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क्रिकेट के लिए ऐसा जुनून कि 9 साल तक अपनी मां और पिता से नहीं मिला ये बोलर

कुमार कार्तिकेय ने रणजी में मचाया था धमाल

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कुमार कार्तिकेय औऱ उनकी मां (Twitter)

कुमार कार्तिकेय (Kumar Kartikeya). इंडियन प्रीमियर लीग (Indian Premier League) में मुंबई इंडियंस के लिए खेलने वाले स्पिनर. इसके अलावा रणजी ट्रॉफी के पिछले सीज़न में मध्य प्रदेश के लिए कमाल का प्रदर्शन करने वाले इस खिलाड़ी का नाम तो आपने सुना ही होगा. लेकिन क्रिकेट के प्रति अपनी दीवानगी को लेकर ये जिस हद तक गुजरे हैं, उसकी कल्पना कर पाना भी मुश्किल है. क्रिकेटर बनने की चाहत में वो अपने परिवार से ऐसे दूर गए कि 1-2 साल नहीं बल्कि 9 साल 3 महीने बाद ही अपनी मां और फैमली मेंबर्स से मुलाकात कर पाए.

परिवार के साथ मिलकर मुंबई इंडियंस के इस खिलाड़ी के खुशी का ठिकाना नहीं रहा. 24 साल के इस खिलाड़ी ने सोशल मीडिया पर अपनी मां के साथ एक फोटो शेयर की है. कार्तिकेय ने तस्वीर शेयर करते हुए लिखा,

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‘9 साल 3 महीने बाद अपने परिवार और मां से मिला. अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में असमर्थ हूं.’

IPL 2022 की समाप्ति के बाद उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि वो 9 साल से अपनी मां और परिवार से नहीं मिल पाए हैं. उन्होंने कहा था, 

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"मैं 9 साल से घर नहीं गया हूं. मैं फैसला किया था कि घर तभी लौटूंगा जब मैं जीवन में कुछ हासिल कर लूंगा. मेरी मां और पिताजी ने मुझे बार-बार फोन भी किया. आखिरकार, मैं IPL के बाद घर लौटूंगा."

#मध्य प्रदेश को चैम्पियन बनाया!

Ranji Trophy 2021-22 में खेले 6 मैच की 11 पारियों में कार्तिकेय ने 32 विकेट निकाले थे. इस सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में उनसे ऊपर सिर्फ मुंबई के शम्स मुलानी थे. मुलानी ने भी 6 मैच की 11 पारियों में 45 विकेट हासिल किए थे. फाइनल की दूसरी पारी में उन्होंंने 4 विकेट हासिल किया था.

#बैक टू स्ट्रगल के दिन!

अब हम आपको कार्तिकेय के शुरुआती दिनों के बारे में बताते हैं. वो पहले यूपी के सुल्तानपुर में रहते थे. 15 साल की उम्र में अपना घर छोड़कर वो दिल्ली चले आए. अपने दोस्त राधेश्याम के पास. इसकी वजह उनके पिता श्यामनाथ सिंह (यू.पी पुलिस में हेड कांस्टेबल) ने TOI को बताई,

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‘जब वह यूपी की अंडर-16 टीम में शामिल नहीं हुए, तो वह इस प्रॉमिस के साथ घर छोड़कर चले गए कि वो तभी लौटेंगे जब क्रिकेट में अपना नाम कर लेंगे.’

दिल्ली आकर कार्तिकेय अपने दोस्त राधे के साथ कई क्रिकेट कोच से मिले. उनके दोस्त लीग क्रिकेट खेलते थे तो वो उनको लेकर गए. लेकिन वहां पैसों की वजह से बात नहीं बनी. ऐसे ही एक दिन कार्तिकेय को लेकर राधे, संजय भारद्वाज के पास गए. कोच को बताया कि कार्तिकेय कोचिंग की फीस नहीं दे पाएंगे. 

और ये जानते हुए भी संजय ने कार्तिकेय से ट्रॉयल देने को कहा. और एक गेंद में ही उनके एक्शन को पढ़ते हुए, फ्री में अपनी अकैडमी में शामिल कर लिया. क्रिकइंफो से बात करते हुए संजय ने बताया,

‘कार्तिकेय 10 रुपये के बिस्कुट के पैसे बचाने के लिए क्रिकेट अकैडमी तक मीलों चलकर आते थे.’ 

अपनी क्रिकेट अकैडमी से 80 किलोमीटर दूर, गाज़ियाबाद के मसूरी में कार्तिकेय ने काम भी ढूंढ रखा था. वो रात को वहां काम करते और दिन में ट्रेनिंग के लिए आते. जब कोच को इस बारे में पता चला, तो उन्होंने कार्तिकेय से ग्राउंड में ही वहां के कुक के साथ रहने को कहा. 

और जब पहले ही दिन कुक ने उनको लंच दिया तो कार्तिकेय रोने लगे. कोच ने बताया,

‘जब कुक ने उन्हें खाना दिया तो कार्तिकेय रोने लगे. उन्होंने एक साल से लंच नहीं किया था.’ 

कार्तिकेय के क्रिकेटिंग करियर की बात करें तो उन्हें संजय भारद्वाज ने स्कूल और स्टेट खिलाया. DDCA (दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट असोसिएशन) लीग खेलते हुए उन्होंने 45 विकेट निकाले. दिल्ली के कई टूर्नामेंट्स में वो ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ रहे. लेकिन इसके बावजूद वो दिल्ली की टीम में अपनी जगह नहीं बना पाए.

ऐसे में कोच संजय ने उनको अपने दोस्त के पास एमपी भेजा. वहां कार्तिकेय ने डिवीजन क्रिकेट में अच्छा किया. एमपी की अंडर-23 टीम में जगह बनाई. और फिर वहां की रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया.

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