इस मसले पर मेरा आख़िरी पॉइंट. अश्विन ने बटलर को रन आउट किया. यह थर्ड अंपायर तक गया जो आईसीसी की एलीट पैनल है. उन्होंने रिप्ले देखे और कहा कि नॉन-स्ट्राइकर आउट है. वह लॉ और प्लेयिंग कंडीशंस के संरक्षक हैं. फिर चाहे अश्विन ने जो भी किया, वह अंपायर का फैसला था.
अश्विन के इस हरकत से उन्हें क्रिकेट स्पिरिट का कोई अवॉर्ड नहीं मिलने वाला है.
मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि मैंने ऐसा देखा. IPL में ऐसी खेल भावना आने वाले खिलाड़ियों के लिए अच्छा उदाहरण नहीं सेट करेगी. मुझे उम्मीद है कि अश्विन को इसका पछतावा होगा.
एक कप्तान और एक व्यक्ति के रूप में अश्विन ने निराश किया. सभी कप्तान IPL में खेल भावना से खेलने के लिए सहमत होते हैं. अश्विन का बॉल डालने का कोई इरादा नहीं था- इसलिए इसे डेड बॉल कहा जाना चाहिए था. बीसीसीआई, आप देखिए. यह IPL के लिए अच्छा नहीं है.
लॉ, खेल की मिथिकल स्पिरिट से ऊपर है. झल्लाओ मत.
बटलर का आउट नियमों के तहत ही है लेकिन अश्विन को उन्हें कम से कम एक बार वार्न करना चाहिए था. सरप्राइज्ड! ध्यान रहे कि अश्विन एक बार इंटरनेशनल मैच में भी ऐसा कर चुके हैं लेकिन उस वक्त सहवाग ने अपील वापस ले ली थी.
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