भारतीय एथलीट प्रीति पाल ने पैरा एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीता. 200 मीटर के T35 मीटर इवेंट में उन्होंने शानदार टाइमिंग के साथ यह मेडल जीता. इस मेडल को जीतने के बाद प्रीति बहुत भावुक हो गईं. इसकी वजह थे उनके ट्रेनिंग पार्टनर चिराग त्यागी. वह खिलाड़ी जिसके साथ उन्होंने मेडल जीतने के सपने देखे. चिराग प्रीति को मेडल जीतते हुए नहीं देख पाए. प्रीति को इसी बात का दुख है. प्रीति को यकीन है कि अगर चिराग आज उनके बीच होता, तो वह भी एशियन पैरा गेम्स के पोडियम पर खड़ा होता.
मेडल जीतकर प्रीति को आई छोटे भाई की याद, 4 महीने पहले हुई थी हत्या
एशियन पैरा गेम्स में मेडल जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए खास पल होता है. लेकिन जब जीत की खुशी बांटने वाला कोई अपना साथ न हो, तो यही खुशी अधूरी रह जाती है. भारत की पैरा एथलीट प्रीति पाल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.

प्रीति और चिराग दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में एक साथ ट्रेनिंग करते थे. प्रीति के लिए चिराग उनके भाई जैसे थे. दोनों साथ में ट्रेनिंग करते थे. स्प्रिंटर सिमरन शर्मा भी इनके साथ ही ट्रेन करती थी. सभी को सिमरन के कोच गजेंद्र सिंह ट्रेन करते थे.
प्रीति ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि चिराग उनके लिए सिर्फ ट्रेनिंग पार्टनर नहीं थे. चिराग प्रीति और सिमरन को बड़ी बहन मानते थे. चिराग का सपना था कि एक दिन वह भी प्रीति और सिमरन की तरह पैरालंपिक में मेडल्स जीते. प्रीति ने कहा कि उन्होंने अपने मेडल चिराग को समर्पित किए हैं.
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चिराग की हुई थी हत्याचिराग का भी सपना भारत के लिए मेडल जीतना था. वह दृष्टिबाधित खिलाड़ियों की कैटेगरी (T12) में हिस्सा लेते थे. मई में बेंगलुरु के श्री कांतीरवा स्टेडियम में हुई इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने दो मेडल जीते थे. इसी के दम पर उन्होंने एशियन पैरा गेम्स के लिए क्वालिफाई किया था.
चिराग का यह सफर आगे नहीं बढ़ सका. मई में साथी खिलाड़ी ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी. साथी खिलाड़ी पर जलन और रंजिश के कारण चिराग की हत्या का आरोप लगा था. चिराग की मौत की खबर ने प्रीति और सिमरन को गहरे सदमे में डाल दिया था. प्रीति उस समय उत्तर प्रदेश के हाशिमपुर में अपने परिवार से मिलने गई थीं. तभी सिमरन ने उन्हें फोन कर यह खबर दी थी. शुरुआत में दोनों को लगा कि चिराग की मौत किसी हादसे में हुई है. लेकिन कुछ घंटे बाद उन्हें पता चला कि उसकी हत्या कर दी गई है.
चिराग की मौत के बाद भी प्रीति और सिमरन ने उसके परिवार का साथ नहीं छोड़ा. दोनों खिलाड़ी और उनके कोच गजेंद्र सिंह परिवार की आर्थिक मदद करते हैं. वह समय-समय पर फोन करके परिवार का हाल भी पूछते हैं. प्रीति को इस बात का भी अफसोस है कि वह चिराग की कलाई पर कभी राखी नहीं बांध पाईं. उनके लिए चिराग छोटे भाई जैसा था और अब उसकी यादें ही उनके पास रह गई हैं.
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