भारत में डोपिंग के बढ़ते मामलों के बाद नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (NADA) अब काफी सख्त हो गया है. डिस्कस थ्रो एथलीट बनवीर सिंह को NADA के एंटी डोपिंग अपील पैनल (ADAP) ने डोप टेस्ट में फेल होने के कारण 7 साल के लिए बैन कर दिया है. यह सजा अनुशासनात्मक समिति (Disciplinary Panel) की ओर से दी गई सजा से दो साल ज्यादा है.
NADA की बड़ी कार्रवाई, दो भारतीय एथलीट्स पर डोपिंग के लिए लगाया बैन!
भारत 2022 और 2025 के बीच एथलेटिक्स में डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघनों (एडीआरवी) के मामले में शीर्ष दो देशों में शामिल रहा है. इसी के बाद भारत को सबसे जोखिम वाला देश करार दिया.


पिछले साल NADA के डोपिंग रोधी अनुशासन समिति (ADDP) ने बनवीर को स्टेरॉयड मेथेंडिएनोन (Methandienone) के लिए पॉजिटिव पाए जाने पर 23 दिसंबर 2024 से 5 साल के लिए बैन कर दिया था. मेथेंडिएनोन को आमतौर पर डायानाबॉल (Dianabol) या Dbol कहा जाता है. इसका उपयोग मुख्य रूप से मांसपेशियों के आकार और ताकत को तेजी से बढ़ाने के लिए किया जाता है.
37 साल की उम्र में बनवीर डोपिंग के लिए बैन होने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ियों में से एक हैं. वह 12 महीनों के अंदर तीन बार वेयरअबाउट्स (Whereabouts) की जानकारी देने में नाकाम रहे थे. इस वजह से वह पहले से ही दो साल का सस्पेंशन भी झेल रहे हैं. एडीएपी ने ताजा अपडेट में बैन की अवधि बढ़ा दी है. नाडा ने एडीएपी के सजा बढ़ाने के फैसले के कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है.
बनवीर का करियर बहुत शानदार नहीं रहा है. साल 2022 में भुवनेश्वर में इंडियन ग्रां प्री में दूसरे स्थान पर रहने के अलावा बनवीर अपने करियर में कभी पोडियम फिनिश नहीं कर सके हैं.
हरेंद्र पर भी हुई कार्रवाईइसके अलावा, लॉन्ग डिस्टेंस एथलीट हरेंद्र कुमार को इस साल दो अगस्त से 4 साल के लिए एक बार फिर बैन किया गया है. उन्हें इससे पहले एडीडीपी ने तीन अगस्त 2022 से 4 साल के लिए बैन किया गया था. वह डार्बेपोएटिन (Darbepoetin) के लिए पॉजिटिव पाए गए थे. डार्बेपोएटिन शरीर में रेड ब्लड सेल्स के उत्पादन को बढ़ाता है. स्टैमिना और ऑक्सीजन क्षमता बढ़ाने के लिए इसका दुरुपयोग किया जाता है.
भारत में बढ़े डोपिंग के मामलेNADA के सख्त रवैये के पीछे हाल के डोपिंग रिकॉर्ड हैं. भारत 2022 और 2025 के बीच एथलेटिक्स में डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघनों (एडीआरवी) के मामले में शीर्ष दो देशों में शामिल रहा है. इसी के बाद भारत को सबसे जोखिम वाला देश करार दिया गया.
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एआईयू के अनुसार, भारत में 2022 में 48 एडीआरवी (दूसरा स्थान), 2023 में 63 (दूसरा स्थान), 2024 में 71 (पहला स्थान) और 2025 में 30 एडीआरवी (पहला स्थान) दर्ज किए गए. वर्ल्ड एथलेटिक्स एंटी डोपिंग वॉइलेशन रूल के तहत ITU बोर्ड सभी देशों के बोर्ड्स को डोपिंग के जोखिम के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में डालता है. ए कैटेगरी में उन सदस्य देश को रखा जाता है, जहां डोपिंग का जोखिम सबसे ज्यादा होता है. इन देशों के प्रति डोपिंग के मामले में अधिक कड़ा रवैया अपनाया जाता है.
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