आईपीएल 2019. 17 मैच पूरे हो गए हैं. लेकिन एक गरारी चौथे मैच पर अटकी हुई है. ये मैच था पंजाब और राजस्थान के बीच, जयपुर में. ये वही मैच है जिसमें रविचंद्रन अश्विन ने जॉस बटलर को रन-आउट किया था. ये रन-आउट मामूली रन-आउट नहीं था. ये मांकड़ स्टाइल वाला रन-आउट था. अंग्रेज़ चले गए मगर अंग्रेज़ी छोड़ गए. इसी तर्ज़ पर मांकड़ ने भी किया. 13 दिसंबर 1947 को ऑस्ट्रेलिया में वीनू मांकड़ ने सिडनी में बिल ब्राउन को रन आउट किया था. बहुत कम जगहों पर ये बताया गया है कि ऑस्ट्रेलिया के टूर पर वीनू मांकड़ ने असल में बिल ब्राउन को दो बार एक ही तरीके से रन आउट किया था. वीनू मांकड़ बॉल फेंकने को हुए तो बिल ब्राउन गेंद फेंके जाने के पहले ही क्रीज़ छोड़ कर चल पड़े. वीनू ने गेंद फेंकने की बजाय विकेट्स से सटा दी. बिल ब्राउन क्रीज़ के बाहर थे. वो आउट क़रार दिए गए. ऐसा एक नहीं दो बार हुआ. एक बार टूर मैच में और दूसरा ऑफिशियल टेस्ट मैच में. टूर मैच में मांकड़ ने रन-आउट करने से पहले ब्राउन को वॉर्न किया था लेकिन ऑफिशियल मैच में उन्होंने ऐसा नहीं किया. ऑस्ट्रेलियन प्रेस ने मांकड़ की खूब आलोचना की थी लेकिन ऑस्ट्रेलिया के कप्तान डॉन ब्रैडमैन ने उनका बचाव किया था. लेकिन ये सब कुछ बैकग्राउंडर है. मुद्दा ये है कि अश्विन ने जॉस बटलर को रन-आउट किया था और ये मुद्दा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है. हाल ही में जॉस बटलर और आर अश्विन ने सी पूरे मामले के बारे में एक बार फिर से बात की है. जॉस बटलर का कहना है कि उन्हें इस तरह से रन-आउट दिया जाना ग़लत था. उन्होंने ये भी कहा कि रन-आउट का ये नियम बहुत ज़्यादा साफ़ नहीं है और इसे ट्रांसपैरेंट किये जाने की ज़रूरत है. बटलर ने कहा, "मेरे रन-आउट ने टूर्नामेंट के शुरुआत में ही एक बेहद ग़लत नज़ीर पेश की है." ये पहला मौका नहीं है जब बटलर इस तरह से आउट हुए थे. इससे पहले साल 2014 में श्रीलंका के ख़िलाफ़ उन्हें इस तरह से आउट किया गया था. बटलर ने कहा कि रन-आउट की उस घटना ने उनके दिमाग की एकाग्रता को हिला दिया था और वो काफ़ी दिनों तक उसके बारे में सोचते रहे थे. उनका कहना था, "ये बात सच है कि मांकड़ नियमों के दायरे में रहना चाहिए क्यूंकि कोई भी बैट्समैन बॉल फेंके जाने से पहले क्रीज़ छोड़कर भाग नहीं सकता है. लेकिन ये भी सच है कि इस नियम में सब कुछ बहुत साफ़ नहीं है और संशय की स्थिति बरकरार है. इस नियम में 'बॉलर जब बॉल फेंकने वाला होता है' कहना बहुत साफ़ नहीं है." बटलर ने यहीं पर ये बताया कि अगर रीप्ले देखा जाए तो मालूम पड़ेगा कि अश्विन जब बॉल फेंकने वाली स्थिति में पहुंचे थे तो वो क्रीज़ में थे और इसीलिए उन्हें ग़लत आउट दिया गया.

इस पूरे मामले में रविचंद्रन अश्विन ने भी जवाब दिया है. उन्होंने कहा, "बचाव करने के लिए कुछ है ही नहीं. जैसा कि मैंने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि ये सब कुछ मौके पर हुआ. ऐसा नहीं है कि मैंने कोई प्लान बनाया था कि बटलर क्रीज़ छोड़ेगा और मैं उसे आउट कर दूंगा. उसने ये चार से पांच बार किया था. उस दिन वो मेरी बॉलिंग पर कोई रिस्क नहीं लेना चाह रहे थे और बॉल को लेग साइड में धकेल कर दो-दो रन बनाना चाह रहे थे. मैंने उसे ये चार-पांच बार करते देखा और नियम में ये लिखा हुआ है कि अगर कोई बैट्समैन क्रीज़ जल्दी छोड़ कर जा रहा है तो उसे आउट किया जा सकता है. ये बैट्समैन की ज़िम्मेदारी होती है कि वो क्रीज़ में मौजूद रहे." इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा, "मेरे लिए ये ज़रूरी है कि मेरी आत्मा क्या कह रही है और मुझे मालूम है कि मेरी आत्मा पूरी तरह से साफ़ है. जो भी लोग मुझे जानते हैं, ये भी जानते हैं कि मैं कभी भी कुछ भी नियमों के बाहर नहीं करूंगा." कई मौकों पर ऐसा भी कहा गया कि जो अश्विन ने किया वो खेल भावना के खिलाफ़ था. इसपर भी अश्विन ने खुल कर जवाब दिया. उन्होंने कहा, "खेल के नियमों में जो भी है, मैंने उसका फ़ायदा उठाया. मैं ये कतई नहीं कह रहा हूं कि मैंने ऐसा नहीं किया. अगर किसी को ये पसंद नहीं आया और उन्हें ऐसा लगता है कि मैंने जो किया, खेल भावना के ख़िलाफ़ था, तो इस नियम को हटवा दिया जाना चाहिये. लेकिन जब तक ये नियम है... देखिये हम बॉलर्स के पैर को तो लाइन के पीछे रहना ज़रूरी होता है. बल्लेबाज़ों के लिए तो बस उनका बैट लाइन के पीछे होना चाहिए." तो अभी बात ये है कि सही ग़लत का फ़ैसला नहीं किया जा सका है. हो भी नहीं सकेगा क्यूंकि दोनों ही खिलाड़ी एक दूसरे के ख़िलाफ़ विचार होने के बावजूद सही जगह पर खड़े हैं. बस देखना ये है कि आप उन्हें कहां से खड़े होकर देख रहे हैं. अब भी स्कोरबुक्स में जॉस बटलर के आगे रन-आउट अश्विन ही लिखा हुआ है. और इसका फ़ैसला थर्ड अम्पायर ने किया था जो कि आईसीसी के एलीट पैनल का एक मेंबर है.
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