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कोच-कप्तान ऐसा करेंगे तो कुछ नहीं जीत पाएगी टीम इंडिया!

जीतना है तो इन्हें नमस्ते करे BCCI.

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Rohit Sharma, Team India, T20 World Cup
रोहित की कप्तानी में टीम इंडिया का बुरा हाल (एपी फोटो)
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सूरज पांडेय
10 नवंबर 2022 (अपडेटेड: 10 नवंबर 2022, 08:32 PM IST)
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इंडियन क्रिकेट टीम. T20 वर्ल्ड कप से बाहर हो चुकी है. और जैसा कि रवायत है. हर हार के बाद हार के कारण खोजे जाते हैं. लेकिन ये वाली हार तो इतनी बड़ी है कि इसके कारण एकदम क्रिस्टल क्लियर साफ हैं. बैटिंग में इंटेंट ना दिखना. बोलर्स का ऑफ डे और फील्डर्स का घटिया प्रदर्शन. कप्तान और कोच का क्लूलेस रहना. सही वक्त पर सही फैसले ना ले पाना. इन तमाम कारणों ने मिलकर इंडियन टीम को ऑस्ट्रेलिया में इंसल्ट फील कराई.

और दोबारा ऐसा ना हो, इसके लिए टीम में आमूल-चूल परिवर्तन होने ही चाहिए. और आज सिली पॉइंट में चर्चा इन्हीं संभावित परिवर्तनों पर.

# नए ओपनर्स

रोहित शर्मा और केएल राहुल. बहुत कैपेबल लोग हैं. इनके स्टैट्स बहुत अच्छे हैं. इनके नाम बहुत सारे रन हैं. लेकिन इनके पास इंटेंट नहीं है. ये सालों में किसी एक दिन हेल्स, बेयरस्टो या फिर बटलर जैसा खेलते हैं. और आज जैसी T20 क्रिकेट खेली जा रही है. उसमें इनका स्टाइल किसी काम का नहीं है. पावरप्ले में 30-40 रन बनाने वाले दिन कबके जा चुके हैं.

और इसीलिए अब इनको भी चले जाना चाहिए. अब वक्त है पृथ्वी शॉ जैसे इंटेंट वाले प्लेयर का. क्योंकि ऐसे बंदे जब तक क्रीज़ पर रहते हैं, तब तक सामने वाली टीम सांस नहीं ले पाती. और ऐसे हाल में शॉ के साथ उनके बाद आने वाले प्लेयर्स का काम भी आसान हो जाता है.

# सही टीम सेलेक्शन

यूं तो जिनका ये काम है, वो अच्छा ही करते होंगे. ऐसा लोगों का मानना है. लेकिन इस अच्छे काम से रिजल्ट खराब आ रहे हैं, ऐसे में कहीं ना कहीं, कुछ ना कुछ कमी निश्चित तौर पर छूट रही है. इस पर काम करने की बहुत जरूरत है. लगातार दो वर्ल्ड कप में रविचंद्रन अश्विन को टीम में रखा गया. किस काम के लिए? कोई नहीं जानता.

लोगों को अश्विन से बैटिंग में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होती है. ये उम्मीद क्यों है, पता नहीं. अगर आपको सातवें-आठवें नंबर पर आने वाले बल्लेबाजों से रन की उम्मीद है तो आपके साथ समथिंग तो रॉन्ग है ब्रो. और बोलिंग में अश्विन ने सालों से ऐसा कुछ खास नहीं किया है, जिसके लिए उन्हें लगातार मौके दिए जाएं. और अश्विन की तो उम्र का भी सीन नहीं है. कि वह टीम के फ्यूचर हो सकते हों.

ऐसे ही चहल जैसे श्योर-शॉट विकेट लेने वाले बंदे को हमने लगातार दो वर्ल्ड कप में एक भी मैच नहीं खेलने दिया. पिछली बार तो खैर वह टीम में ही नहीं थे और इस बार उन्हें लगातार बाहर रखा गया. ऐसी सेलेक्शन कॉल्स को निश्चित तौर पर सुधार की जरूरत है.

# इन लोगों को नमस्ते

इसके साथ ही कुछ प्लेयर्स को अब नमस्ते करने का वक्त भी आ गया है. और हो सकता है कि करोड़ों लोग मेरी इस बात से सहमत ना हों. लेकिन इनकी बात का क्या लोड लेना. ये तो 100 में से 99 बार मुझसे सहमत नहीं रहते. प्रेमी जो ठहरे. बहुत प्रेम करते हैं पुरानी इमारतों और पुराने रिकॉर्ड्स से. लेकिन जैसे पुरानी इमारतों में रहा नहीं जाता, वैसे ही इन पुराने रिकॉर्ड्स से मैच नहीं जीते जाते.

और इसीलिए अब वक्त आ गया है कि कुछ कड़े फैसले लिए जाएं. और सीनियर्स प्लेयर्स के रूप में टीम पर बोझ बने कुछ लोगों को टाटा कर दिया जाए. और ऐसे लोगों की शुरुआत निश्चित तौर पर रोहित शर्मा से होनी चाहिए. उन्हें सम्मानपूर्वक अलविदा कहा जाए. रोहित क्रिकेट के बाकी फॉर्मेट खेलते रहें, लेकिन इस सबसे छोटे फॉर्मेट को अब उनकी जरूरत नहीं है.

जरूरत तो वैसे टीम को केएल राहुल की भी नहीं है. लेकिन उनकी उम्र और उनके बारे में दिग्गजों के विचार देखकर ऐसा लगता नहीं कि उन्हें हटाया जाएगा. लेकिन मेरी मानें तो टीम को राहुल के अप्रोच की भी जरूरत नहीं है. राहुल जिस तरह से अपने ही खोल में छिपे रहकर बैटिंग शुरू करते हैं, उससे टीम का बस नुकसान ही होता है.

दिनेश कार्तिक के बारे में क्या कहा जाए. उनका तो पूरा करियर ही त्रासदियों से भरा रहा है. कभी खुद तो कभी मैनेजमेंट की गलतियों के चलते उनका करियर ना तो ठीक से टेक-ऑफ कर पाया और ना ही लैंड. और अब ऐसा लग रहा है कि उन्हें भी अलविदा बोल देना चाहिए. इनके अलावा अभी टीम को सस्ते रविंद्र जडेजा यानी अक्षर पटेल की भी जरूरत नहीं है.

क्रिकेट के इस फॉर्मेट में अक्षर गेंद और बल्ले दोनों से ही कुछ खास नहीं कर पाते हैं. और फील्डिंग के मामले में भी वह बाकी प्लेयर्स से इतने अच्छे नहीं हैं कि उन्हें सिर्फ इस बेसिस पर टीम में रखा जाए. रविचंद्रन अश्विन का हाल और बुरा है. अश्विन गाहे-बगाहे ही विकेट लेते हैं. बोलर के रूप में वह T20 में इतने कारगर नहीं हैं. और फील्डिंग-बैटिंग तो खैर है ही माशाल्लाह. ऐसे में उनकी जगह किसी अलग ऑप्शन को लाना उचित होगा.

अब जाते-जाते भुवी पर भी दो शब्द खर्च कर देते हैं. पिच से सपोर्ट मिले तो भुवी बहुत अच्छी बोलिंग करते हैं. लेकिन पिच से सपोर्ट मिलना तो हमारे हाथ में है नहीं? और अगर आप किसी खास सरफेस पर इतने डिपेंडेंट हैं तो मुझे नहीं लगता कि आपको ऐसा फॉर्मेट खेलना चाहिए. पिच से सपोर्ट खत्म होते ही भुवी बहुत ऑर्डिनरी बोलर बन जाते हैं. और फिर सामने बैटर कोई भी हो, उनकी जमकर धुनाई होती है. ऐसे में अब टीम को उनसे आगे देखने की जरूरत है.

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