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जसप्रीत बुमराह को किसने खोजा? कहानी उस कोच की, जिसने भारत को वर्ल्ड चैंपियन बॉलर दिया

जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) ने इंग्लैंड (England) के खिलाफ सेमीफाइनल में शानदार बॉलिंग की. उनकी इसी दमदार गेंदबाजी के चलते भारत (India) मैच जीतने में सफल रहा.

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इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में बुमराह ने मैच विनिंग बॉलिंग की. (फोटो- PTI)

इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में ‘प्लेयर ऑफ द’ मैच रहे संजू सैमसन (Sanju Samson) ने पोस्ट मैच प्रजेंटेशन के दौरान कहा, इस मुकाबले में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ अवॉर्ड जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) को मिलना चाहिए था. बुमराह ऐसे बॉलर हैं जो कई पीढ़ियों में एक बार पैदा होते हैं. उन्होंने इस मैच में कमाल की बॉलिंग की है.

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अगर, संजू की इस बात पर गौर करें, तो उसमें दम है. उनके अलावा, कई क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना था कि ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ अवॉर्ड  बुमराह को दिया जाना चाहिए. उन्होंने इस प्रेशर वाले मैच में जिस तरह से बॉलिंग की, उसे लंबे समय तक याद किया जाएगा.

बुमराह की वजह से भारत जीता

इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में भारत, बुमराह की बॉलिंग के बदौलत जीता. 16वें और 18वें ओवर में अगर बुमराह ने कसी गेंदबाजी न की होती, तो मैच का रिजल्ट कुछ और होता. 48 गेंदों पर 105 रन बनाने वाले जैकब बेथल भारत की जीत में आड़े आ रहे थे.

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लेकिन, बुमराह ने इंग्लैंड के किसी भी बैटर की परवाह नहीं की. उन्होंने टफ सिचुएशन में बॉलिंग पर फोकस रखा. इस करो या मरो वाले मुकाबले में उन्होंने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए 4 ओवर में 33 रन देकर एक विकेट लिया. इस दौरान, उनका सिर्फ दूसरा ओवर महंगा रहा, जिसमें 16 रन दिए. बुमराह ने इस मैच में छठे, 11वें, 16वें और 18वें ओवर में बॉलिंग की.

बुमराह मैच में इतनी इफेक्टिव बॉलिंग कैसे करते हैं? वह चाहे पावरप्ले में बॉलिंग करें, मिडिल ओवर्स में बॉलिंग करें या डेथ ओवर्स में, वह हर सिचुएशन में किफायती साबित होते हैं. उनकी शानदार बॉलिंग को देखकर सवाल उठता है कि ये सब कैसे कर लेते हैं? भारत के इस मैच विनर बॉलर को आख‍िर किसने तैयार किया?

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किशोर त्रिवेदी ने बुमराह को निखारा

जब, बुमराह की शानदार बॉलिंग की बात हो रही है, तो ऐसे में उनके कोच का जिक्र होना जरूरी है. बुमराह को बुमराह बनाने में उनके कोच किशोर त्रिवेदी का हाथ है. जिन्होंने इस वर्ल्ड चैंपियन बॉलर की खोज की थी. किशोर त्रिवेदी फर्स्ट क्लास क्रिकेटर रहे हैं.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 79 वर्षीय किशोर त्रिवेदी अहमदाबाद में रॉयल क्रिकेट एकेडमी चलाते हैं. जसप्रीत बुमराह को खोजने का श्रेय उन्हीं को जाता है. बुमराह ने किशोर की कोचिंग में बॉलिंग की बारीकियां सीखीं.

क्रिशोर त्रिवेदी वो कोच हैं, जिन्होंने बुमराह के अनऑर्थोडॉक्स बॉलिंग एक्शन के साथ छेड़छाड़ नहीं की. उन्होंने बुमराह को इसी एक्शन से बॉलिंग करने को कहा. किशोर त्रिवेदी के मुताबिक,

“आपके बारे में दूसरे लोग क्या कहते हैं उसे इग्नोर करो? आप अच्छी बॉलिंग कर रहे हो. एक दिन स्टार बनोगे.”

किशोर त्रिवेदी की बात में दम था. उन्होंने बुमराह पर फोकस किया. बुमराह 16 साल की उम्र में 140 किमी की स्पीड से बॉलिंग करते थे. उनके अनोखे एक्शन की किशोर ने कभी परवाह नहीं की. शुरुआत में एक हफ्ते तक निगरानी करने के बाद, कोच ने पाया कि उनके बॉलिंग एक्शन में कोई कमी नहीं है.

शरारती थे बुमराह

जसप्रीत बुमराह शुरुआत में काफी शरारती थे. इसके लिए कोच ने उन्हें कई बार सजा दी.  किशोर त्रिवेदी के मुताबिक, 

“बुमराह काफी शरारती थे. वह एक दिन ट्रेनिंग के लिए आते. अगले 3 दिन अपने दोस्तों के साथ चिल करते. इसके बाद जब वह आते तो मैं उन्हें पूरे दिन नेट के पीछे खड़ा रखता था. ऐसा कई बार हुआ. फिर वह लाइन पर आ गए. उन्हें एहसास हुआ कि वह ऐसा नहीं कर सकते.” 

पहले टूर्नामेंट में पड़ी मार

किशोर त्रिवेदी ने बुमराह के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि जब उन्होंने पहला मैच खेला, तो उनकी गेंदों पर काफी रन बने. इसके बाद, उन्हें बेहतर ढंग से बॉलिंग करने के लिए कहा. उनके मुताबिक, 

“बुमराह ने एकेडमी की तरफ से, जब पहला लोकल टूर्नामेंट खेला, तो उन्होंने सिर्फ बाउंसर गेंदें फेंकीं. बैटर्स उनकी गेंदों को लेग साइड पर खेलते. मुझे बुमराह को बताना पड़ा कि तुम्हें दिमाग का इस्तेमाल करना होगा. गेंद को कैसे पैकेज करना है. इस पर काम करना होगा. यही सलाह मैंने बुमराह को दी थी.”

सटीक बॉलिंग का राज

बुमराह अक्सर गुच्छे में बॉलिंग करते हैं. एक ही जगह पर गेंद डालना उनकी विशेषता है. इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने इसी तरह की बॉलिंग की. उनकी इस खूबी पर कोच किशोर कहते हैं,

“मैं बुमराह को एक ही जगह पर 10 बॉल फेंकने के लिए कहता था. शुरुआत के दिनों में वह मुश्किल से एक गेंद फेंक पाते थे. लेकिन, दूसरे हफ्ते से उन्हें पता चला कि कौन सी गेंद के लिए कौन सी रिलीज काम करती है. वह बेहतर होने लगे. बुमराह की सबसे अच्छी बात यह थी कि उनमें सुनने, समझने और अगले दिन उसे लागू करने की काबिलियत थी.”

कैसे मिला ब्रेक?

जसप्रीत बुमराह के इंटरनेशनल क्रिकेट का रास्ता आईपीएल से होकर निकला. कोच किशोर त्रिवेदी की कोचिंग में उन्होंने गुजरात के लिए सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी खेली. इस दौरान मुश्ताक अली ट्रॉफी के एक मैच में जॉन राइट मुंबई इंडियंस के लिए स्काउट के तौर पर काम कर रहे थे. जॉन राइट उनके यूनीक बॉलिंग एक्शन और यॉर्कर गेंदों से काफी प्रभावित हुए. उन्होंने बुमराह को तुरंत साइन कर लिया. उस समय बुमराह 19 साल के थे. 

जसप्रीत बुमराह पहली बार आईपीएल में 2013 में खेले. इस साल उन्होंने मुंबई इंडियंस के लिए 2 मैचों में 3 विकेट लिए. 2014 और 2015 का सीजन उनके लिए ज्यादा अच्छा नहीं रहा. लेकिन, 2016 में मुंबई इंडियंस के लिए खेलते हुए उन्होंने धूम मचा दी. इस सीजन में बुमराह ने 15 विकेट लिए थे. 

टीम इंडिया में बुमराह को पहला ब्रेक 23 जनवरी 2016 को मिला. इसी दिन, उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी में पहला वनडे खेला. इसके बाद, 26 जनवरी 2016 को एडिलेड से उनके टी20 इंटरनेशनल की शुरुआत हुई. 

मौजूदा समय में जसप्रीत बुमराह दुनिया के सबसे खतरनाक बॉलर हैं. उनकी यॉर्कर पर अच्छे-अच्छे बैटर गच्चा खा जाते हैं. उनकी गेंदों पर विपक्षी टीम के बैटर खुलकर नहीं खेल पाते. बुमराह की इमेज मैच विनर की है. वह तीनों फॉर्मेट में भारत के बेस्ट बॉलर हैं. 8 मार्च को जब, टीम इंडिया टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में न्यूजीलैंड से भिड़ेगी, तो बुमराह से एक बार फिर करिश्माई बॉलिंग की उम्मीद होगी. 

वीडियो: जसप्रीत बुमराह ने संजू सैमसन को नहीं, तो किसे बताया मैच का टर्निंग पॉइंट?

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