंकि सिर्फ दो बड़े टूर्नामेंट हारने से कोई खराब कैप्टन या कोच थोड़े हो जाता है.

लेकिन लगातार खराब टीम कॉम्बिनेशन चुनने वाली गलती का क्या किया जाए? अगर ये कहें कि रोहित और राहुल के पास अनुभव की कमी है, तो गाली लिख-लिख आप लोग अपना ही केबोर्ड तोड़ लोगे. और अगर अनुभव के बाद भी ये लोग ऐसा कर रहे हैं, तो फिर तो इस टीम का भविष्य वाकई खतरे में है. और इसे यहां तक लाने की जिम्मेदारी किसकी है, आप भली भांति जानते हैं. आमी किचु बोलबो ना.

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