भारत में इन दिनों दो तरह का मौसम देखने को मिल रहा है. एक तरफ कई राज्यों में आंधी-तूफान और भारी बारिश के साथ ओले गिर रहे हैं. दूसरी तरफ, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि भारत के कई इलाकों में सामान्य से ज्यादा दिनों तक लू चल सकती है. मौसम का यह विरोधाभासी पैटर्न देखकर कई लोग यह सोचने पर मजबूर हैं कि आखिर लू (Heatwave) और ओलावृष्टि (Hailstorm) एक साथ कैसे हो सकती है?
लू भी चल रही, ओले भी गिर रहे, इतना फास्ट पलटी कैसे मार रहा मौसम? IMD मे समझा दिया
भारत के कई हिस्सों में एक ही समय पर भीषण लू (Heatwave) और ओलावृष्टि (Hailstorm) जैसी स्थितियां देखी जा रही हैं. मौसम का यह विरोधाभासी पैटर्न देखकर कई लोग यह सोचने पर मजबूर हैं कि आखिर लू और ओलावृष्टि एक साथ कैसे हो सकती है?


लू और ओले एक-दूसरे से एकदम उलट हैं. ओले तब बनते हैं, जब आंधी-तूफान के समय हवा के तेज झोंके बारिश की बूंदों को बादलों के बहुत ऊंचे और ठंडे हिस्से में ले जाते हैं. वहां तापमान जमा देने वाली ठंड से भी कम होता है, जिससे ये बूंदें बर्फ का गोला बन जाती हैं. जब ओला इतना भारी हो जाता है कि हवा उसे ऊपर नहीं रोक पाती तो गुरुत्वाकर्षण के कारण वह तेजी से जमीन पर गिर जाता है.
लू तब चलती है, जब जमीन की सतह बहुत गर्म हो जाती है. गर्मी के मौसम में सूरज की किरणें सीधी और बहुत तेज पड़ती हैं. बारिश न होने के कारण जमीन पूरी तरह सूखी होती है, जिससे वह तवे की तरह तपने लगती है. राजस्थान के रेगिस्तान की तरफ से आने वाली हवाएं बहुत गर्म और सूखी होती हैं. जब ये हवाएं मैदानी इलाकों जैसे- दिल्ली, यूपी, बिहार की तरफ बढ़ती हैं तो अपने साथ बहुत गर्मी लेकर आती हैं. कभी-कभी आसमान में ऐसी स्थिति बनती है कि गर्म हवा ऊपर नहीं जा पाती और नीचे ही दबकर और ज्यादा गर्म हो जाती है.
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ये दोनों चीजें एक ही समय पर हो सकती हैं क्योंकि भारत भौगोलिक रूप से बहुत बड़ा है और यहां इस समय कई मौसम प्रणालियां (वेदर सिस्टम) एक साथ एक्टिव हो सकती हैं.
1. पश्चिमी विक्षोभ गर्म हवा से टकरा रहे हैं.
‘पश्चिमी विक्षोम’ एक तरह का चक्रवाती तूफान होता है. अंग्रेजी में इसे ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ कहते हैं. यह कम दबाव वाले सिस्टम के तौर पर काम करता है जो भूमध्य सागर के आसपास बनते हैं. ये नमी लेकर पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ते हैं और पाकिस्तान के रास्ते भारत के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में पहुंचते हैं. दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल इसका सीधा असर झेलते हैं.
बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ इस समय मैदानी इलाकों में जमीन की सतह के बेहद गर्म तापमान के साथ टकरा रहा है. इसका नतीजा यह होता है कि वायुमंडल में जबरदस्त अस्थिरता पैदा हो जाती है, जिससे आंधी-तूफान, ओलावृष्टि और तेज बारिश होती है. वहीं दूसरी तरफ, जो इलाके इन डिस्टर्बेंस से सीधे तौर पर प्रभावित नहीं होते, वे गर्मी की चपेट में आकर झुलसते रहते हैं.
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2. सतह का तापमान बहुत ज्यादा होता है.
मई के महीने में भारत में जमीन का तापमान सूरज की गर्मी की वजह से तेजी से बढ़ जाता है. मॉनसून आने के पहले भारत के बड़े हिस्से में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाता है. इसकी वजह से गर्म हवा तेजी से ऊपर की ओर उठती है. जब ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ से आई नमी इस गर्म हवा के साथ मिल जाती है तो देखते ही देखते ऊंचे-ऊंचे तूफानी बादल बन जाते हैं.
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