पिछले साल भी उनडकट आईपीएल नीलामी के दूसरे सबसे महंगे खिलाड़ी थे. उन्हें 11.5 करोड़ रुपये में राजस्थान रॉयल्स ने ही खरीदा था. लेकिन फ़ायदा क्या हुआ – निल बटे सन्नाटा. ये वैसा था जैसे वीसीआर आ जाए, पूरा गांव इकठ्ठा हो जाए लेकिन रात भर बिजली ही न आए और अगली सुबह वीसीआर वाला सब कुछ वापस ले जाने को आ जाए. हर मैच में जयदेव के हाथ से गेंद निकली और वो गेंद बाउंड्री पार पहुंची. इसके सिवा कुछ भी नहीं हुआ. 2018 में उन्होंने 15 मैचों में मात्र 11 विकेट लिए जिस दौरान उन्होंने 9.65 रन प्रति ओवर की दर से गेंदबाज़ी की. 2017 में वो धोनी की कप्तानी में पुणे की टीम से खेले थे, जिसमें 12 मैचों में 24 विकेट लिए थे. इस दौरान उनकी इकॉनमी 7 रन प्रति ओवर की थी. और उससे पहले 2016 में उन्हें सिर्फ एक मैच खेलने मिला था जिसमें उन्हें कोई विकेट नहीं मिला था. ओवर ऑल देखा जाए तो उन्होंने आईपीएल में अलग-अलग टीमों के लिए 62 मैच खेले हैं. जिनमें सिर्फ 67 विकेट ले पाए हैं. इकॉनमी रेट 8.39 का है. ये कोई ख़ास आंकड़ें नहीं हैं. उनडकट के अलावा भी बहुत से प्रॉमिसिंग बॉलर्स हैं जो अननोटिस्ड चले जाते हैं. न जाने उनडकट में आईपीएल वालों को क्या नज़र आता है? जयदेव उनडकट एक प्रॉमिसिंग बॉलर थे. थे – भूतकाल में. अब नहीं हैं. इसके पीछे उनकी इस आईपीएल की परफॉरमेंस ही ज़िम्मेदार ठहराई जाएगी.जयदेव उनडकट को जितने में ख़रीदा है, उतने में चार मलिंगा आ जाएं और 40 लाख बचेंगे भी
जयदेव उनडकट में ऐसा क्या है कि उनको इस साल भी करोड़ों रुपए मिल गए?
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फोटो - thelallantop
जयदेव उनडकट. किस्मत का धनी खिलाड़ी. करियर के नाम पर कुछ ज़्यादा ख़ास आंकड़ें नहीं है. पर बैंक में बैलेंस भयानक हो गया है. लगातार दूसरे साल आईपीएल के आला दिमागों ने उनपर पैसे लुटाए हैं. ईमानदारी से कहा जाए तो उनपर इतने पैसे खर्च करने की कोई ख़ास वजह नज़र नहीं आती. उनका प्रदर्शन कोई ज़्यादा प्रभावित करने वाला तो नहीं ही रहा है. कई बार तो उन्होंने बहुत ही ज़्यादा निराश किया है. बावजूद इसके उनको खरीदने के लिए आईपीएल की टीमें थैलियों के मुंह खोल देती हैं. इस नीलामी में भी ऐसा ही कुछ हुआ. उन्हें राजस्थान रॉयल्स ने 8.4 करोड़ रुपए में खरीद लिया है. ये बहुत तगड़ी रकम है. इतने में तो मलिंगा जैसा गेंदबाज़ चार बार खरीद लिया जाए. 40 लाख बचेंगे भी. उन्हें मुंबई ने सिर्फ 2 करोड़ में ख़रीदा है.
पिछले साल भी उनडकट आईपीएल नीलामी के दूसरे सबसे महंगे खिलाड़ी थे. उन्हें 11.5 करोड़ रुपये में राजस्थान रॉयल्स ने ही खरीदा था. लेकिन फ़ायदा क्या हुआ – निल बटे सन्नाटा. ये वैसा था जैसे वीसीआर आ जाए, पूरा गांव इकठ्ठा हो जाए लेकिन रात भर बिजली ही न आए और अगली सुबह वीसीआर वाला सब कुछ वापस ले जाने को आ जाए. हर मैच में जयदेव के हाथ से गेंद निकली और वो गेंद बाउंड्री पार पहुंची. इसके सिवा कुछ भी नहीं हुआ. 2018 में उन्होंने 15 मैचों में मात्र 11 विकेट लिए जिस दौरान उन्होंने 9.65 रन प्रति ओवर की दर से गेंदबाज़ी की. 2017 में वो धोनी की कप्तानी में पुणे की टीम से खेले थे, जिसमें 12 मैचों में 24 विकेट लिए थे. इस दौरान उनकी इकॉनमी 7 रन प्रति ओवर की थी. और उससे पहले 2016 में उन्हें सिर्फ एक मैच खेलने मिला था जिसमें उन्हें कोई विकेट नहीं मिला था. ओवर ऑल देखा जाए तो उन्होंने आईपीएल में अलग-अलग टीमों के लिए 62 मैच खेले हैं. जिनमें सिर्फ 67 विकेट ले पाए हैं. इकॉनमी रेट 8.39 का है. ये कोई ख़ास आंकड़ें नहीं हैं. उनडकट के अलावा भी बहुत से प्रॉमिसिंग बॉलर्स हैं जो अननोटिस्ड चले जाते हैं. न जाने उनडकट में आईपीएल वालों को क्या नज़र आता है? जयदेव उनडकट एक प्रॉमिसिंग बॉलर थे. थे – भूतकाल में. अब नहीं हैं. इसके पीछे उनकी इस आईपीएल की परफॉरमेंस ही ज़िम्मेदार ठहराई जाएगी.
पिछले साल भी उनडकट आईपीएल नीलामी के दूसरे सबसे महंगे खिलाड़ी थे. उन्हें 11.5 करोड़ रुपये में राजस्थान रॉयल्स ने ही खरीदा था. लेकिन फ़ायदा क्या हुआ – निल बटे सन्नाटा. ये वैसा था जैसे वीसीआर आ जाए, पूरा गांव इकठ्ठा हो जाए लेकिन रात भर बिजली ही न आए और अगली सुबह वीसीआर वाला सब कुछ वापस ले जाने को आ जाए. हर मैच में जयदेव के हाथ से गेंद निकली और वो गेंद बाउंड्री पार पहुंची. इसके सिवा कुछ भी नहीं हुआ. 2018 में उन्होंने 15 मैचों में मात्र 11 विकेट लिए जिस दौरान उन्होंने 9.65 रन प्रति ओवर की दर से गेंदबाज़ी की. 2017 में वो धोनी की कप्तानी में पुणे की टीम से खेले थे, जिसमें 12 मैचों में 24 विकेट लिए थे. इस दौरान उनकी इकॉनमी 7 रन प्रति ओवर की थी. और उससे पहले 2016 में उन्हें सिर्फ एक मैच खेलने मिला था जिसमें उन्हें कोई विकेट नहीं मिला था. ओवर ऑल देखा जाए तो उन्होंने आईपीएल में अलग-अलग टीमों के लिए 62 मैच खेले हैं. जिनमें सिर्फ 67 विकेट ले पाए हैं. इकॉनमी रेट 8.39 का है. ये कोई ख़ास आंकड़ें नहीं हैं. उनडकट के अलावा भी बहुत से प्रॉमिसिंग बॉलर्स हैं जो अननोटिस्ड चले जाते हैं. न जाने उनडकट में आईपीएल वालों को क्या नज़र आता है? जयदेव उनडकट एक प्रॉमिसिंग बॉलर थे. थे – भूतकाल में. अब नहीं हैं. इसके पीछे उनकी इस आईपीएल की परफॉरमेंस ही ज़िम्मेदार ठहराई जाएगी.Add Lallantop as a Trusted Source

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