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कहानी उस क्रिकेटर की जिसके पिता रोज रातभर टैक्सी चलाने के बाद उसे प्रैक्टिस पर ले जाते थे

नतीजा ये रहा कि उन्होंने 15 साल की उम्र में प्रोफेशनल क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया.

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इंग्लैंड में बसने के बाद मोइन के परिवार की माली हालत कुछ ठीक नहीं हुआ करती थी. इनके पापा टैक्सी चलाकर अपने परिवार का गुज़ारा करते थे.
मोइन अली. पाकिस्तानी मूल के इंग्लिश क्रिकेटर. ऑल राउंडर हैं. बाएं हाथ से बल्लेबाजी और ऑफ स्पिन बॉलिंग करते हैं. आप सोच रहे होंगे कि हमें अचानक से मोइन की याद क्यों आने लगी. वो इसलिए क्योंकि इनके क्रिकेटर बनने की कहानी पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाई गई है. इसमें उनके क्रिकेटर बनने की पूरी जर्नी दिखाई जाएगी. जो बहुत प्रेरक है. कैसे एक टैक्सी ड्राइवर का बेटा इंग्लैंड के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेला? ये डॉक्यूमेंट्री मोइन के इस इंस्पायरिंग जर्नी को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाने और उससे सीखने के लिए बनाई गई है.
मोइन ने 12-13 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था. इसमे उनके पापा का बड़ा हाथ था. मोइन के पापा को क्रिकेट से बहुत लगाव था. वो अपने बच्चों समेत आसपास के बच्चों को क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित करते थे. 1990 के बाद से मोइन के इलाके से कुल 16 प्रोफेशनल क्रिकेटर निकले हैं. डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया है कि मोइन के परिवार की माली हालत कुछ ठीक नहीं हुआ करती थी. फैमिली को सपोर्ट करने के लिए उनके पापा सारी रात टैक्सी चलाने के बाद सुबह घर आते और मोइन को क्रिकेट की ट्रेनिंग के लिए लेकर जाते. मोइन के साथ वहां और भी बच्चे ट्रेनिंग लेने आया करते थे, सबकी फाइनेंशियल कंडीशन एक सी ही हुआ करती थी. किसी के पास खुद की अपनी क्रिकेट किट नहीं थी, वो एक दूसरे के पैड और बैट एक्सचेंज करके क्रिकेट सीखते थे.
मोइन की मां इंग्लैंड की हैं जबकि उनके पापा पाकिस्तानी मूल के हैं. मोइन इंग्लैंड में ही पैदा हुए और वहीं पले-बढ़े हैं.
मोइन की मां इंग्लैंड की हैं जबकि उनके पापा पाकिस्तानी मूल के हैं. मोइन इंग्लैंड में ही पैदा हुए और वहीं पले-बढ़े हैं.

मोइन जब 12 साल के थे तबसे वो क्रिकेट की ट्रेनिंग लेते आ रहे हैं. लेकिन वो इन चीज़ों को लेकर बहुत सीरियस नहीं थे. एक दिन ट्रेनिंग पर जाने के दौरान उनके पापा ने उनसे कहा-
अपने जीवन के अगले दो साल इमानदारी से क्रिकेट को और मुझे दे दो. इसके बाद तुम्हारे मन में जो आए वो करना.
मोइन ने उनकी बात मान ली. इसी का नतीजा रहा कि दो साल पूरा होते-होते मोइन को इंग्लिश काउंटी क्रिकेट टीम वार्विकशायर के लिए चुन लिया गया. उस समय उनकी उम्र महज़ 15 साल थी. इसके बाद से वो लगातार प्रोफेशनल क्रिकेट में एक्टिव हैं. साल 2011 में वो वॉर्सेटरशायर काउंटी टीम के लिए खेल रहे थे. इसी टीम में पाकिस्तान के ऑफ स्पिनर सईद अजमल भी खेल रहे थे. सईद को मोइन की बॉलिंग ठीक लगती थी लेकिन वो चाहते थे कि वो कुछ नया भी ट्राय करें. सईद ने मोइन को 'दूसरा' फेकने की सलाह दी और इसे सीखने में उनकी मदद भी किया करते थे.
इंग्लैंड के जिस इलाके से मोइन आते हैं, वहां से 1990 के बाद से अब तक 16 प्रोफेशनल क्रिकेटर निकल चुके हैं.
इंग्लैंड के जिस इलाके से मोइन आते हैं, वहां से 1990 के बाद से अब तक 16 प्रोफेशनल क्रिकेटर निकल चुके हैं.

इतना काउंटी क्रिकेट खेलने के बाद मोइन इंटरनेशल क्रिकेट खेलने का इंतज़ार कर रहे थे. वो मौका भी जल्दी ही आ गया. 2014 टी-20 वर्ल्ड कप के ठीक पहले मोइन को वेस्टइंडीज़ के खिलाफ वनडे सीरीज़ के लिए चुन लिया गया. तीन मैचों की इस सीरीज़ में मोइन ने एक पचासा और एक तीस से ज़्यादा स्कोर के साथ 109 रन बनाए साथ ही तीन विकेट भी झटके. उनकी इस परफॉर्मेंस को देखते उन्हें टी-20 वर्ल्ड कप के लिए भी इंग्लिश खेमे में शामिल कर लिया गया. लेकिन यहां वो कुछ खास परफॉर्म नहीं कर सके. 4 मैचों में उन्होंने महज़ 49 रन बनाए. उनके ऑलराउंड खेल से भी टीम को खासी उम्मीदें थी लेकिन वो बॉलिंग में भी फेल रहे है, इस टूर्नामेंट में उन्हें कोई विकेट नहीं मिला. बावजूद इसके उन्हें टीम में बनाए रखा गया. अगले कुछ समय में इग्लैंड इंडिया और श्रीलंका से टेस्ट सीरीज़ खेलने वाला था. मोइन की असली परीक्षा क्रिकेट के इस फॉर्मेट में होनी थी.
इन दोनों ही टीमों के खिलाफ मोइन ने बैटिंग और बॉलिंग दोनों में अच्छा प्रदर्शन किया और टीम में अपनी जगह पक्की कर ली. इतना ही नहीं इंटरनेशनल क्रिकेट में उनकी परफॉर्मेंस के लिए क्रिकेट के बाइबिल माने जाने वाले 'विज़डन' मैग्जीन ने साल 2015 के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटरों की सूची में उन्हें जगह दी.
एक छोटे से क्रिकेट ग्राउंड से लेकर इंग्लैंड के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने तक की जर्नी के बारे में मोइन बात करते हुए कहते हैं-
''बर्मिंघम में स्पार्कहिल के एक छोटे से पार्क में क्रिकेट खेलने से लेकर हज़ारों-लाखों लोगों के सामने खेलना किसी सपने जैसा लगता है. मुझे यकीन नहीं होता कि मैं रोज इंग्लैंड के लिए क्रिकेट खेलता हूं. ये मेरे और मेरे परिवार के लिए एक बड़ा अचीवमेंट है. मेरे मम्मी-पापा ने मेरे लिए बहुत कुछ झेला है. अब जब वो मुझे खेलते हुए देखने आते हैं, तो मुझे ऐसा लगता है जो उन्होंने मुझे दिया वो मैं उन्हें वापस कर रहा हूं. मेरे पापा इस बात से खुश हैं और वो अपना सिर ऊंचा करके सबको बताते हैं कि उनका लड़का इंग्लैंड के लिए खेलता है. यही मेरे लिए सबकुछ है.''



ये पूरी डॉक्यूमेंट्री आप यहां देख सकते हैं:



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