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वर्ल्ड कप विनिंग कैप्टन कपिल देव, अपने किस स्पिनर को देख छुप जाते थे?

खौफ़ इतना, कि ब्रेकफास्ट भी कोने में होता था.

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कपिल देव (फोटो - Getty Images)

कपिल देव. क्रिकेट इतिहास के महानतम ऑलराउंडर्स में से एक. इनका नाम सुनकर एक बड़ी मशहूर तस्वीर दिमाग में आती है. लॉर्ड्स की बालकनी और वहां पर ट्रॉफी उठाता इंडियन कैप्टन. कपिल पाजी इंडिया की पहली ICC ट्रॉफी घर लाए थे. वो भी उस दौर में, जब वेस्टइंडीज़ टीम अपने चरम पर थी. और पाजी की टीम ने फाइनल मुकाबले में उन्हीं को हरा दिया.

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इसके अलावा उनके नाम और भी कई रिकॉर्ड्स हैं. जैसे टेस्ट क्रिकेट में 5000 रन और 400 विकेट लेने वाले वो इकलौते ऑल-राउंडर हैं. फिटनेस का हवाला देते हुए उन्होंने टेस्ट क्रिकेट का एक भी मुकाबला मिस नहीं किया है. यूं तो कपिल पाजी के नाम और भी कई सारे रिकॉर्ड्स हैं. लेकिन हम आपको इन रिकॉर्ड्स में नहीं फंसाएंगे. हम आपको इनके जन्मदिन पर एक क़िस्सा सुनाएंगे.

ये क़िस्सा उनकी जवानी का है. जब कपिल नए-नए टीम में शामिल हुए थे. और उस समय वो एक गेंदबाज से इतना डरते थे कि अपना ब्रेकफास्ट भी छुप-छुप कर करते थे. चलिए, भूमिका तो बांध दी, अब आपको ये क़िस्सा सुनाते हैं.

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ये बात कपिल पाजी ने पूर्व क्रिकेटर डबल्यू वी रमन को उनके यूट्यूब चैनल पर सुनाया था. इंडियन स्पिन बॉलर एस वेंकटराघवन का ज़िक्र करते हुए कपिल पाजी ने कहा,

‘मैं उनसे बहुत डरता था. सबसे पहले, वो अंग्रेजी में बात किया करते थे और दूसरा, हम सभी को उनके गुस्से के बारे में पता था. वो अंपायरिंग के वक्त नॉटआउट ऐसे देते थे, जैसे गेंदबाज को डांट रहे हों. जब मैं साल 1979 में इंग्लैंड गया, वो मेरे कैप्टन थे. और मैं वहां ऐसी जगह ढूंढ़ता था, जहां वो मेरा चेहरा देख ना पाएं.’

कपिल देव ने आगे बताया,

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‘उस समय हमारी टीम में बिशन बेदी, इरापल्ली प्रसन्ना, बी.एस चंद्रशेखर थे. तो हम युवा प्लेयर्स सीनियर्स से ज्यादा कुछ कह नहीं सकते थे. और जब आप बलि का बकरा ढूंढ रहे होते हो. तो वो मेरा चेहरा देखते थे. और आग बबूला हो जाते थे. मैं उनके सामने ब्रेकफास्ट भी नहीं कर सकता था. मैं एक कोने में बैठता था, किसी खंभे के पीछे. और वहां ब्रेकफास्ट करता था, जिससे वो मेरा चेहरा ना देख पाए. क्योंकि मैं ज्यादा खाता था. और फिर वो कहते थे- वो पूरे टाइम खाता रहता है और खेलता नहीं है.’

कपिल देव ने जब इंडिया डेब्यू किया था, उस दौरान वेंकटराघवन अपने क्रिकेट करियर के अंतिम दिनों में थे. शुरू में वेंकटराघवन का खौफ़ होने के बावजूद अंत तक आते-आते दोनों के रिश्ते बहुत अच्छे हो गए थे. और कपिल देव तो ये भी मानते हैं कि वेंकटराघवन ही गेम में कैरेक्टर लेकर आए हैं. कपिल ने वेंकटराघवन के व्यक्तित्व की तुलना जॉन मैकेनरो, डिएगो माराडोना तक से कर रखी है.

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